लता मंगेशकर ओवररेटेड हैं, दूसरों का करियर बर्बाद करती थीं - ट्विटर पर ट्रेंड हो रहे नफरत भरे ट्वीट्स
ट्विटर पर इस समय लता मंगेशकर, ट्रेंड हो रही हैं और इसका कारण बेहद अजीब है। दरअसल, एक ट्विटर यूज़र कावेरी ने लिखा कि लता मंगेशकर उन्हें ओवर रेटेड लगती हैं और बस फिर क्या था इसके बाद ट्विटर पर ऐसी बहस छिड़ी, जिसका किसी को अंदाज़ा भी नहीं रहा होगा।
कावेरी ने ट्वीट करते हुए लिखा - भारतीयों को ये मानने पर मजबूर कर दिया गया है कि लता मंगेशकर की आवाज़ अच्छी है। इतना ही नहीं, उनकी आवाज़ बिगड़ी हुई और बहुत ज़्यादा इस्तेमाल की हुई (overused) है।

कावेरी ने अपनी बात के समर्थन में लिखा - लता मंगेशकर ने अपनी आवाज़ की उम्र से ज़्यादा गाने गाए हैं। और संगीत से जुड़े जो लोग उनकी तारीफ करते नहीं थकते, वो इसलिए क्योंकि लता मंगेशकर पावरफुल थीं और इसलिए कोई उनसे पंगा लेना नहीं चाहता था। लता मंगेशकर लोगों को तबाह करने का दम रखती थीं।
ये बहस यहीं पर नहीं खत्म हुई, ये बहस आगे बढ़ी और लता मंगेशकर के खिलाफ बोलने वाले भी उतनी ही बड़ी संख्या में खुलकर सामने आए, जितना कि उनका साथ देने वाले।
कावेरी की बात का जवाब देते हुए फिल्ममेकर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने ट्वीट किया - जिन्हें भी लगता है कि लता मंगेशकर की आवाज़ अलौकिक है, वो कृपया हाथ उठाएं। उन्होंने आगे लिखा - एक कारण जिसकी वजह से मैं सरस्वती और दिव्य चीज़ों पर भरोसा करता हूं, वो लता मंगेशकर हैं। और एक कारण जिसकी वजह से मैं दुष्टों पर भरोसा करता हूं वो लता मंगेशकर से नफरत करने वाले लोग हैं।
मैं प्रार्थना करता हूं कि अगले जन्म में लता मंगेशकर से नफरत करने वाले इन लोगों को हम जैसे लोगों का जन्म मिले जिसे वो खूबसूरती की पहचान कर सकें और समझ सकें कि दिव्य और अलौकिक चीज़ें कैसी होती हैं।
बस इसके बाद ट्विटर पर लता मंगेशकर को भगवान मानने वाले और उनके संगीत को ज़हर मानने वालों के बीच एक अजीब सी बहस छिड़ी और लोगों ने काफी कुछ कहा।

ध्वनि भानुषाली सुनने वाले लोग!
इस यूज़र का मानना है कि जितने भी लोग लता मंगेशकर की बुराई कर रहे हैं वो दरअसल, टोनी कक्कड़ और ध्वनि भानुशाली जैसे सिंगर्स के फैन हैं जिन्हें ऑटो ट्यून की हुई आवाज़ें बेहद पसंद हैं।

कभी ध्यान से सुना है?
वहीं एक और यूज़र ने पूछा - ये जितने भी लोग लता मंगेशकर को ओवररेटेड कह रहे हैं, क्या उन्होंने कभी भी रंग दे बसंती का गाना लुका छिपी सुना है?

मेरी आवाज़ ही पहचान है
वहीं कुछ लोगों ने केवल तथ्यों की बात करते हुए पूछा - दुनिया का ऐसा कौन सा घर है जिसने कभी लता मंगेशकर का गाना नहीं सुना होगा? इस यूज़र ने लता मंगेशकर के गाने - मेरी आवाज़ ही पहचान है, गर याद रहे का भी ज़िक्र किया।

दिव्य आवाज़ हैं लता
ट्रेड एक्सपर्ट रमेश श्रीवत्स ने ट्वीट करते हुए लिखा - लता मंगेशकर के खिलाफ ज़हर उगलना बंद करिए। अगर आज तक कोई भी इंसान की आवाज़ इतनी परफेक्ट रही है कि उसे किसी संगीत वाद्य की जगह इस्तेमाल किया जा सके तो वो लता मंगेशकर की आवाज़ है। वो इतनी परफेक्ट हैं कि एक वाद्य यंत्र हैं, भावनाओं के साथ।

असली उमराव जान
इस बहस को शुरू करने वाली यूज़र कावेरी का भी मानना है कि पाकीज़ा फिल्म तक लता मंगेशकर ठीक गाती थीं। लेकिन वो शुक्रगुज़ार हैं कि लता मंगेशकर ने उमराव जान के गाने गाकर उस फिल्म को खराब नहीं किया। गौरतलब है कि उमराव जान के सारे गाने, आशा भोंसले ने गाए थे।

संगीत जानने वालों का अपमान
लता मंगेशकर के एक और फैन ने कावेरी की बात से असहमति जताते हुए लिखा - अगर लता मंगेशकर इतनी खराब सिंगर होतीं तो उनके गाए हुए गाने लोग भूल चुके होते। इतने पुराने गाने अगर खराब हैं तो किसी को क्यों याद रहेंगे। लेकिन आज भी इन गानों को बार बार रीमिक्स किया जाता है। रिकी का मानना था कि हर किसी की अपनी पसंद होती है और लता जी की आवाज़ नापसंद होना किसी की अपनी निजी पसंद हो सकती है। लेकिन ये कहना कि इस पूरे देश को brainwash किया गया है कि लता जी की आवाज़ पसंद करे, उनके फैन्स और संगीत प्रेमियों की बेइज़्जती है।

वो जीनियस हैं
गुलशन देवैया ने भी ट्वीट करते हुए लिखा - जिस काबिलियत के साथ लता जी एक एक सुर इतनी आसानी से लगाती हैं वो अतुल्य है। तकनीकी जीनियस।

expiry date से आगे भी गाती रहीं
एक और यूज़र ने कावेरी का साथ देते हुए लिखा - मुझे लगता था कि केवल मैं ही इकलौती हूं जिसे लता मंगेशकर की आवाज़ नहीं पसंद है। उनकी सिंगिंग बेहद एवरेज है। और सच में उनकी आवाज़ की expiry date आने के बाद भी वो गाती रहीं। आशा भोंसले उनसे लाख गुना अच्छी थीं लेकिन आशा भोंसले को कभी वो पहचान नहीं मिली।

करियर खत्म कर देती थीं लता
इसके बाद लोगों ने वो किस्से सुनाने शुरू किए जहां लता मंगेशकर के बारे में कहा जाता था कि उन्होंने लोगों के करियर खत्म कर दिए। किसी ने लिखा कि लता मंगेशकर ने सुमन कल्याणपुर को इंडस्ट्री से बैन करवा दिया था और सुमन कल्याणपुर के गानों की सीडी समुद्र में फेंकवा दी थी। वहीं किसी ने लिखा कि उन्होंने साधना सरगम के साथ भी काफी पॉलिटिक्स खेली। उन्होंने ऐसा ही कुछ अपनी बहन उषा मंगेशकर के साथ भी किया था। लता मंगेशकर धमकी देती थीं कि लोगों के लिए गाने नहीं गाएंगी।

बेहद अजीब सी बहस
एक और यूज़र ने सारी बातों से सहमति जताते हुए इंडस्ट्री के कुछ और उदाहरण दिए और लिखा - इसके बाद आप कहेंगे कि शाहरूख खान हमेशा ओवरएक्टिंग करते हैं, सचिन तेंदुलकर को ज़रूरत से ज़्यादा महत्त्व दिया जाता है और अमिताभ बच्चन को रिटायर हो जाना चाहिए, अब उन्हें झेला नहीं जा पाता है। मैं इनमें से किसी भी बात के लिए अहसहमत नहीं हूं।


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