भारतीय साइन लैंग्वेज को मान्यता देने के सरकार के फैसले पर रणवीर सिंह ने कही ये बात
भारत सरकार ने स्कूलों में इंडियन साइन लैंग्वेज (आईएसएल) को एक अलग विषय के रूप में पढ़ाने की घोषणा की है। प्रधानम़त्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आईएसएल को अब भारत के स्कूलों में एक विषय के तौर पर देश के एजुकेशन सिस्टम का हिस्सा बनाया जायेग। मतलब अब छात्र इसकी पढ़ाई कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि इससे आईएसएल को बढ़ावा मिलेगा और इस तरह देश के तीन लाख से अधिक दिव्यांग लाभांवित होंगे जो इस समय शिक्षा के लिए साइन लैंग्वेज पर निर्भर हैं।
रणवीर सिंह उन स्टार्स में से एक हैं जिन्होंने भारतीय साइन लैंग्वेज को देश की 23वीं आधिकारिक भाषा घोषित करने की लगातार मांग करते रहे हैं। इस मसले पर भी जागरुकता बढ़ाने के लिए उन्होंने हाल ही में एक पिटिशन साइन किया था।

आईएसएल को मान्यता देने के सरकार के फैसले से रणवीर काफी उत्साहित हैं! उन्होंने कहा, :पहली बार भारतीय साइन लैंग्वेज -आईएसएल- को भाषा का दर्जा दिया गया है और मुझे गर्व है कि मेरे देश ने इंक्लूजिविटी को बढ़ावा देने के लिए यह प्रोग्रेसिव कदम उठाया है। इससे बड़ी संख्या में लोग लाभांवित होंगे। यह उनके अधिकारों के संबंध में एक महत्त्वपूर्ण बदलाव को चिह्नित करता है। यह कदम उन्हें समान पहुंच देने के लिए एक लहर पैदा करेगा और इस समुदाय को दुनिया जीतने की ताकत देगा।
उन्होंने आगे कहा, :छात्रों के एक विषय के रूप में आईएसएल की पढ़ाई करने से देश के बधिर नागरिकों के प्रति समाज में व्याप्त टबू दूर करने में संभवत: मदद मिलेगी। मैं कहूंगा कि इस समय यह कदम जरूरी था। इंकइंक रिकॉर्ड्स के जरिये हमने आईएसएल को मान्यता प्राप्त भाषा घोषित करने के महत्त्व के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए पिटिशन के लिए समर्थन जुटाया और बधिरों तथा कम सुनने वालों के लिए आईएसएल म्यूजिक वीडियो जारी किया ताकि उन्हें यह महसूस हो कि वे भी समाज का हिस्सा हैं।


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