For Quick Alerts
    ALLOW NOTIFICATIONS  
    For Daily Alerts

    Exclusive Interview एवेंजर्स जैसी फिल्म हो तो थिएटर जरूरी है, मेरी जान उसमें नहीं अटकी

    |

    ओटीटी और थिएटर रिलीज के बीच जब फिल्म इंडस्ट्री कोरोना लॅाकडाउन में झूल रही थी, तब ये साफ हुआ घूमकेतु डिजिटल रिलीज होगी। हलचल भी हुई और सवाल भी उभरा की नवाजुद्दीन सिद्दीकी अभिनीत। फैंटम और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स का बड़ा बैनर। पुष्पेंद्र नाथ मिश्रा द्वारा लिखित और निर्देशित इस फिल्म ने ओटीटी पर आने के फैसले में कोई जल्दबाजी तो नहीं कर दी?

    क्या सिनेमा भविष्य की फिक्र में आज के दौर में जीना शुरू कर रहा है? तीन साल से तैयार नवाजुद्दीन की ये फिल्म एक आर्थिक संकट के कारण खुद को पर्दे पर उतारने का लंबा इंतजार कर चुकी है। तो क्या कोरोना में थिएटर के फीके रंग ने घूमकेतु को घर की चार दीवारी में बंद कर दिया है? घूमकेतु मोबाइल में दिख कहीं खो ना जाए?

    इन सारे सवालों के साथ Filmibeat Hindi (फिल्मीबीट हिंदी) ने खास बात की घूमकेतु को अपने पेट से निकालने वाले पुष्पेंद्र नाथ मिश्रा से। आप सोच रहें होंगे कि पेट से निकालने वाले मतलब? इसका जवाब आपको इस दिलचस्प बातचीत में मिलेगा। जहां पर उन्होंने घूमकेतु के जन्म लेने से लेकर डिजिटल रिलीज की वजह उजागर की है। ज्ञात हो कि पुष्पेंद्र नाथ मिश्रा विज्ञापन दुनिया का लोकप्रिय नाम हैं। इससे पहले वेब सीरीज 'ताजमहल 1989' के निर्देशन से सिनेमा में अपनी मौजूदगी स्थापित कर चुके हैं।

    कोरोना में हर कोई घूमने से डर रहा है आप घूमकेतु लेकर आ रहे है?

    कोरोना में हर कोई घूमने से डर रहा है आप घूमकेतु लेकर आ रहे है?

    गांव के देसी नाम दिलचस्प होते हैं, इनके नाम में ही कहानी है। जैसे धूमकेतु तारा होता है, वैसे ही घूमकेतु पूरी दुनिया में घूम कर अपने आंगन में वापस आ जाता है। जो तारा घूम फिर कर अपने आंगन में वापस आ जाए वो घूमकेतु ही होगा ना? इसका नाम घूमकेतु क्यों है इसका चिन्ह आपको फिल्म में मिलेगा कि ऐसा नाम क्यों है? ये नाम देखने की दिलचस्पी पैदा करता है। मेरी कहानी की शुरुआत घूमकेतु नाम से ही हुई है। उसके नाम में ही एक सफर है। घूमकेतु नाम से ज्यादा सफर लगता है।

    खुद से प्रेरित होकर लिखा है या फिर लेखकों का जो सिनेमा में संघर्ष रहा है उससे ली गई कहानी है?

    खुद से प्रेरित होकर लिखा है या फिर लेखकों का जो सिनेमा में संघर्ष रहा है उससे ली गई कहानी है?

    देखिए निजी तो इसमें कुछ नहीं है। लेखक वैसे अपने बारे में कम और दूसरों की जिंदगी पर किस्सा गढ़ता है। ये कहानी मेरे पेट में पैदा हुई है, इसे मैंने उस तरह से लिखा है। लेकिन ये कहानी मुझ पर नहीं है। अधिकतर लेखक दूसरों की जिंदगी को रिपोर्ट करते रहते हैं, ये देखते हैं कि उनके आस पास क्या होता है। लेखक समाज के बारे में, लोगों के बारे में लिखते हैं।

    अगर मैं किसी लेखक के किरदार पर लिख रहा हूं तो मुझे उसकी क्षमता के अनुसार लिखना होता है। किरदार की सोच से लिखना होता है। कभी-कभी कहानी के लिए इंसान किरदार खोजता है, कभी किरदार के लिए कहानी। लेखक लिखते समय जरूर अपने जीवन में से खोजता है कि अरे, वो मेरे चाचा ऐसे थे, मेरी बुआ ये कहती थी। उसके छोटे भाई का किस्सा मैं जानता हूं। लेकिन जब ये किसी की कहानी में जाता है तो बदल जाता है। फिर सिर्फ प्रेरणा होती है बाकी किरदार कुछ अलग ही होता है। हां, उसमें परछाईयां होती हैं ये जीते जाकते लोग नहीं होते हैं। सिर्फ परछाईयों से इंसान बना देता है।

    डायरेक्शन का विचार कैसे आया? क्या ये सोचा कि दूसरा निर्देशक होने से मेरी कहानी भटक जाएगी?

    डायरेक्शन का विचार कैसे आया? क्या ये सोचा कि दूसरा निर्देशक होने से मेरी कहानी भटक जाएगी?

    मैं पहले निर्देशक हूं। कहानी लिखने की वजह डायरेक्शन रहा है। मैं विज्ञापन निर्देशित करता हूं। वक्त नहीं होता कि किसी दूसरे लेखक के साथ बैठूं। खुद के साथ समय निकालना आसान होता है। मैं ही लेखक हूं और निर्देशक भी। हम दोनों को आधे घंटे का समय मिल गया,तो फिर हो गया । मैंने लिखा ही इस पहलू को सोचकर है कि निर्देशन मैं ही करूंगा। मुझे एक्सपेरिमेंटल ह्यूमर के साथ इसे गढ़ना था। वो हो गया।

    घूमकेतु का आर्थिक संघर्ष भी लंबा रहा है? रिलीज के लिए इंतजार का कष्ट हुआ होगा?

    घूमकेतु का आर्थिक संघर्ष भी लंबा रहा है? रिलीज के लिए इंतजार का कष्ट हुआ होगा?

    हां, इस फिल्म को तीन से चार साल लगा है। इंतजार तो बुरा लगता है। सब पीछे छोड़ दे तो आज मैं बहुत खुश हूं। इंतजार करने के बाद मुझे बड़ा दर्शक वर्ग मिल रहा है। इंतजार रंग लाया है। डिजिटल रिलीज में विश्व में कहीं पर भी फिल्म को देख सकते हैं। कोई शो टाइमिंग नहीं है। रात के तीन बजे भी देख सकते हैं। आप बार-बार देख सकते है। ये सारी चीजें हमारे जैसे कंटेंट क्रिएटर और डिजिटल दर्शकों के लिए ज्यादा बड़ी है।

    लेकिन थिएटर में फिल्मों का स्वाद अलग होता है। फिलहाल कोरोना लॉकडाउन है तो रुकावट है..

    लेकिन थिएटर में फिल्मों का स्वाद अलग होता है। फिलहाल कोरोना लॉकडाउन है तो रुकावट है..

    मैं इस सोच का नहीं हूं। लोग अपने घर पर सबसे बड़े पर्दे पर देखते हैं । हां, अगर एवेंजर्स जैसी कोई लार्ज स्केल वाली फिल्म बनाई है तो थिएटर में जरूरी है । सुंदर भी लगता है। मेरी जान उसमें नही अटकी है। मेरे लिए कहानी सेलिब्रेट करना लोगों तक पहुंचना प्रमुख है। हालांकि तकनीकी तौर पर आप बड़े पर्दे पर आनंद महसूस करते हैं। लेकिन आज एचडी टीवी पर आप सबकुछ रंगीन देखते हैं। तो वो बड़ा ही लगता है। थिएटर का मजा है, डिजिटल में वो बिल्कुल खराब हो जाता है ऐसा नहीं है। तकनीकी विकास हुआ है। सुपर स्मार्ट टीवी है। साउंड की क्वालिटी है।

    क्या लक्ष्मी बम, राधे जैसी बड़ी फिल्मों के क्लैश को देखते हुए इसे डिजिटल रिलीज किया गया ?

    क्या लक्ष्मी बम, राधे जैसी बड़ी फिल्मों के क्लैश को देखते हुए इसे डिजिटल रिलीज किया गया ?

    ये तो निर्माता का सवाल है। वो बताएं कि क्या वजह है, मेरी इतनी दखल नहीं है। मैं ये कहूंगा कि लॉकडाउन में एक पारिवारिक ह्यूमर फिल्म की जरूरी जगह है। उसका सेलिब्रेशन है। कुलमिलाकर देखा जाए तो लॉकडाउन का असर होगा। उसकी वजह से कुछ लोगों को मजबूरन डिजिटल पर जाना होगा।

    हर कोई इंतजार नहीं कर सकता है। जिंदगी को पटरी पर आने में वक्त है। लोगों पर आर्थिक दबाव है। उन लोगों को रिस्क लेना होगा। ये अपनी पसंद पर निर्भर है। घूमकेतु इस फेहरिस्त में नहीं है। हमें तो इंटरनेशनल रिलीज मिल रही है। मेरे लिए ये थिएटर से बढ़कर है। थिएटर में कहीं पर शो मिलते कहीं पर नहीं। दो वीक में फिल्म खत्म हो जाती है। ओटीटी पर कभी भी देख सकते हैं। विश्व में कहीं पर भी।

    कास्टिंग को लेकर क्या सोच रही है? अमिताभ बच्चन जैसे बिग स्टार्स का कैमियो है?

    कास्टिंग को लेकर क्या सोच रही है? अमिताभ बच्चन जैसे बिग स्टार्स का कैमियो है?

    नवाजुद्दीनी में खूबी है कि वो ऐसे दिखते हैं जैसे कोई अपना हो। स्टार्स को सोचकर लगता है कि वह हमारी पहुंच से दूर हैं। हालांकि नवाजुद्दीन सिद्दीकी बड़े स्टार हैं। एक कॉमन कैरेक्टर के भीतर बड़ा स्टार इंडस्ट्री में खोजना मुश्किल है। कॅामेडी के साथ दर्शकों को नवाज नए रंग में दिखेंगे। घूमकेतु में दर्शकों को बुलाने के लिए स्टार्स का कैमियो करना कोई स्टंट नहीं है।

    कहानी की जरूरत है वो स्टार्स का होना । अनुराग कश्यप और नवाजुद्दीन की जोड़ी की कास्टिंग से दर्शकों को मजा भी आता है। एक गंभीर कलाकार है तो दूसरा उसी हिसाब का निर्देशक। दोनों ही डार्क और थ्रिलर स्पेस में सिनेमा में रहे हैं। यहां एक फ्रेम में दोनों दिखते हैं तो कॅामेडी है। यहां हम दर्शकों को कलाकार के तौर पर कुछ नया परोस रहे हैं।

    कास्टिंग को लेकर क्या तय हुआ था? स्टार्स भी अब कंटेंट को महत्व देते हैं?

    कास्टिंग को लेकर क्या तय हुआ था? स्टार्स भी अब कंटेंट को महत्व देते हैं?

    स्टार्स भी तभी राजी होते हैं जब उन्हें लगता है कि फिल्म में उनकी जरूरत है। वो भी सही है। वो करेंगे भी क्यों? स्टार्स को कोई पब्लिसिटी की आवश्यकता नहीं। वो तो खुद ही स्टार हैं। वो कहानी मेें खुद को खोजते हैं। इस बीच नवाजुद्दीन तक पहुंचना कैसे हुआ? तो उनसे फैंटम फिल्म्स ने संपर्क किया था।

    कोरोना महामारी को सिनेमा और निजी जिंदगी के लिहाज से कैसे देखते हैं?

    कोरोना महामारी को सिनेमा और निजी जिंदगी के लिहाज से कैसे देखते हैं?

    लॅाकडाउन में भी हम लोगों की जरूरत को पूरा करते रहेंगे। लोग इस वक्त लिख रहे हैं। लॅाकडाउन खुलेगा तो बनायेंगे। मैं 20 साल तक लखनऊ में रहा है।मेरी मां संस्कृत और हिंदी साहित्य में कई उपाधि ले चुकी हैं।

    मेरे पिता वकील रहे हैं। दोनों को मिलाकर मेरा कुछ बन गया। फिर मैंने डिजाइन की पढ़ाई की और विज्ञापन के क्षेत्र से सफर शुरू हुआ। लखनऊ सभ्यता तहजीब का शहर है। उसका असर भी मेरे जीवन पर रहा है। बाकी ये वक्त बदलने का है। प्रकृति का सम्मान करने का है।

    English summary
    In an Exclusive Interview Nawazuddin Siddiqui film Ghoomketu director Pushpendra Misra talk about digital release corona pandemic and more
    तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
    Enable
    x
    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Filmibeat sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Filmibeat website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more
    X