प्रभावशाली है पीपली लाइव: शालिनी वत्स
दुनिया के 700 सिनेमाघरों में शुक्रवार को रिलीज़ हुई बॉलीवुड फिल्म पीपली लाइव ने धमाल मचा दिया है। फिल्म में पीपली गांव के किसान नत्था के जीवन की विषमताओं को काफी प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया है। इसी फिल्म में नत्था की पत्नी 'धनिया' का किरदार निभाया है दिल्ली की थिएटर आर्टिस्ट शालिनी वत्स ने। यह उनकी पहली फिल्म है, इससे पहले वो रंगमंच पर हबीब तनवीर, बैरी जॉन, बीवी कारंथ जैसे बड़े निर्देशकों के साथ काम किया है। नया थिएटर के नाटक 'जहरीली हवा', ' चरनदास चोर', ' ए मिडसमर नाइट्स ड्रीम', आदि में रोल कर चुकी हैं। शालिनी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से राजनीतिशास्त्र एमफिल कर चुकी हैं।
अपनी पहली फिल्म पीपली लाइव को लेकर शालिनी काफी उत्साहित हैं, उन्हें उम्मीद है कि यह फिल्म कई बड़े रिकॉर्ड कायम करेगी। शालिनी ने दैट्स हिन्दी से विशेष बातचीत में अपनी फीलिंग्स कुछ इस प्रकार बयां की-
पीपली लाइव खास क्यों है?
जो काम बड़े-बड़े सेमिनार, कॉन्फ्रेंस, नाटक आदि करते हैं, वो इस फिल्म ने किया है। फिल्म ने बेहद मनोरंजक ढंग से लोगों को किसानों की असली समस्या को उजागर किया है। हम सभी जानते हैं कि लोग मनोरंजन चाहते हैं, इस फिल्म ने मनोरंजन से भरपूर होने के साथ-साथ एक बड़ा संदेश दिया है। ऐसी फिल्में समाज में एकदम से बदलाव भले ही न ला सकें, लेकिन लंबे अंतराल में सोचें तो ये फिल्म काफी प्रभावशाली है। इसमें हर बात को काफी सरलता से समझाया गया है।
पीपली लाइव में किसका किरदार सबसे प्रभावशाली लगा?
यह फिल्म किसी एक के किरदार पर आधारित नहीं है। यह पूरी टीम का काम है और फिल्म में हर एक व्यक्ति ने अपने किरदार को प्रभावशाली ढंग से निभाया है। सभी ने वास्तविकता को दर्शाया है और उसके हल ढूंढ़ने के प्रयास किए हैं।
थिएटर और सिल्वर स्क्रीन में आपको क्या फर्क महसूस हुआ?
फर्क सिर्फ कैमरे का होता है, बस। दोनों में टीम वर्क काफी महत्वपूर्ण होता है, जो मुझे पीपली लाइव की शूटिंग के दौरान देखने को मिला।
ओमकार और रघुवीर यादव के साथ काम करने में कैसा लगा?
रघुवीर यादव जी इतने सरल व्यक्ति हैं, कि मुझे लगा ही नहीं कि मैं इतने सीनियर व्यक्ति के साथ काम कर रही हूं। नत्था की भूमिका निभाने वाले ओंकार के साथ मैं नाटक चरनदास चोर में काम कर चुकी हूं, लिहाजा मुझे कुछ नया नहीं लगा।
एक राजनीति शास्त्र की स्कॉलर के रूप में पीपली लाइव को आप कैसे देखती हैं?
राजनीतिशासत्री की नजर से देखें तो ये फिल्म न केवल राजनेताओं पर अपना प्रभाव डालेगी, बल्कि ब्यूरोक्रेसी भी इससे जरूर प्रभावित होगी। ऐसी फिल्में हमेशा बननी चाहिए, क्योंकि मनोरंजन के माध्यम से अगर हम समाज में बदलाव ला सकते हैं, तो जरूर करें। ओर मुझे भरोसा है, कहीं न कहीं ये फिल्म अपनी छाप जरूर छोड़ेगी।
आमिर के बाद आप किस फिल्मकार के साथ काम करना चाहती हैं?
वैसे तो श्याम बैनेगल के साथ फिल्म में काम करना चाहूंगी, लेकिन चाहने से कुछ नहीं होता। जब तक फिल्म के किरदार में आपकी पर्सनालिटी फिट नहीं बैठती, तबतक आपको रोल नहीं मिलता। लिहाजा मैं सिर्फ अपने काम पर ही भरोसा कर सकती हूं, काम अच्छा होगा, तो सभी फिल्मकार आपको लेना पसंद करेंगे।


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