नवरात्र का सातवां दिन मां काली के नाम.. विकराल लेकिन 'शुभंकारी'

या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
मां का सातवां रूप बड़ी ही विकराल है लेकिन मां ने यह रूप अपने भक्तों की भलाई के लिए ही रखा है। मां काली को 'शुभंकारी' भी कहते है। दानव, दैत्य, राक्षस, भूत, प्रेत आदि इनके स्मरण मात्र से ही भयभीत होकर भाग जाते हैं। ये ग्रह-बाधाओं को भी दूर करने वाली हैं। कहते हैं मां अपने भक्तों को कभी भी निराश नहीं करती हैं। नवरात्र के दिनों में मां की सच्चे मन से पूजा की जानी चाहिए। लोग घट स्थापित करके मां की उपासना करते हैं जिसे खुश होकर मां हमेशा अपने बच्चों की रक्षा करती हैं।
मां काली की सबसे ज्यादा पूजा बंगाल में होती है। नवरात्रि के अवसर पर आज के ही दिन मां काली की आंखों पर पट्टी बांधकर कोलकाता के कई स्थानों में स्थापित किया जाता है और पूजा-अर्चना करके आंखों की पट्टी खोल दी जाती है। मां के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग कोलकाता पहुंचते हैं इसलिए बंगाल की दूर्गापूजा पूरे भारत में मशहूर है।


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