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    संजय बने म्यूजिशियन, वर्मा बनें सिंगर

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    Sanjay-ram gopal verma
    बॉलीवुड में संगीत की प्रतिभाओं की कमी नहीं है लेकिन अपनी नई फिल्मों में सही भावनाओं को प्रेषित करने के लिए संजयलीला भंसाली और रामगोपाल वर्मा जैसे निर्देशकों ने यह काम संभाला। भंसाली ने जहां 'गुजारिश' में संगीत दिया है तो वर्मा ने 'रक्तचरित्र' का एक गीत गुनगुनाया है।

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    भंसाली कहते हैं, "फिल्म में मेरे संगीत देने के पीछे का मकसद यह रहा कि मुझे लगा कि मैं जितनी अच्छी तरह से किरदारों को समझता हूं और साथ ही यह समझता हूं कि उन्हें संगीत में अपने भावों को किस तरह से प्रेषित करना है, उतना कोई दूसरा संगीतकार नहीं समझ सकता। मेरे मन में कुछ गहरे विचार थे, इसलिए मैं जो थोड़ा-बहुत संगीत जानता था उसके आधार पर यह प्रयोग किया है। वैसे मैंने जो किया है उसे लेकर मैं खुश हूं।"

    वर्मा ने 'रक्तचरित्र' के तेलुगू संस्करण का 'कुट्टुलाटो' शीर्षक गीत गाया है। वह कहते हैं कि जब उनकी फिल्म के संगीतकारों को इस गीत के लिए सही आवाज नहीं मिली तो उनसे यह गीत गाने के लिए कहा गया। वर्मा ने फेसबुक पर लिखा है, "मेरे गाने के पीछे यह मकसद नहीं था कि मैं अपनी गायन प्रतिभा दिखाना चाहता हूं। जब मैं संगीत निर्देशकों को यह बता रहा था कि गीत किस तरह का होना चाहिए तो वे मेरे दखल से तंग आ गए थे और उन्होंने मुझ पर यह गीत गाने के लिए दबाव बनाया।"

    निर्देशक शिरीष कुंदर ने भी अपनी पत्नी व निर्देशिका फरहा खान की फिल्म 'तीस मार खां' के शीर्षक गीत का संगीत तैयार किया है। कुंदर ने इस फिल्म की पटकथा भी लिखी है। कुंदर ने मुम्बई से फोन पर बताया कि वह एडिटिंग और निर्देशन के क्षेत्र में आने से पहले संगीत व नृत्य निर्देशन करते रहे हैं और उन्होंने अपनी फिल्म 'जान-ए-मन' का बैकग्राउंड संगीत भी तैयार किया था। वह कहते हैं कि इस गीत के लिए संगीत देना उनके लिए सामान्य बात है।

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