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    हिंदी सिनेमा में ऐसा क्यों होता है भाई !

    By Staff
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    सुधीर मिश्रा की 'तेरा क्या होगा जॉनी' में नील नितिन मुकेश की मुख्य भूमिका है. 'धारावी','इस रात की सुबह नहीं','खोया-खोया चांद' और 'हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी' जैसी फ़िल्में निर्देशित करने वाले सुधीर मिश्रा कहते हैं कि हिन्दुस्तान इतना बड़ा देश है ऐसे में फ़िल्मी सितारों के बच्चों को सिनेमा में आसानी से जगह मिलने की रवायत सही नहीं है.

    सुधीर मिश्रा के मुताबिक़ हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री में लोकतंत्र की कमी है. अपनी नई फ़िल्म 'तेरा क्या होगा जॉनी ' की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुधीर ने कहा "ये काफ़ी अलोकतांत्रिक सी बात है. ऐसा नहीं होना चाहिए. मैं भी बाहर से आया था और किसी से पहचान भी नहीं थी मुंबई में.मुश्किलें तो हुईं लेकिन उसका भी बड़ा मज़ा होता है." सुधीर की नई फ़िल्म 'तेरा क्या होगा जॉनी' मुंबई को केन्द्र में रख कर बुनी गई है जिसमें कॉफ़ी बेचने वाले एक बच्चे की नज़र से भागती-दौड़ती मायानगरी को उकेरा गया है.

    इस बच्चे के किरदार के लिए चुनाव भी काफ़ी दिलचस्प रहा. सुधीर बताते हैं कि "मुझे ये बच्चा कोलकाता में मिला था. उसने पहले भी एक जर्मन फ़िल्म में काम किया था लेकिन उसके बाद उसका कुछ पता नहीं था.वो शादियों में कैमरा अटेन्डेन्ट के तौर पर काम कर रहा था. मैनें उसे ढूंढ निकाला.अब वो हमारे ऑफ़िस में रहता है और पढ़ाई भी कर रहा है. मुझे पूरी उम्मीद है कि वो बड़ा होकर अच्छा अभिनेता बनेगा."

    यह पूछे जाने पर कि 'तेरा क्या होगा जॉनी' के पीछे की प्रेरणा क्या है. सुधीर ने कहा कि "मुंबई शहर से मुझे इश्क़ है.इसकी दौड़ती-भागती ज़िदगी में कहानियां छिपी हैं. एक तरफ़ मैं इस बच्चे से मिला और दूसरी तरफ़ विकास की तेज़ चाल चलता मुंबई जिसमें मैं रहता हूं. दोनों के बीच का अंतर काफ़ी दिलचस्प लगा." 'तेरा क्या होगा जॉनी' में नील नितिन मुकेश और सोहा अली ख़ान की मुख्य भूमिका है और वो शुक्रवार को रिलीज़ हो रही है.

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