अमर चित्रकथा अब छोटे पर्दे पर
एसीके मीडिया अमर चित्रकथा की ऐतिसहासिक सफलता को दोहराना चाहता है। टर्नर इंटरनेशल की साझेदारी में कंपनी अमर चित्रकथा की कहानियों छोटे पर्दे पर लाने की तैयारी में है।
सन् 1967 मे स्थापित अमर चित्र कथा की कहानियां दशकों से भारतीय बच्चों को लुभाती रहीं। हालांकि बीते कुछ सालों मे शायद विदेशी प्रकाशनों के आगमन ने उसकी रफ्तार धीमी कर दी।
असुरों और देवों के बीच युद्ध, हनुमान और पांडवों के किस्से और ढेर सारे ऐतिहासिक और मिथकीय चरित्र। इन सभी को लेकर टर्नर और एसीके मीडिया कार्टून नेटवर्क और पोगो जैसे बच्चों के चैनल पर एनीमेटेड शो प्रस्तुत करने की तैयारी में हैं।
फिलहाल इस साझेदारी की शुरुआत दो फिल्मों और एक टीवी सीरियल के साथ हो रही है। यह सभी प्रोजेक्ट अगले साल सामने आएंगे। पहली फिल्म 'द थ्री सिटीज ऑफ माया' 2010 की गर्मियों रिलीज होगी। इसी साल दीपावली में 'सन्स आफ राम' को भी लाने की तैयारी है। अभी यह तय नहीं है कि ये फिल्मे सिनेमाघरों में रिलीज होंगी या नहीं। इन फिल्मों को कार्टून नेटवर्क के एनीमेशन एक्सपर्ट्स की देखरेख में आरंभ किया जाएगा।
2010 तक अमर चित्रकथा की पहली सिरीज पोगो पर आ जाएगी। कुल 26 एपिसोड तीस-तीस मिनट के होंगे।
टर्नर इंटरनेशल इंडिया, एंटरटेनमेंट नेटवर्क, साउथ एशिया की वाइस प्रेसिडेंट और डिप्टी जनरल मैनेजर मोनिका टाटा का कहना है कि आने वाले सालों में हमारा इरादा बहुत से भारतीय किरदारों को लेकर आने का है। स्थानीय कंटेट पर काम करने की रणनीति पर बहुत साल पहले ही विचार किया गया था, मगर सही मायनों में अब उस पर काम किया गया है।
मोनिका ने कहा, 'हमारा खुद का बचपन, हमारे माता-पिता और यहां तक कि हमारे दादा-नानी के जीवन का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं कहानियों को देख-सुनकर बड़ा हुआ है। अब इन कहानियों को टीवी स्क्रीन पर देखना अपने आप में दिलचस्प अनुभव होगा।' उन्होंने कहा कि भारतीय कंटेट को टीवी पर लाने के लिए शायद यह सबसे उपयुक्त वक्त होगा।
इस सबके लिए विचार-विमर्श तो एक साल पहले ही शुरु हो गया था। एसीके मीडिया के सीईओ समीर पाटिल का कहना है कि इन कहानियों का मूल तेवर और अंदाज बरकरार रखा जाएगा। दरअसल एसीके मीडिया की मूलभूत सोच ही यही थी कि इन कहानियों को टीवी और सिने माध्यमों मे लाया जाए। अमर चित्रकथा की मूल कथाओं से छेड़छाड़ किए बिना इन्हें उच्चस्तरीय टू-डी एनीमेशन में बदले जाने की तैयारी है। कहानी कहने की शैली को जस का तस रखा जाएगा।
हालांकि यह सवाल भी उठता है कि टॉम एंड जेरी, मिकी माउस और ढेरों जापानी एनीमेशन कैरेक्टर्स की भारत मे लोकप्रियता और दबदबे के बीच अमर चित्रकथा अपनी जगह कैसे बना पाएगा? क्या अंतर्राष्ट्रीय एनीमेडेट कैरेक्टर्स के बीच ये चरित्र लोकप्रिय हो पाएंगे?
इस बारे में मोनिका का कहना है कि फिलहाल कंपनी की कोशिश है कि एनीमेशन की क्वालिटी के साथ कोई समझौता न किया जाए मगर कंपनी का खास जोर कही जाने वाली कहानियों पर होगा। क्योंकि अंततः कहानियां ही बच्चों के बीच लोकप्रिय होती हैं। दूसरे शब्दों में कहे तो इन नए सीरियल्स की नायक ये कहानियां ही होंगी।
उनका मानना है कि भारतीय एनीमेशन में इस तकनीकी में भले अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर झंडे न गाड़े हों मगर इतना तो तय है कि इसने भारतीय बच्चों को अपील किया है। इसका सीधा सा सबूत यह है कि जब कभी भारतीय चरित्र पोगो और कार्टून नेटवर्क पर आते हैं तो उनकी रेटिंग खुद-ब-खुद ऊपर पहुंच जाती है।
समीर पाटिल ने कहा कि एसीके मीडिया का लक्ष्य अगले तीन सालों में भारतीय कहानियों और किरदारों का सबसे बड़ा कंटेंट प्रोड्यूसर बनना है।


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