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    मस्त है लादेन

    By अंकुर शर्मा
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    लादेन यानी डर। लादेन का मतलब ऐसी खौफनाक तस्वीर जिसके नाम से रूह तक कांपती है लेकिन अभिषेक शर्मा का लादेन लोगों को हंसाता है, गुदगुदाता है उन्हें पेट पकड़ कर हंसने को मंजबूर करता है। एक साफ-सुथरे अंदाज में चुटीला व्यंग्य है तेरे बिन लादेन ..... जो सिर्फ लोगों का मनोरंजन करता है इसके अलावा कुछ नहीं। अभिषेक शर्मा ने एक अच्छी कोशिश की है। जिसमें वो काफी हद तक सफल है।

    फिल्म की कहानी का केन्द्र अली जाफर है लेकिन पलड़ा प्रद्मुम्नसिंह का भारी है। उन्होंने लादेन को ऐसे पेश किया है जैसा कोई सोच भी नहीं सकता है। आतंकी लादेन तो अरबी बोलता है लेकिन अभिषेक शर्मा का लादेन पंजाबी। आतंकी लादेन खौफ और हथियारों की उगाही करता है लेकिन अभिषेक का लादेन मुर्गी पालता है। और जब ये मुर्गी वाला लादेन अपनी ठेठ पंजाबी में अरबी के संवाद बोलता है तो लोगं को पास हंसने के सिवाय और कोई चारा नहीं होता है।

    मस्त है लादेन

    ये फिल्म पाक में दिखायी नहीं गई इसके पीछे कारण लादेन का खौफ नहीं बल्कि पाक को फिल्म में अमेरिका का पिछलग्गू बताया जाना है। फिलहाल ये फिल्म कोई दंगा नहीं कराती हां लोगो का स्वस्थ मंनोरंजन जरूर करती है। पाक वाले जरूर एक अच्छी फिल्म मिस करेंगे। शंकर-अहसान-लॉय का संगीत फिल्म को खास बनाता है। अली जाफर, प्रद्युमन सिंह, पीयूष मिश्रा और सुगंधा गर्ग जैसे कलाकारों ने उपने अभिनय के दम पर आशाएं जगायी हैं। फिलहाल कहा जा सकता है कि तेरे बिन लादेन एक फुल मनोरंजक फिल्म है जिसे पूरे परिवार के साथ देखा जा सकता है क्योंकि तेरे बिन का लादेन बड़ा मस्त है।

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