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    ना गुलाबो चली ना बिजली: दर्शकों की राय

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    विशाल भारद्वाज की फ्लॉप फिल्मों मे एक और फिल्म का नाम जुड़ता हुआ सा प्रतीत हो रहा है और वो है इस साल की मोस्ट अवेटेड फिल्मों में से एक 'मटरु की बिजली का मन्डोला'। शुक्रवार 11 जनवरी को रिलीज हुई फिल्म मटरु की बिजली का मन्डोला फिल्म के रिलीज होते ही लोग भारी संख्या में फिल्म को देखने पहुंचे। हालांकि यूपी की तरफ मौसम की मार की वजह से दर्शकों की संख्या में भारी कमी नज़र आई। लेकिन धीरे धीरे बाकी के शो में लोगों की संख्या घटने लगी और शाम तक तो ये हाल रहा है कि सिनेमाहॉल और टिकट की खिड़की पर सन्नाटा छा गया।

    फिल्म को देखकर निकले लोगों से उनकी राय पूछने पर जवाब मिला की विशाल भारद्वाज ने एक बार फिर से उन्हें निराश किया है। फिल्म में कॉमेडी डालनी की पूरी कोशिश की गयी लेकिन फिर भी फिल्म में एक ही बात को बार बार घुमा फिराकर दिखाया गया। फिल्म के मुख्य कलाकार ही इतने कमजोर थे कि फिल्म को देखने वाले बोर हो गये। मटरु के किरदार में इमरान खान और बिजली के किरदार में अनुष्का शर्मा ने बहुत ही कमजोर एक्टिंग की। यूं लगा कि पूरी फिल्म पकंज कपूर जो कि मन्डोला के किरदार में थे के इर्द गिर्द घूमती रही। हालांकि पंकज कपूर दर्शकों को सिनेमाहॉल तक खींच लाने में सफल न हीं हो पाए क्योंकि उनकी फैन फॉलोइंग ही इतनी नहीं है कि उनके अकेले के दम पर कोई फिल्म चल पाए।

    दूसरी तरफ फिल्म का एक मजबूर किरदार थीं शबाना आजमी। उनकी एक्टिंग भी बेहतरीन थी लेकिन इसके बावजूद को बॉक्स ऑफिस की सफलता दिलाने में वो भी कामयाब नहीं हो पाईं। इसके बाद बात करते हैं मन्डोला की गुलाबो भैंस की। असल में गुलाबो भैंस को जितना ज्यादा हाइलाइट किया गया था वैसा फिल्म में कुछ भी नहीं था। गुलाबो उस शराब की बोतल का ब्रैंड था जो पंकज कपूर पीता था। जब वो शराब पीना छोड़ देता है तो उसे वो गुलाबो भैंस दिखाई देने लगती है। गुलाबो कैरेक्टर को फिल्म में बहुत ही कमजोर तरीके से दिखाया गया है शायद अगर विशाल गुलाबो पर ही ज्यादा ध्यान दे देते तो दर्शकों को कुछ तो हंसी ठहाके करने का मौका मिल जाता। मटरु की बिजली यानी अनुष्का शर्मा ने भी फिल्म में कुछ हटकर एक्टिंग नहीं की है। जब तक है जान वाली अनुष्का ही मडरु की बिजली में भी नज़र आईं।

    कुल मिलाकर विशाल की मटरु की बिजली का मन्डोला को देखने वाले पूरी तरह से निराश होकर लौटे। सिर्फ कुछ सीन्स जो कि इमरान और पंकज कपूर के बीज फिल्माए गये थे वो लोगों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर पाए और पंकज कपूर के साथ शबाना आजमी के कुछ सीन्स लोगों को बेहतरीन लगे इसके अलावा फिल्म में सबकुछ फीका था। विशाल ने जैसा कहा था कि उनकी फिल्म में गुलाबो से भी ज्यादा गुलाबी बातें हैं ऐसा कुछ भी नहीं था। फिल्म में गालियों का भी जमकर प्रयोग किया गया है। जिन्हें देखकर ये कहीं से भी यू सर्टिफिकेट की फिल्म नहीं लगती।

    English summary
    Matru Ki Bijlee Ka Mandola disappoints the viewers. Vishal Bhardwaj has again delivered the flop movie. According to the people Matru Ki Bijlee Ka Mandola has nothing new or interesting. It's both main characters Matru and Bijlee is very dull and not up to the mark.
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