आज लोग एक्टिंग नहीं मॉडलिंग करते हैं फिल्मों में- सन्नी देओल!

ये ढाई किलो का हाथ किसी पर पड़ता है तो वो उठता नहीं उठ जाता है.. ये तो सालों पहले की बात हो गयी। लेकिन अब इस ढाई किलो के हाथ की सिर्फ एक उंगली ही इतनी भारी है कि लोग उठेंगे नहीं उठ जाएंगे। हम बात कर रहे हैं देओल फैमिली के जाने माने एक्टर सन्नी देओल की। शिल्पा शेट्टी के निर्माण में बन रही फिल्म ढिश्कियाउं में सन्नी देओल ने एक महत्वपूर्ण किरदार निभाया है। हालांकि फिल्म में उनके कुछ ज्यादा सीन्स नहीं हैं लेकिन जितने भी सीन हैं वो आपको एक बार फिर से घायल और घातक के सन्नी की याद दिला जाएंगे। वनइंडिया की रिपोर्टर सोनिका मिश्रा से बात करने के दौरान सन्नी ने अपनी फिल्म के साथ साथ अपने बेटे की एंट्री को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि अब उन्हें रोमांस करने का मौका तो मिलेगा नहीं तो वो किसी तरह का स्पेशल किरदार करने की इच्छा भी नहीं रखते हैं।

ढिश्कियाउं फिल्म साइन करने के पीछे क्या वजह थी। क्या खास था ढिश्कियाउँस में जो आप फिल्म का हिस्सा होने के लिए मान गये?

मुझे जब ढिश्कियाउं फिल्म की कहानी सुनाई गयी और खासतौर पर जब मुझे ये बताया गया कि मुझे हरियाणवी किरदार निभाना है हरियाणवी बोलनी है तो मुझे पहुत पसंद आया। मैंने तुरंत ही फिल्म के लिए हां कर दी। फिल्म में मैं एक गैंगस्टर का किरदार निभा रहा हूं जो कि हरियाणा से है। फिल्म करते समय भी सेट युवा कलाकारों के साथ काम करने में बहुत मजा आया। सेट पर भी हम काफी मजाक मस्ती करते थे और फिल्म की शूटिंग कब पूरी हो गयी पता ही नहीं चला।

अक्सर बॉलीवुड में हीरो को हमेशा पॉजिटिव किरदार में ही पसंद किया जाता रहा है। लेकिन आपने अक्सर अपने निगेटिव करदारों से बॉक्स ऑफिस पर अपनी छाप छोड़ी है। क्या कभी डर नहीं लगा निगेटिव किरादर करने के दौरान?

मैंने कभी अपने करियर के दौरान किसी भी नियम का पालन नहीं किया कि मैं हीरो हूं तो मुझे सिर्फ पॉजिटिव किरदार ही निभाने हैं। मैंने हमेशा ही अपनी फिल्मों में अपने किरदारो में कुछ नयापन लाने की कोशिश की। मैंने उन्हीं किरदारों को निभाया जिनमें मुझे लगा कि मैं बिल्कुल फिट बैठता हूं। दर्शकों ने भी हमेशा ही मेरे किरदारों को पसंद किया। आजकल ये चलन बढ़ गया है कि आपने जो किरदार निभाया है आप उसे दिखाते हैं बताते हैं कि मैंने निगेटिव किरदार निभाया है। लेकिन पहले ऐसा नहीं था। हम सिर्फ किरदार निभाते हैं। निगेटिव या पॉजिटिव का डर नहीं होता हमें।

आजकल फिल्मों में एक्टरों के लुक्स काफी मायने रखते हैं। लोग महीनों तक अपने लुक्स को सीक्रेट रखने के लिए बाहर तक निकलना बंद कर देते हैं। आपका क्या कहना है इस बारे में ?

आजकल तो फिल्मों में अभिनेता सिर्फ लुक लिये ही घूम रहे हैं। ना ही उन्हें किरदार की समझ है ना ही अभिनय की बारीकियों की। मैने हमेशा से ही लुक नहीं बल्कि अपने करिदार को फॉलो किया है। अगर किसी किरदार के लिए मुझे लगा कि मुझे अपना लुक थोड़ा बदलना है तो मैने बदला है। लेकिन किसी स्पेशल लुक के लिए मैंने कभी काम नहीं किया। आजकल एक्टर्स के लुक को लोग भी फॉलो करते हैं इसलिए एक्टर्स भी अपने लुक को लेकर काफी कॉंशस हो गये हैं। लेकिन मैं ऐसा कुछ नहीं करता। जहां जरुरत होती है वहीं पर लुक के साथ कुछ बदलाव करता हूं।

पहले की फिल्मों और अब की फिल्मों की बात करें तो आपकी फिल्मों में किरदारों में काफी बदलाव देखने को मिला है। इतना परिवर्तन क्यों?

पहले हम जो भी किरदार निभाते थे वो अक्सर हमारी आम जिंदगी से जुड़े हुए होते थे। फिल्मों की कहानी उनके किरदार कहीं ना कहीं आम जनता से जुड़े होते थे। यमला पगला एक कॉमेडी फिल्म थी जिसमें कुछ भी सच्चाई नहीं थी। तो पिछले कुछ समय में जो फिल्में आई हैं वो सभी काफी अलग किरदार वाली रही हैं।

सन्नी देओल से बातचीत के कुछ अंश-

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