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फिल्म को सेंसर बोर्ड ने कहा 'असंस्कारी'...लेकिन चुनी गई गोल्डन ग्लोब के लिए!

Written By: Shweta
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अलंकृता श्रीवास्तव की फिल्म लिपस्टिक अंडर माई बुर्का को सेंसर बोर्ड ने पास नहीं किया क्योंकि फिल्म उन्हें असंस्कारी लगी। फिल्म के बारे में उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि फिल्म में महिलाओं को गलत तरीके से पेश किया गया गया। लेकिन अब सेंसर बोर्ड के सारे फैसले धरे के धरे नजर आ रहे हैं।

जी हां दरअसल लिपस्टिक अंडर माई बुर्का को हॉलीवुड फॉरिन प्रेस एसोसिएशन द्वारा चुना गया है। इस फिल्‍म को लॉस एंजल्स में हुए भारतीय फिल्‍मोत्‍सव (आईएफएफएलए) में प्रदर्शित किया गया था और यहीं से इसे हॉलीवुड फॉरेन प्रेस एसोसिएशन द्वारा चुना गया है।

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क्‍योंकि इस फिल्‍म को अब चुन लिया गया है जिसका मतलब यह है कि अब इस फिल्‍म की डायरेक्‍टर अलंकारिता श्रीवास्‍तव और प्रोड्यूसर प्रकाश झा इसे इस साल के गोल्‍डन ग्‍लोब्‍स अवॉर्ड्स में एक आधिकारिक एंट्री के तौर पर भेज सकते हैं।

अब ये तो सोचने वाली है कि जिस फिल्म को भारत की सेंसर बोर्ड रिलीज करने से इंकार करती है उसे विदेशों में इस कदर सराहा जा रहा है। वैसे लिपस्टिक अंडर माई बुर्का के अलावा भी कई फिल्में हैं जो सेंसर बोर्ड के फेर में फंसी।

फिल्लौरी

फिल्लौरी

फिल्म में एक सीन है जहां फिल्म के हीरो सूरज शर्मा, अनुष्का शर्मा के भूत को देखकर डर जाते हैं। और डर के मारे वो बाथटब में हनुमान चालीसा पढ़ने लगते हैं। लेकिन सेंसर बोर्ड का मानना है कि आप नहाते वक्त हनुमान चालीसा नहीं पढ़ सकते, इसलिए पूरे हनुमान चालीसा वाले सीन को कट करने की मांग की गई है।

जॉली एलएलबी 2

जॉली एलएलबी 2

पूरी की पूरी फिल्म लखनऊ में बनी है लेकिन फिल्म में लखनऊ के ज़िक्र से सेंसर बोर्ड को दिक्कत थी। इसलिए फिल्म में ऐसे कई शब्द बदले गए हैं। होली के गाने में लखनऊ शब्द हटाने की मांग की गई है। वहीं लखनऊ कचहरी में कोई चीज़ टाइम पर हुई है - इस डायलॉग में लखनऊ को लोकल से बदला गया है। ये दिल्ली नहीं लखनऊ है - इस डायलॉग में लखनऊ को अवध से बदला गया है।

उड़ता पंजाब

उड़ता पंजाब

उड़ता पंजाब ड्रग्स पर बनी एक फिल्म है कि कैसे पंजाब में इस कारोबार ने युवाओं की ज़िंदगी बर्बाद कर दी है। लेकिन सेंसर बोर्ड चाहता है कि फिल्म दिखाई जाए...बिना ड्रग्स के...किसी को कुछ समझ आया?

40 कट

40 कट

फिल्म में शाहिद कपूर एक ड्रग एडिक्ट रॉकस्टार का किरदार निभा रहे हैं। और ड्रग डोज़ के बाद नशे में उनकी गालियों से लेकर ड्रग्स के कश खींचने तक की मदहोशी...कुछ भी सेंसर बोर्ड को रास नहीं आ रही। और इसीलिए फिल्म में 40 कट मांगे गए हैं।

रमन राघव 2.0

रमन राघव 2.0

इस फिल्म को लेकर सेंसर बोर्ड ने 6 कट की डिमांड की है। इसमें काफी हिंसा है। जबकि फिल्म में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का किरदार ही एक बेरहम हत्यारे का है।

गैंग्स ऑफ वसेपुर

गैंग्स ऑफ वसेपुर

अनुराग कश्यप की गैंग्स ऑफ वसेपुर तो काफी समय तक सेंसर बोर्ड पर अटकी रही। फिल्म की भाषा से लेकर कंटेंट तक सब कुछ बोर्ड को नापसंद था। खासतौर से तेरी कह के लूंगा!

कुछ सच नहीं

कुछ सच नहीं

वहीं बोर्ड का कहना था कि अनुराग कश्यप फिल्म के शुरू में ही सूचना डालें कि सभी पात्र काल्पनिक हैं। जबकि अनुराग का मानना था कि वो ऐसा क्यों करें जबकि उनकी पूरी टीम ने एक एक कैरेक्टर पर पूरी रिसर्च की है और सब असली है।

ब्लैक फ्राइडे

ब्लैक फ्राइडे

फिल्म इतनी ज़्यादा साफ और मुंहफट थी कि सबके होश ही उड़ गए। 1993 बंबई बम ब्लास्ट पर बनी इस फिल्म ने सब कुछ खोलकर रख दिया था। आज तक फिल्म बैन है और आधिकारिक रूप से रिलीज़ नहीं हुई हालांकि देखी सबने है।

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    English summary
    Lipstick under my Burka is now eligible for golden globe awards but banned by censor board.

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