चुपके-चुपके श्रीलंका में शूटिंग

दीपा मेहता का कहना है कि उन्होंने धार्मिक समूहों के विरोध से बचने के लिए भारत या पाकिस्तान के बजाय श्रीलंका में शूटिंग करने का फ़ैसला किया.रूशदी के उपन्यास 'द सैटेनिक वर्सेस' में कुछ आपत्तिजनक बातें होने के कारण ईरान ने उनके ख़िलाफ़ फ़तवा जारी किया था.'मिडनाइट चिल्ड्रेन' में भारत की स्वतंत्रता से पहले और बाद के इतिहास का वर्णन है. इस पुस्तक को 1981 का बुकर पुरुस्कार और 1993 का “बुकर ऑफ़ बुकर्स" पुरुस्कार मिल चुका है.
श्रीलंका ने 1997 में बीबीसी को इस उपन्यास पर आधारित फ़िल्म की शूटिंग की अनुमति नहीं दी थी.विरोध प्रदर्शनों से बचने के लिए दीपा मेहता की फ़िल्म यूनिट के हर सदस्य को गोपनीयता के एक समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया था.दीपा मेहता ने कनाडा के 'ग्लोब एंड मेल' समाचार पत्र को बताया, “हम वास्तव में यह फ़िल्म करना चाहते थे. लेकिन इसकी क़ीमत हमें अपनी चुप्पी से चुकानी पड़ी."
जैसे ही इस फ़िल्म की शूटिंग की जगह की ख़बर बाहर आई ईरान ने इसकी शिकायत की और श्रीलंका ने शूटिंग की अनुमति वापस ले ली.लेकिन दीपा मेहता ने राष्ट्रपति राजपक्षे से इस फ़ैसले के ख़िलाफ अपील की और दोनों पक्षों को सुनने के बाद उन्होंने इस फ़ैसले को पलट दिया.कोलंबो स्थित बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हैवीलैंड का कहना है कि वहाँ के मुस्लिम संगठनों ने सरकार के इस फ़िल्म की शूटिंग की अनुमति देने के फ़ैसले पर चिंता प्रकट की है.
लेकिन उन्हें इस बात की भनक ही नहीं लगी कि वहाँ शूटिंग पहले से ही हो रही है.सलमान रूशदी के ख़िलाफ़ 1989 में अयातुल्लाह ख़ुमैनी के फ़तवा दिए जाने के बाद वह लगातार पुलिस की कड़ी सुरक्षा में रह रहे हैं.'मिडनाइट चिल्ड्रेन' पर आधारित फ़िल्म अगले साल रिलीज़ होगी और इसका नाम होगा “विंड्स ऑफ़ चेंज" यानि परिवर्तन की हवा.


Click it and Unblock the Notifications











