इमोशनल अत्याचार या सेक्स अत्याचार?
टेलीविजन चैनल बिंदास पर कार्यकम 'इनोशनल अत्याचार' युवा वर्ग की पहली पसंद बनता जा रहा है। क्या यह कार्यक्रम सच में किसी पर हुए इमोशनल अत्याचार को दिखाता है, लेकिन सही मायने में इसमें इमोशंस से ज्यादा सेक्स की बाते होती हैं। हर एपिसोड में एक लड़का और लड़की केवल किस करते या सेक्स की बातें ही करते नजर आते हैं। भावानाएँ तो कही भी नजर नहीं आती हैं?
इसमें दिखाया जाता है कि एक-दो मुलाकातों में ही लड़का-लड़की सेक्स की बात करने लगते हैं। अब आप बताएं क्या आज के युवा इतने बेवकूफ हैं, कि एक दो बार मिली किसी भी लड़की या लड़के से सेक्स के बारे में बातें करने लगें और या फिर कोई भी लड़का किसी भी लड़की से चार-पांच तमाचे खाने के बाद भी हँसता रहे। क्या सच में ऐसा होता है?
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इस सीरियल के हर एपिसोड में शुरुआत सीसी टीवी कैमरे से होती है और फिर चार-चार कैमरामैन लड़की-लड़के के इर्दगिर्द खड़े हो जाते हैं। वो भी माइक वगैरह लेकर। एक लड़का, एक लड़की एक दूसरे से कड़वाहट भरी बातों को लेकर लड़ रहे होते हैं और कैमरामैन उसे कवरेज करने में। हर एपिसोड में एक लड़की या लड़का अपने ब्वॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड से इसलिए लड़ने लगता है, क्योंकि उसने दूसरे के साथ फ्लर्ट शुरू कर दिया होता है।
यहां इमोशन के नाम पर सिर्फ सेक्स कि बातें होती हैं। कुल मिलाकर इसमें युवाओं की छवि को जबरन तोड़-मरोड़ कर पेश किया जाता है। कार्यक्रम के निर्माता का कहना है कि आज के युवा बहुत ही प्रैक्टिकल व पाजिटिव हैं उनको अपनी किसी भी भावना को दिखाने में किसी भी तरह की कोई शर्म नही आती। और उन्हें सच कहने में किसी भी प्रकार की कोई शर्म नही आती है?
''इमोशनल अत्याचार'' का सीजन टू आरम्भ हो चुका है और पहले ही एपिसोड के बाद इस चैनेल की लोकप्रियता और भी बढ़ गयी है। खैर आप क्या सोचते हैं इस 'इमोशनल/सेक्स अत्याचार' के बारे में। अपनी राय नीचे दिए हुए कमेंट बॉक्स में लिखें।


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