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    'कोरोना के बाद अब ऑडियंस थिएटरों में कुछ नया देखने, कोई नया अनुभव लेने आएगी!’ – धूम 3 के निर्देशक

    By Filmibeat Desk
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    विजय कृष्ण (विक्टर) आचार्य के लिए लॉकडाउन बतौर एक फिल्म-मेकर कुछ चिंतन करने का वक्त था, इसीलिए उन्होंने लिखने और अपने आगामी प्रोजेक्ट को तराशने में ढेर सारा समय बिताया। हालांकि अपने पूर्वानुमानित प्रोजेक्ट के बारे में विक्टर ज्यादा मुंह नहीं खोल रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि महामारी ने उनको ऐसी फिल्मों के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया है, जिन्हें वह भविष्य में बनाना चाहेंगे।

    "लॉकडाउन के दौरान मैंने अपनी आगामी फिल्म की स्क्रिप्ट लिख डाली है। तो, एक प्रकार से मैंने चिंतन किया है, सिर्फ अपनी लिखी इस फिल्म स्क्रिप्ट के बारे में ही नहीं, बल्कि उन तमाम तरह की फिल्मों के बारे में भी सोच-विचार किया है, जिनको मैं भविष्य में बनाना चाहूंगा। जहां तक फिल्मों के संसार की बात है, मैं ठीक ऐसी ही फिल्में करना चाहूंगा। इसलिए हां, लॉकडाउन मेरे लिए चिंतन का दौर साबित हुआ है और मेरे सामने ढेर सारी चीजें साफ हो चुकी हैं। यह रचनात्मक प्रयासों तथा अपने मौजूद होने की इच्छित जगह, दोनों के संदर्भ में घटित हुआ है।"- कहना है विक्टर का, जिन्होंने अपने बर्थडे पर हमसे एक शीघ्र बातचीत करने की इनायत बख्शी।

    विक्टर कहते हैं कि भविष्य में आने वाले उनके प्रोजेक्ट उनकी अनुभूति को गहराई से प्रतिबिम्बित करेंगे। वह बताते हैं, "मुझे लगता है कि मुझे अपने काम को ही बोलने देना चाहिए और इस काम के माध्यम से ही शायद मैं यह संकेत दे सकता हूं, या सुझा सकता हूं कि मुझे इस वक्त किन खयालों या चीजों ने गिरफ्तार कर रखा है। मैं आशा करता हूं कि रचनात्मकता और रचनात्मक प्रयासों को रचनात्मक दृष्टि से ही देखा-परखा जाएगा। संभवतः इस पूरे साल के दौरान मेरा यही विचार प्रमुखता में रहेगा। हम हर चीज को जांचते-परखते हैं और ज्यादातर चीजों को एकदम बाहरी सांसारिक आंकड़ों की नजर से देखते हैं। जब हम आज की फिल्मों की बात करते हैं, तो हम या तो बॉक्स-ऑफिस की चर्चा करते हैं या फिर फिल्मोत्सवों के बारे में सोचते हैं, लेकिन सत्य यह है कि ऑडियंस के लिए आखिरकार हर फिल्म एक अलग अनुभव साबित होती है। तो, अलग किस्म की बन रही फिल्मों के बूते शायद हम नए किस्म की ऑडियंस खोज सकते हैं।"

    वैक्सीन के आ जाने से दुनिया कोरोना वायरस पर अपना शिकंजा कसने में कामयाब हो रही है, ऐसे में फिल्म इंडस्ट्री जोरदार कमबैक करने को तैयार है। विक्टर कहते हैं, "थोड़े में कहूं तो यह किसी दुःस्वप्न जैसा था! वैक्सीन का वितरण शुरू होने और कोविड के मामले घटने से लोगों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। लोग घरों से बाहर निकलना चाहेंगे। केवल फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं, बल्कि मुझे लगता है कि चीजें, सभी बुनियादी बातें, धीरे-धीरे पटरी पर लौट आएंगी। मेरा मानना है कि समूचा सामुदायिक अहसास लौट आएगा, बड़े परदे पर फिल्म देखने का पूरा अनुभव अपनी वापसी करेगा। लोगों द्वारा अपने लिए समय निकालना, खासकर जब हर व्यक्ति इतने लंबे अरसे से घरों में कैद रहा हो, फिल्म इंडस्ट्री के लिए बड़ा सुखद एवं शुभ संकेत होगा।"

    अपनी बात समाप्त करते हुए इस फिल्म-मेकर ने कहा, "आप यकीनन यह उम्मीद लगा सकते हैं कि अच्छी फिल्में दर्शकों को थिएटरों तक पुनः खींच लाएंगी। अगर एक दर्शक के तौर पर मैं अपनी बात करूं तो फिल्म की ऐसी कोई तयशुदा किस्म नहीं होती है, जिसे ही मैं थिएटर में देखना चाहता हूं। कई बार आप कोई बड़ा तमाशा देखना चाहते हैं, कई बार आप ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जो कोई अंतर्दृष्टि प्रदान करती हो और आशाएं जगाती हो और कभी आपकी इच्छा बिल्कुल दूसरे किस्म की कहानियां देखने की हो सकती है। कहानियां बेशुमार हैं। ओटीटी पर कुछ शानदार कंटेंट से रूबरू होने के बाद मुझे नहीं लगता कि मैं नई बोतल में पुरानी शराब का मजा लेना चाहूंगा। तो ऑडियंस थिएटरों में कुछ नया देखने, कोई नया अनुभव लेने ही आएगी।"

    English summary
    dhoom-3-director-vijay-krishna-acharya-on-his-birthday
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