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    अच्छे गीतों के लिए कवि होना जरूरी: गुलजार

    By Neha Nautiyal
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    यदि आप कविता और संगीत में रुचि रखते हैं तो आप इन दोनों विधाओं के अंतर के बारे में जानने के लिए अक्सर उत्सुक रहते होंगे। वरिष्ठ कवि और गीतकार गुलजार ने यहां इन दोनों विधाओं के अंतर को स्पष्ट किया।

    एक पुस्तक के विमोचन के मौके पर गुलजार ने कहा, 'अच्छे गीत लिखने के लिए आपको कवि होना चाहिए क्योंकि गीतों में मूल रूप से कविता होती है लेकिन दोनों के बीच महत्वपूर्ण अंतर यह है कि सभी कविताओं को गाया नहीं जा सकता जबकि गीत को गाए जाने योग्य होना पड़ता है।'

    <strong>गुलजार की गजल बनना चाहती हैं कैटरीना </strong>गुलजार की गजल बनना चाहती हैं कैटरीना

    'रात पशमीने की' और 'पुखराज' जैसे कविता संग्रह प्रकाशित करा चुके गुलजार ने कहा, 'गीतों में संगीत और धुनों के साथ मिश्रित होने के साथ ही एक गाने के रूप में उभरने की योग्यता होनी चाहिए। कविता के लिए ऐसी कोई बाध्यता नहीं है।'

    'मेरा कुछ सामान', 'यारा सिली सिली', 'दो दीवाने शहर में', 'तुझसे नाराज नहीं जिंदगी', 'छैंया छैं या', 'कजरा रे' और 'जय हो' जैसे गीत लिखकर पुरस्कार जीतने वाले गुलजार (74) ने कविता और गीतों के बारे में अंतर बताते हुए कहा, 'कविता आपका बयान है।'

    उन्होंने कहा, 'कवि जो कुछ अनुभव करता है कविता में उसकी अभिव्यक्ति करता है। जबकि फिल्मों के गीत कई तरह के मानदंडों, सीमाओं जैसे कहानी, स्थिति, चरित्र और चरित्रों की भाषा से बंधे होते हैं। कविता में इस तरह का बंधन नहीं होता।'

    English summary
    Veteran poet and lyricist Gulzar explained the difference at a book launch.
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