बापू और पोस्टकार्ड का रिश्ता : ‘रोड टू संगम'

By Neha Nautiyal

Road to Sangam
फिल्म 'रोड टू संगम" राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की चिता की राख की खोज से प्रेरित है। फिल्म के नायक परेश रावल ने इलाहबाद में रहने वाले एक मुसलमान मैकेनिक हसमत उल्लाह का किरदार निभाया है। जो अपने शहर में रहने वाले अपने समुदाय के लोगों से बापू की राख संगम तक पहुंचाने की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए पोस्टकार्ड का प्रयोग करता है।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए भारतीय डाक विभाग ने खुद इस फिल्म के साथ सम्बद्ध किया है। इस फिल्म के संबंध में डाक विभाग की सचिव राधिका दोरईस्वामी ने कहा " डाक विभाग भारत की आम आदमी की सेवा 150 वर्षो से कर रहा है। विभाग का पोस्ट कार्ड हमेशा साधारण भारतीय का सबसे सस्ता और संभवत: सर्वाधिक प्रिय संचार का साधन रहा है जो पोस्ट कार्ड के जरिये डाक विभाग से भावुक बंधन बांधता है। "

बापू संवाद के लिए पोस्ट कार्ड को सबसे किफायती साधन मानते थे जो भारत के आम आदमी के साथ परिचित उनकी मितव्ययी जीवन पद्घति में शामिल था। डाक विभाग इस फिल्म के साथ संबद्ध होकर महात्मा गांधी को अपनी श्रद्घांजलि दे रहा है। इस फिल्म को अन्तर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सवों में अनेक पुरस्कार मिल चुके हैं, जैसे- दक्षिण अफ्रीका के अन्तर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सव में सर्वोत्तम प्रथम फिल्म निर्देशक पुरस्कार, अन्तर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सव जर्मनी में सर्वोत्तम फीचर फिल्म पुरस्कार और लास एंजलिस रीयल फिल्मोत्सव में सर्वोत्तम वास्तविक संगीत-लेख के साथ-साथ सर्वोत्तम डिजाइन उत्पादन पुरस्कार।

फिल्म के निर्माता अमित छेड़ा ने कहा कि डाक विभाग देश के प्रत्येक नागरिक तक बिना जाति, धर्म और आर्थिक स्तर को महत्व दिए अपनी पहुंच रखता है। पूरे देश में 1,50,000 डाकघरों के जाल के माध्यम से यह अनूठा संगठन राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है जो आज भी महात्मा गांधी के मूल्यों को आगे बढ़ा रहा है।

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