पशु मनोरंजन के लिए नहीं होते, उन्हें भी प्यार चाहिएः हार्ड कौर

पिछले दिनों मुंबई में पेटा के लिए एक विज्ञापन करते हुए रैप गायिका हार्ड कौर ने कहा कि 'पशु पक्षी केवल हम मनुष्यों के मनोरंजन के लिए नहीं है बल्कि उन्हें भी इंसानों की तरह प्यार व सम्मान की जरुरत है।'

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सर्कस में पशु व पक्षीयों को शारीरिक पीड़ा दी जाती है उन्हें छड़ी व अन्य लोहे के उपकरणों से अक्सर दण्ड दिया जाता है इसके अलावा सर्कस में इंसानों के मनोरंजन के लिए साइकिल की सवारी, सिर के बल चलना, खड़े होना या आग के छल्ले के माध्यम से कूदना जैसे प्रदर्शन भी कराये जाते हैं और वो भी उन्हें सजा देकर डरा कर।

यहां तक ​​कि जब वो सर्कस में प्रदर्शन नहीं कर रहे होते तब भी जानवरों का जीवन दुखों से भरा हुआ होता है उन्हें खाना-पानी भरपूर नही मिलता और इसके अलावा सही तरीके से उनकी चिकित्सा व देखभाल भी नही होती। कुत्तों को गंदे पिंजरों में रखा जाता है और शायद ही कभी बाहर जाने दिया जाता है, पक्षीयों के पंख काट दिये जाते हैं ताकि वे उड़ नहीं सके उन्हें छोटे पिंजरों में ही रखा जाता है। घोड़ों को छोटी-छोटी रस्सियों से और हाथियों को तीन पैरों से बांध कर रखा जाता है।

सरकार ने पहले ही भालू, बंदर, बाघ, तेंदुआ और शेर के प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। पेटा अब भारत सरकार से भी यही चाहती है कि वो भी बोलीविया और ग्रीस की तरह सर्कस में जानवरों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाए।

पेटा के इस एड के लिए रैप गायिका हार्ड कौर काले फिश नेट के नाइलोन के मोज़े और लाल, नीले और सफ़ेद रंग की सेक्सी आउट फिट पहने हुए सैक्सी रिंगमास्टर बनी हुई थी और शीर्षक लिखा हुआ था 'आई चूज टू परफोर्म। एनिमल्स डोन्ट। बायकाट एनिमल्स सर्कस'।

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