»   »  'हिंदू भूमिकाएं क्यों नहीं कर सकता'

'हिंदू भूमिकाएं क्यों नहीं कर सकता'

By Staff
Subscribe to Filmibeat Hindi

एक क़िस्सा है. सलमान ख़ान की फ़िल्म 'तेरे नाम' रिलीज़ होने वाली थी और दिल्ली में उनकी प्रचार कांफ्रेंस रखी गई थी.

एक पत्रकार ने सलमान से उनके प्रेम और अभिनेत्रियों का साथ हर बार छोड़ देने पर एक सवाल दाग़ दिया. सलमान उखड़ गए और उसके बाद वे पूरी कांफ्रेंस में सहज नहीं हो पाए थे.

उनके वन्यजीवों के शिकार के मामले और अभिनेत्री ऐश्वर्य राय के साथ संबंधों के टूटने के बाद उनके जीवन के अंधेरों की कहानियां किसी से छुपी नहीं हैं, लेकिन इस बार जब वे मुंबई में फ़िल्मों से अलग सोनी टीवी के शो 'दस का दम' के दूसरे संस्करण के दौरान मिले तो उनसे मिलने वाले लोगों को हैरानी ही नहीं ख़ुशी भी थी कि अब सलमान न केवल लगातार असफलताओं और क़ानूनी पचड़ों से उभरते हुए अभिनेता हैं बल्कि वे व्यक्ति के तौर पर भी बेहतर हो रहे इंसान हैं.

यह अलग बात है कि 'पार्टनर' के बाद उनकी क़रीब दस फ़िल्मों का हश्र ठीक नहीं रहा. पर अब वे इसकी चिंता नहीं करते. हालाँकि अब वे बातचीत में थोड़ी सावधानी और अधिक उत्साह वाले दिखाई देते हैं पर शिकायत भी करते हैं कि उनके बदलने के बाद भी लोग नहीं बदले.

पेश है रामकिशोर पारचा की उनसे विस्तृत बातचीत के अंश:

आप पहले की तुलना में कैसे बदल गए?

लोग अब भी मुझसे मेरे असफल प्रेम, क़ानूनी पचडों और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े सवाल ही करना चाहते हैं. जबकि मैं लोगों से अपनी फ़िल्मों, चरित्रों, और अभिनय की विकासशीलता पर बात करना चाहता हूँ. आज भी लोग मेरी शादी में ज़्यादा रुचि रखते हैं. वे भूल जाते हैं कि कैसे मैं लगातार फ़िल्मों की असफलता और व्यक्तिगत जीवन के अंधेरों से जूझता रहा हूँ. अब मैं अफ़वाहों और ग़लतबयानी के तनाव को नहीं झेलना चाहता.

आप पहले बहुत ज़्यादा नहीं बोलते थे, लेकिन आज न केवल आप बोलना सीख गए हैं, बल्कि अब आपकी तबियत में रचा बसा ग़ुस्सा और बड़बोलापन भी नहीं दिखता?

मैं जीवन में भरोसे वाला इंसान हूँ, मैं सच जानता हूँ. मैंने जीना सीख लिया है. मेरे प्रशंसकों में बच्चे और बुज़ुर्ग सभी हैं. अफ़वाहों और विवादों से उनकी सोच पर फ़र्क़ पड़ता है. मैं एक बार गुजरात गया था. मैं हैरान था कि वहां हिंदू हो या मुसलमान, कोई भी मुझे छोड़ने के लिए तैयार नहीं था. लोग प्रेम चाहते हैं.

जिस देश में तीन-तीन ख़ान फ़िल्म इंडस्ट्री पर राज करते हों और जिस देश का राष्ट्रपति मुसलमान रहा हो वहां फिर हिंदू-मुसलमान का सवाल क्यों उठता है. आप सामने आकर इसका विरोध क्यों नहीं करते?

[हंसते हैं] सबसे ज़्यादा विरोध मैंने ही किया है और सबसे ज़्यादा फ़तवे भी मेरे ही नाम हैं. मेरी माँ हिंदू हैं और मेरी बहन ने एक हिंदू लड़के से शादी की है. फिर भी कुछ लोग मेरी एक फ़िल्म में राम की भूमिका करने के सवाल पर विवाद कर देते हैं. जब हिंदू कलाकार मुस्लिम चरित्र निभा सकते हैं तो मैं हिंदू चरित्र क्यों नहीं निभा सकता. मैं अकेला मुसलमान हूँ जो बांद्रा में अपने परिवार के साथ गणेश पूजा में शामिल होता रहा हूँ.

सोनी टीवी पर आप दूसरी बार एक बड़े और लोकप्रिय गेम शो को एंकर करने जा रहे हैं. आपको नहीं लगता कि फ़िल्मों से अलग टीवी पर ज़्यादा दिखना आपकी छवि और करियर को नुक़सान पहुंचा सकता है या आप ये सिर्फ़ पैसे के लिए कर रहे हैं?

पैसे की ज़रूरत किसे नहीं होती. लेकिन मैं हमेशा पैसे के लिए काम नहीं करता. चंद साल पहले तक मैं एक मूडी और घमंडी इंसान के रूप में जाना जाता रहा हूँ. लेकिन दस का दम जैसे गेम शो से मैं आम आदमी के पास आ गया हूँ. मैं हमेशा से एक आम आदमी बनना चाहता हूँ. मेरा मन करता है कि लोगों से बाते करते हुए मैं बारिस्ता में कॉफी पीने जाऊं. लेकिन मैं नहीं कर पाता. इस शो के ज़रिए मैं आम लोगों से मिल लेता हूँ.

जहाँ तक छवि और करियर कि बात है तो टीवी अब एक पावरफुल माध्यम बन गया है और हम ख़ुद अपनी फ़िल्मों के प्रचार के लिए इसका इस्तेमाल करते रहे हैं. मुझे याद है जब बच्चन साहब टीवी करने जा रहे थे तो लोगों ने कहा था कि उन्हें नहीं करना चाहिए. लेकिन अब ऐसा कोई नहीं कहता. अब सब टीवी पर मेरे जैसा शो करना चाहते हैं.

पिछली बार जब अपने शो किया था तो उस समय आपके सामने किंग ख़ान और अक्षय दोनों थे. लेकिन इस बार आप अकेले हैं. आपको लगता है इस बार भी शो हिट होगा?

हर कलाकार सोचता है कि जब उसकी फ़िल्म रिलीज़ हो तो किसी की फ़िल्म सामने न हो, लेकिन मेरा मानना है कि जब तक आपके सामने कोई नहीं होगा तब तक आपकी असली परख नहीं होगी. जीवन की चुनौती कभी ख़त्म नहीं होती. मेरे पास शो शुरू होने से पहले ही संदेश आने शुरू हो गए हैं कि इस बार मेरे शो में कौन से कलाकार शामिल होंगे और मैं नया क्या कर रहा हूँ.

सुना है आप किंग ख़ान के साथ खेलना चाहते हैं?

उनके ही नहीं, बल्कि मैं चाहता हूँ कि मेरे शो में आमिर से लेकर अक्षय तक सभी आएं. मैं मल्लिका से लेकर माधुरी और श्री देवी तक को अपने यहाँ लाना चाहता हूँ. बस मैं इतना चाहता हूँ कि जब मेरा शो चल रहा हो और विज्ञापन आए तो चैनल नहीं बदला जाए. मुझे ग़ुस्सा आ जाएगा और फिर लोग कहेंगे कि देखिए मैं कितना बदतमीज़ आदमी हूँ.

[हंसते हैं] लोगों ने तो यहाँ तक भी कहा कि मैंने अपने शो के लिए शाहरूख़ से टिप्स लिए हैं. ये बातें मुझे दुख पहुंचाती हैं. वे मेरे बेहतरीन दोस्त हैं. लेकिन हम काम के बारे में सलाह मशविरा नहीं करते.

आपके साथ जब लोग किसी अभिनेत्री का नाम जोड़ देते हैं तो कैसा लगता है, अभी भी आपके साथ कैटरीना और क्लाउड़िया का नाम जुडा हुआ है?

यही बातें हैं जो मुझे सबसे ज़्यादा दुख पहुंचती हैं. अरबाज़ और मलायका ने किसी प्रोमोशन के लिए जब मीडिया में अपने संबंधों की बात की तो मेरे पिता ने इस पर कड़ी आपत्ति की. कई बार हमारी ऐसी बातों को लोग ग़लत तरीक़े से प्रचारित करते हैं. वो हमारी छोटी से ग़लती को चटखारे लेकर उछालते हैं. उन्हें ऐसा करने से पहले सोचना चाहिए कि इससे किसी की जिंदगी बर्बाद हो सकती है. लोग एक या दो बार ऐसा करते हैं तो कोई भी बर्दाश्त कर लेगा, लेकिन जब कोई बार-बार मुझे तंग करता है तो मैं रीएक्ट करता हूँ. फिर लोग मुझे लेकर शुरू हो जाते हैं.

लोग तो कहेंगे ही ना, आप चुनाव प्रचार करते हैं और वोट देने की वकालत भी. लेकिन ख़ुद वोट नहीं डालते?

मैं लंदन में शूटिंग कर रहा था. यदि मैं यहाँ होता तो ज़रूर जाता. मैं बाक़ी लोगों की तरह निर्माता का नुक़सान करके जहाज़ पकड़ के दिखावा करने यहाँ नहीं आना चाहता था.

आप हमेशा से फ़िल्मों में आना चाहते थे और आपने सोचा था कि इतने सफल सितारे बनेगे?

पता नहीं. लेकिन घर का माहौल इसमें मददगार बन गया. हलाँकि मेरी पहली फ़िल्म 'बीवी हो तो ऐसी' लोगों ने नकार दी थी. लेकिन मेरे पिता हमेशा हारने के बाद भी जमे रहने की सीख देते रहे हैं. उन्होंने ख़ुद संघर्ष के बाद सफलता का एक लंबा सफ़र किया. मैं उसी पर चलता हूँ.

और आपके बाक़ी भाई?

सब अपने तरीक़ों से काम कर रहे हैं.

बदलते सिनेमा के दौर में हर कलाकार कुछ नया देने की कोशिश कर रहा है. आप नए सिनेमा के बारे में नहीं सोचते?

मुझे नए सिनेमा की परिभाषा समझ नहीं आती. मैंने 'ख़ामोशी' की थी. मैं ऐसे सिनेमा में काम करने का पक्षधर हूँ जिसमे सिनेमा हाल हमेशा भरा रहे. मैंने अपने करियर में हर तरह की फ़िल्में कीं और घोर असफलता का दौर भी देखा.

अब आपके लिए बचा क्या है?

अब मैं शानदार तरीक़े से रहना चाहता हूँ. मैंने हाल में ही नया घर लिया है. मेरे दोस्तों की संख्या ज़्यादा नहीं है पर जो हैं मैं उन्हें बचाए रखना चाहता हूँ और मौक़ा मिले तो सड़क पर चलते हुए एक आम आदमी की तरह.

आपनी आने वाली फ़िल्मों के बारे में बताएं?

सबसे पहले 'वांटेड' आ रही है. उसके बाद 'मैं और मिसेज़ खन्ना', 'लंदन ड्रीम्स' और बाद में दिवाली पर 'वीर' आएगी.

For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts

    रहें फिल्म इंडस्ट्री की हर खबर से अपडेट और पाएं मूवी रिव्यूज - Filmibeat Hindi

    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Filmibeat sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Filmibeat website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more