नहीं हो सकती नुक़सान की भरपाई

इससे जहाँ सिनेप्रेमी दो महीने बाद नई फ़िल्म से मनोरंजन कर सकेंगे वहीं निर्माताओं की जेब में पहले के मुक़ाबले अधिक पैसा जाएगा.
शुक्रवार को तड़के फ़िल्म निर्माताओं और मल्टीप्लेक्स मालिकों के बीच हुए समझौते के अनुसार पहले हफ़्ते में प्रोडियूसरों को टिकट बिक्री से होने वाली आमदनी में से 50 प्रतिशत, दूसरे हफ़्ते में 45 प्रतिशत, तीसरे हफ़्ते में 35 और चौथे हफ़्ते में 30 प्रतिशत का हिस्सा मिलेगा.
ये व्यवस्था सभी छोटी-बड़ी सभी फ़िल्मों के लिए लागू होगी.
इस समझौते का यह मतलब हुआ कि निर्माताओं और फ़िल्म वितरकों को पहले के मुक़ाबले दो से पाँच प्रतिशत अधिक पैसा मिलेगा.
भरपाई नहीं
सबसे अहम पहलू यह है कि फ़िल्म निर्माताओं और मल्टीस्क्रीन सिनेमाघर मालिकों के बीच पैसे के बँटवारे को लेकर ठन जाने से दो महीने चले हड़ताल से फ़िल्म इंडस्ट्री को जो नुक़सान हुआ है उसकी भरपाई नहीं हो सकती है.
एक अनुमान के अनुसार इस हड़ताल के दौरान फ़िल्म उद्योग को 85 से 90 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ा है.
क्योंकि नई फ़िल्में रिलीज़ नहीं हो रही थीं और जो छोटी-छोटी फ़िल्में रिलीज़ हो रही थीं वो भी मल्टीप्लेक्स में नहीं दिखाई जा रहीं थीं.
हालाँकि हड़ताल से पहले दोनों पक्षों को इस बारे में सोचना चाहिए था, लेकिन ये मामला इतना तूल पकड़ गया कि निर्माताओं ने इसे मर मिटने का सवाल बना लिया.
इस समझौते में हार और जीत जैसी कोई चीज़ नहीं है, जहाँ तक फ़ायदे का सवाल था तो इसमें माँग निर्माताओं की थी और उनकी कुछ शर्तें मानी गई. ऐसे में उनका ही कुछ फ़ायदा होगा.


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