के बालचंदर को दादासाहेब फालके पुरस्‍कार

By Ajay Mohan

K Balachander
तमिल फिल्‍म में निर्देशन के क्षेत्र में नये परिवर्तन लाने वाले के बालाचंदर को वर्ष 2010 के लिए दादासाहेब फाल्‍के पुरस्‍कार के लिए चुना गया है। यह पुरस्‍कार भारतीय सिनेमा में उत्‍कृष्‍ट योगदान के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा दिया जाता है।

81 वर्षीय बालाचंदर फिल्‍म जगत में आने से पहले अकाउंटेंट जनरल के कार्यालय में नौकरी करते थे। उस दौरान उन्‍हें लिखने का शौक था। अचानक उन्‍होंने नौकरी छोड़ फिल्‍म संवाद लिखना शुरू कर दिया और वहीं से उनका तमिल फिल्‍म जगत में सफर शुरू हो गया।

एमजीआर की फिल्‍म धेविया थाई से उन्‍होंने संवाद लेखन शुरू किया। 1975 में उनकी तमिल फिल्‍म अपूर्व रागांगल ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये। वही फिल्‍म अथुलेनी कथा तेलुगू में बनीं। उन्‍होंने तमिल और तेलुगू सिनेमा में सुपरस्‍टार रजनीकांत की एंट्री करवायी।

रजनीकांत के अलावा कमल हसन, सुजाता, जया प्रदा और सरिता भी बालाचंदर की ही खोज हैं। बालाचंदर की फिल्‍म 'मारो चरित्रा' जो बाद में हिन्‍दी में बनी- 'एक दूजे के लिए' ने बॉलीवुड में भी धूम मचाई।

बालाचंदर को 1987 में पद्मश्री के खिताब से नवाजा जा चुका है। इसके अलावा तमिलनाडु सरकार ने 1973 में उन्‍हें 'कलाइमामानी' के खिताब दिया। उन्‍हें कई फिल्‍म फेयर अवार्ड भी मिल चुके हैं।

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