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दीप्ति के लिए डायरेक्टर ने बदली भाषा

Posted By: Neha Nautiyal
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Deepti Naval
दीप्ति नवल ने बांग्ला में बनने जा रही एक फिल्म को हिंदी में बनवाकर इतिहास रच दिया है। बांग्ला निर्देशक संजॉय नाग की 'मेमोरीज इन मार्च' में जब दीप्ति को बांग्ला बोलने में परेशानी हुई तो फिल्म निर्माण दल के सभी सदस्यों ने इसे हिंदी में बनाने का निर्णय लिया।

'मेमोरीज इन मार्च' में दीप्ति ने एक ऐसी दुखी मां की भूमिका निभाई है जिसे उसके बेटे की मृत्यु के बाद पता चलता है कि उसका समलैंगिक प्रेमी था। निर्देशक से अभिनेता बने ऋतुपर्णो घोष ने दीप्ति के बेटे के प्रेमी की भूमिका निभाई है। यह फिल्म बांग्ला में बनाए जाने की योजना थी।

कोलकाता की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में निर्माण दल के सभी सदस्य इसे बांग्ला में बनाने में सहजता महूसस कर रहे थे लेकिन जब दीप्ति सेट्स पर पहुंची तो उनकी बांग्ला भाषा परेशानी की वजह बन गई।यहां तक कि इस फिल्म के पटकथा लेखक ऋतुपर्णो को भी यह परेशानी महसूस हुई। इसके बाद 'मेमोरीज इन मार्च' ऐसी पहली फिल्म बन गई जिसकी भाषा उसकी मुख्य अभिनेत्री के लिए बदल दी गई।

दीप्ति कहती हैं, "बांग्ला भाषा जितना मैंने सोचा था उससे कहीं ज्यादा जटिल है। मैंने सोचा कि यदि मैं संवादों पर ध्यान दूंगी तो मेरा अभिनय प्रभावित होगा। तब संजॉय और ऋतुपर्णो ने हिंदी में फिल्म बनाने का सुझाव रखा।"

उन्होंने बताया, "ऋतुपर्णो ने कहा कि आप बांग्ला में बोलें उससे अच्छा है कि हम हिंदी में बोलें। वैसे इस फिल्म को हिंदी में अच्छे-खासे दर्शक मिले। यह ऐसी फिल्म है जिसे ज्यादा से ज्यादा दर्शकों ने देखा।"दीप्ति के खुद के निर्देशन में बनी पहली फिल्म 'दो पैसे की धूप चार आने की बारिश' में भी समलैंगिकता को प्रमुखता से उठाया और उनकी इस फिल्म में भी इस विषय पर बात की गई है।

दीप्ति कहती हैं कि ऐसा नहीं है कि उन्होंने जानबूझकर समलैंगिकों पर आधारित फिल्म का निर्देशन किया और फिर ऐसी ही फिल्म में अभिनय किया। वह कहती हैं कि उनके लिए समलैंगिकों की लैंगिकता मुद्दा नहीं है बल्कि समाज में उनकी अस्वीकृति मुद्दा है।

English summary
Deepti Naval managed to turn a Bengali film into Hindi because she could not speak Bengali very well.
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