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'सीरियस फ़िल्में ज़्यादा नहीं बिकतीं'

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'सीरियस फ़िल्में ज़्यादा नहीं बिकतीं'
अभिनेत्री कोंकणा सेनशर्मा मानती हैं कि गंभीर फ़िल्में ज़्यादा बिकती नहीं हैं.

कोंकणा कहती हैं, “मैं और ज़्यादा सीरियस सिनेमा और दमदार रोल करना चाहती हूं. लेकिन आजकल बहुत कम लोग ऐसी फ़िल्में कम लिख रहे हैं क्योंकि अक्सर ऐसी फ़िल्में बिकती नहीं हैं." कोंकणा सेनशर्मा से बीबीसी की साइमा इक़बाल ने बातचीत की.

कोंकणा ने 'मिस्टर एंड मिसिज़ अय्यर," 'पेज थ्री", 'लाइफ़ इन ए मेट्रो", 'अमू" जैसी सीरियस फ़िल्में की हैं तो वहीं 'मिक्सड डबल्स", 'दिल कबड्डी" और 'अतिथि तुम कब जाओगे" जैसी कॉमेडी फ़िल्मों में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है.

लेकिन उनकी छवि एक संजीदा अभिनेत्री की है. इस बारे में कोंकणा कहती हैं, “मुझे इस बात से फ़र्क नहीं पड़ता कि लोग मुझे किस तरह की हीरोइन के रुप में देखते हैं. मैं ख़ुद को टाइपकास्ट नहीं करती और हर तरह के रोल करती हूं जैसा कि मेरे काम से ज़ाहिर है."

कोंकणा कहती हैं, “स्क्रिप्ट्स चुनते समय मैं ये नहीं सोचती कि कॉमेडी है तो मुझे नहीं करनी या फिर ड्रामा है तभी मैं करुंगी. मैं सिर्फ़ अच्छी कहानी देखती हूं, बाकी तो महज़ इत्तेफ़ाक है."

कोंकणा की मां अपर्णा सेन एक जानी-मानी फ़िल्ममेकर हैं. इससे पहले कोंकणा ने उनके निर्देशन में 'मिस्टर एंड मिसिज़ अय्यर" और '15 पार्क एवेन्यू" में काम किया है. और उनकी इस साल रिलीज़ होने वाली फ़िल्मों में से एक—'इति मृणालिनी"—का निर्देशन भी अपर्णा सेन ने ही किया है.

अपनी मां के निर्देशन में काम करना कोंकणा को अच्छा लगता है. वो कहती हैं, “किसी भी निर्देशक के साथ काम करते वक्त आप उस पर पूरी तरह विश्वास करना चाहते हैं जो हर बार संभव नहीं होता. लेकिन मुझे पता है कि मैं उनपर (अपर्णा सेन) पर पूरी तरह भरोसा कर सकती हूं."

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