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निर्मल पांडे की आखिरी फिल्म 'किकबॉक्सिंग'

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Lahore
फ़िल्म लाहौर किकबॉक्सर वीरेंद्र सिंह की कहानी है, जो पड़ोसी मुल्क के खिलाड़ी को किकबॉक्सिंग के खेल में हराना चाहते हैं. उनके दिल में बरसों पहले उनके साथ हुई एक नाइंसाफ़ी का बदला चुकाने की तमन्ना है. वीरेंद्र सिंह अपने देश और देशवासियों की ख़ातिर किकबॉक्सिंग का ये मैच जीतना चाहते हैं और इसके लिए कुछ भी कर गुज़रने को तैयार हैं.

इस फ़िल्म में वीरेंद्र सिंह के कोच की भूमिका निभा चुके अभिनेता फ़ारूक़ शेख़ कहते हैं, "इंसानी ज़ज़्बात खेल के ज़रिए सियासत से ऊपर उठ सकते हैं और फ़िल्म 'लाहौर' में हमने यही दिखाने की कोशिश की है." फ़ारूक़ कहते हैं, "एक कहावत है कि कोई भी युद्ध अच्छा नहीं हो सकता और किसी भी तरह की शांति बुरी नहीं हो सकती. हमारी फ़िल्म भी इसी संदेश के इर्द-गिर्द घूमती है".

फ़िल्म में वीरेंद्र सिंह का किरदार निभाया है नये अभिनेता अनहद ने. उन्होंने इस फ़िल्म के लिए किकबॉक्सिंग की ट्रेनिंग भी ली. अनहद कहते हैं, "मैंने इसके लिए चीन में भी ट्रेनिंग ली. मैं एक शाकाहारी हूं लेकिन वहां जाकर मुझे मेरे चीनी कोच ने कहा कि तुम्हें थोड़ा मांस तो खाना ही पड़ेगा ताकि ट्रेनिंग ठीक तरह से कर सको. वैसे भी चावल और आलू कोई कितने दिन खा सकता है." अनहद कहते हैं, "इसके लिए मुझे काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी. रोज़ सुबह छह बजे उठकर ही वर्ज़िश शुरु हो जाती थी. इस दौरान मुझे काफ़ी चोटें भी आईं," अनहाद कहते हैं.

इस फ़िल्म में अनहाद की मां की भूमिका नफ़ीसा अली ने निभाई है. नफ़ीसा अली कहती हैं, "मुझे जब फ़िल्म के निर्देशक संजय चौहान ने कहानी सुनाई तो मुझे लगा ये नए ज़रूर हैं लेकिन ये एक अच्छी कोशिश है. इसमें इंसानी रिश्तों और इंसानियत की बात की गई है."

फ़िल्म की शूटिंग दिल्ली, हैदराबाद, मुंबई, लोनावला, मलेशिया और लाहौर में हुई है लेकिन फ़िल्म का नाम लाहौर इसलिए रखा गया क्योंकि इसका अंत यानि क्लाइमैक्स वहां फ़िल्माया गया. इस फ़िल्म को अंतरर्राष्ट्रीय फ़िल्म समारोहों में काफ़ी सराहने मिली है और इसने कई पुरस्कार भी जीते हैं. ख़ास बात ये भी है कि इस फ़िल्म में आप दिवंगत अभिनेता निर्मल पांडे को भी देख पायेंगे. ये उनकी आख़िरी फ़िल्म है.

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