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सुरों के सरताज 'किशोर दा' का जन्मदिन आज ...

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Kishor Kumar
सदाबहार गीतों के गायक किशोर कुमार भले ही आज हमारे बीच में ना हो लेकिन उनके नगमें आज भी लोग गुनगुनाते हैं। दौर बदला,कई गायक आये और गये लेकिन किशोर कुमार की जगह किसी ने नहीं ली। उनकी आवाज आज भी लोगों को मदहोश कर देती है। चाहें रोमांस हो, छेड़ खानी हो या फिर दर्द हर रंग में सजी उनकी आवाज आज भी लोगों के दिल को बेकरार कर जाती है।

आराधना फिल्म से किशोर कुमार ने सफलता के झंडे गाड़े

4 अगस्‍त 1929 को खंडवा के एक बंगाली परिवार में पैदा हुए किशोर कुमार की आज 81वीं सालगिरह है।उनका नाम अभास कुमार गांगुली रखा गया था। लेकिन घर में सबसे छोटे होने के कारण उन्‍हें प्‍यार से किशोर दा बुलाया जाता था। उनके पिता एक वकील थे और माता एक अच्‍छे परिवार से ताल्‍लुक रखती थी। उनके दो बड़े भाई (अशोक कुमार, अनुप कुमार) और एक बहन (सती देवी) थी। उनके बड़े भाई किशोर कुमार ने अभिनय की दुनियां में कदम रखा, बाद में किशोर ने उनका अनुसरण किया।

राजेश खन्ना की आवाज थे किशोर दा

प्रारंभ से ही किशोर का संगीत के प्रति लगाव था।वे के एल सहगल की काफी अच्‍छी नकल कर लेते थे। वे अपनी एक अलग गायन शैली विकसित करके प्रसिद्ध गायक बनना चाहते थे। मध्‍य प्रदेश के खंडवा में 18 साल तक रहने के बाद किशोर कुमार को उनके बड़े भाई अशोक कुमार मुंबई बुला लिया। उस समय अशोक कुमार फिल्मों का एक बड़ा नाम था। अपने चार भाई-बहनों में किशोर कुमार सबसे छोटे थे।

मुक्कमल कलाकार थे किशोर कुमार

जाहिर है सबके चहेते भी थे। और इसी चाहत ने उन्हें इतना हंसमुख बना दिया था कि हर हाल में मुस्कुराना उनके जीवन का अंदाज बन गया।अशोक कुमार चाहते थे कि किशोर कुमार अपने जिंदगी के सुहाने सफर की शुरुआत फिल्म अभिनेता के तौर पर करें। क्योंकि उन दिनों फिल्मों में अभिनय करने वालों को ज्यादा पैसे मिलते थे। लेकिन तकदीर को कुछ और ही मंजूर था। एक दिन एसडी वर्मन अशोक कुमार के घर आए हुए थे। अभी वे बैठे ही थे कि उन्हें अशोक कुमार के घर से सहगल की आवाज सुनाई दी।

आज भी उनकी आवाज दिलों पर दस्तक देती है

उन्होंने अशोक से पूछा तो जवाब मिला की छोटा भाई किशोर गा रहा है और वो भी बाथरूम में।वर्मन साहब ध्यान से सुनते रहे और किशोर के बाथरूम से बाहर आने का इंतजार करते रहे। जब किशोर बाहर निकले तो उन्होंने कहा बहुत अच्छा गाते हो। लेकिन किसी की नकल मत करो। वर्मन साहब की इसी बात ने किशोर कुमार को एक नया मोड़ दिया। कम ही लोग जानते हैं कि बाद में किशोर कुमार ने एसडी वर्मन के लिए 112 गाने गाए। और उनका ये सफर किशोर के आखिरी दिनों तक जारी रहा।

जीवन का हर रंग उनकी आवाज में दिखता है

1958 में किशोर कुमार को पहली बार फिल्मों में अभिनय करने का मौका मिला।फिल्म का नाम था चलती का नाम गाड़ी। ये फिल्म प्रदर्शित हुई तो थियेटर में लोग देखने के लिए तो अशोक कुमार को जाते थे, लेकिन लौटते वक्त उनकी जहन में किशोर कुमार छाए रहते थे। शुरुआती दौर में किशोर कुमार की पहचान एक हास्य अभिनेता के तौर पर बनी।

पड़ोसन जैसी फिल्में तो आज भी लोगों के जहन में ताजा है। 1964 में दूर गगन की छांव और 1971 में दूर का राही फिल्म के बाद किशोर दा के अभिनय की मिशाल दी जाने लगी। उधर,गायकी के क्षेत्र में भी उनका सिक्का जमता जा रहा था। हैरानी की बात तो ये थी किशोर कुमार एक ऐसे गायक थे जिन्होंने इसकी कोई तालीम भी नहीं ली थी। उस दौर में जब संगीतकार मोहम्मद रफी और मन्ना डे की आवाज को पंसद करते थे, आहिस्ता-आहिस्ता किशोर कुमार की आवाज का जादू सब पर छोने लगा।

किशोर के नगमे आज भी मदहोश करते हैं

दुर्भाग्‍य की बात है कि 13 अक्‍टूबर सन् 1987 में बड़े भाई अशोक कुमार के जन्‍मदिन पर किशोर कुमार को दिल का दौरा पड़ा और उन्‍होने अपनी अंतिम सांस ली। उनकी असमय मृत्‍यु ने प्रशंसको को दुख के सागर मे धकेल दिया। वे आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनका अमर संगीत आज भी हमारे बीच उन्‍हे जिंदा किए हुए है।

आपको किशोर कुमार का कौन सा गाना सबसे ज्यादा पसंद हैं,अपनी रूचि से हमें जरूर अवगत करायें। अपनी पसंद नीचे लिखे कमेंट बॉक्स में जरूर दर्ज करायें। और हमारे साथ किशोर दा को अपनी श्रद्धाजंलि पेश करें।

English summary
Kishore Kumar, born Abhas Kumar Ganguly 4 August 1929 – 13 October 1987) was an North Indian film playback singer and an actor who also worked as lyricist, composer, producer, director, screenwriter and scriptwriter.
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