एक खास उम्र के लोगों के लिए है जिस्म 2
शुक्रवार 3 अगस्त को इंडो-कैनेडियन एडल्ट फिल्म एक्ट्रेस सन्नी लियोन की फिल्म 'जिस्म 2' रिलीज हुई। जैसा कि फिल्म के रिलीज से पहले ही फिल्म के पोस्टरों और ट्रेलर ने सोशल नेटवर्किंग साईट्स से लेकर टेलीविजन तक पर अपना आधिपत्तय जमा लिया था उसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए बॉक्स ऑफिस पर भी सन्नी लियोन ने अपना आधिपत्य जमा लिया है।
'जिस्म 2' को पहले ही दिन से मिलेजुले रिव्यूज मिल रहे हैं। क्रिटिक्स ने तो पूरी तरह से सन्नी की इस फिल्म को नकार दिया है। लेकिन दर्शकों को इन रिव्यूज से कोई मतलब नहीं क्योंकि एक बार ही सही पर जिस फिल्म को लेकर इतने समय से इतनी सारे विवाद और चर्चाएं चल रही हों उसे देखने हर कोई सिनेमाहॉल तक तो जरुर जा रहा है। फिल्म में सन्नी के सेक्सी सीन्स के अलावा उनकी एक्टिंग को लेकर गंभीरता भी नजर आई है। अपने संवादों को लेकर उनका जुझारुपन और अपने को-स्टार्स रणदीप हुड्डा और अरुणोदय सिंह के साथ इंटिमेट सीन्स करते समय उनका उस दृष्य को फील करना फिल्म के कुछ ऐसे भाग हैं जिन्हें देखकर आप भी शायद दो पल के लिए खुद को फिल्म के किरदारों के आस पास पाएंगे।
सन्नी ने फिल्म में जान डालने की पूरी कोशिश की है और इसलिए उन्होने अपनी हिन्दी को भी काफी सुधारा है। अपने डायलॉग बोलते समय उन शब्दों को महसूस करने की भी पूरी कोशिश की है। सन्नी के साथ रणदीप हु्ड्डा ने का अभिनय काबिले तारीफ है। कबीर के किरदार में रणदीप ने कई जगह बाकी किरदारों से खुद को कहीं आगे लाकर खड़ा कर दिया है। सन्नी के साथ फिल्माए गए करीबी सीन्स में रणदीप काफी पैशिनेट और बेहतर नज़र आए। उनका सन्नी की तरफ देखना और उनकी आंखों में वो प्यार और सन्नी के करीब जाने कि प्यास कई बार दर्शकों को अचंभे में डाल देती है।
प्यार और धोखा इन दो शब्दों को मतलब और इन दो शब्दों में जिंदगी की खोज यही इस पूरी फिल्म का बेस है। फिल्म में भले ही एक एडल्ट फिल्म की स्टार को कास्ट किया गया हो लेकिन उसे भी एक आम इंसान और उस इंसान के अंदर की सच्ची भावनाओं का होना बहुत ही खूबसूरत तरीके से दिखाया गया है। इस फिल्म के बाद लोगों के दिल से शायद से भावना निकल जाए कि एक एडल्ट फिल्म स्टार भी एक आम लड़की होती है और वो भी प्यार और रिश्तों की समझ रखती है।
सिर्फ एक एलस्ट लव स्टोरी का टैग मिल जाने से फिल्म का मतलब ही लोगों की नज़रों में बदल गया है। ये जरुर है कि इस फिल्म को देखने शायद ही कोई अपने परिवार या बच्चों के साथ जाए लेकिन इससे ये अंदाजा बिल्कुल ना लगा लिजियेगा कि फिल्म में अतरंग दृष्यों के अलावा कुछ है ही नहीं दरअसल फिल्म में उन रिश्तों और उन एहसासों को दिखाया गया है जिन्हें सिर्फ एक उम्र के बाद ही कोई समझ और महसूस कर सकता है।


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