For Quick Alerts
    ALLOW NOTIFICATIONS  
    For Daily Alerts

    माओवादियों को भा रही है 'रण'

    By Neha Nautiyal
    |

    काठमांडू। बॉलीवुड की लोकप्रिय फिल्म 'शोले' पर बनी रामगोपाल वर्मा की रीमेक फिल्म 'आग' पर दो साल पहले नेपाल में सेंसर की कैंची चली थी लेकिन वर्मा की नई फिल्म 'रण' को यहां अलग तरह की लोकप्रियता मिल रही है। माओवादी नेता इस फिल्म को प्रेरणादायक मान रहे हैं। नेपाल के पूर्व माओवादी छापमारों ने अपने 10 साल के 'पीपुल्स वार' के दौरान हिन्दी फिल्मों पर प्रतिबंध लगा दिया था। अब यही छापामार अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म 'रण' देख रहे हैं।

    बच्चन ने फिल्म में मीडिया के एक ऐसे किरदार की भूमिका की है जो चतुर राजनेताओं से जूझता है। दैनिक समाचार पत्र कांतिपुर के मुताबिक पूर्व माओवादी वित्त मंत्री बाबूराम भट्टाराय और उनकी पत्नी व पूर्व पर्यटन मंत्री हिसिला यामी ने काठमांडू के गोपी कृष्ण मल्टीप्लेक्स में एक विशेष स्क्रीनिंग के दौरान यह फिल्म देखी। ऐसे समय में जब नेपाल के राजनेता एक नया संविधान बनाने में व्यस्त हैं तब माओवादी नेताओं ने खबरों और राजनीति के ताने-बाने में बुनी इस फिल्म को देखने की जिज्ञासा व्यक्त की। खबरें और राजनीति माओवादी आंदोलन के दो प्रमुख तत्व हैं।

    फिल्म शुरू होने के साथ कई माओवादी नेताओं ने मल्टीप्लेक्स में प्रवेश शुरू किया। इनमें पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के कमांडर नंदकिशोर पुन पसांग और चंद्रप्रकाश खनाल बलदेव व माओवादी सांसद तोप बहादुर रायामाझी और नेत्र बिक्रम चंद शामिल थे। फिल्म देखने के बाद बाहर निकले भट्टाराय ने कहा, "इस तरह की फिल्में हम राजनेताओं के लिए एक प्रेरणा हैं।" उन्होंने कहा कि यह फिल्म संदेश देती है कि राजनेताओं के ऊंचे पदों पर पहुंचने के लिए उनमें योग्यता होना जरूरी है।

    तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
    Enable
    x
    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    X