दादासाहब फाल्के पुरस्कार पाने वाले देश के 45वें व्यक्ति गुलजार
भारत सरकार द्वारा यह पुरस्कार भारतीय सिनेमा की प्रगति और विकास में योगदान के लिए दिया जाता है।
पाकिस्तान में जन्में गुलजार का पूरा नाम संपूरन सिंह कालरा है
आपको बता दें कि सम्पूरन सिंह कालरा उस शख्स का नाम है जिनका जन्म 18 अगस्त 1936 को दीना नाम की उस जगह में हुआ जो कि आजकल पाकिस्तान में है। कौन जानता था कि ये शख्स गुलज़ार नाम से सबके दिलों में अपना घर बना लेगा।
राखी के लिए गुलजार का ..दिल आज भी बच्चा ही है...
आज गुलज़ार साहब 77 साल के हैं लेकिन आज भी इनके ज़ुबान से दिल तो बच्चा है जी.... निकलता है। कभी ये बीड़ी से जिगर को जलाते हैं तो कभी ... इश्क को कमीना बताते हैं.. कभी कहते हैं कि इश्क तो जीना मुश्किल कर देता है। आखिर कौन हैं ये गुलज़ार इनके कितने रूप हैं। कभी ये शायर हैं तो कभी निर्देशक तो कभी बच्चों के साथ बच्चे बन कर तारों की बातें करते हैं तो कभी ज़िंदगी के फलसफे को समझाते हैं।
मालूम हो कि गुलज़ार ने अभी तक 20 से अधिक फिल्मफेयर,कई राष्ट्रीय पुरुस्कार के और अंतर्राष्ट्रीय ग्रैमी अवार्ड अपने नाम कर चुकें हैं। साहित्य में बेहतरीन योगदान के चलते उन्हें पद्मभूषण और साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। सिने जगत की इस अनुपम हस्ती को वनइंडिया परिवार भी उनके इस नायाब कामयाबी पर ढेर सारी बधाई देता है।


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