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शोले की यादों में खोये जावेद अख्तर

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'शोले' के प्रदर्शन के 35 वर्ष पूरे हो जाने के बाद भी सलीम खान के साथ इस फिल्म की पटकथा लिखने वाले जावेद अख्तर इसकी सफलता को लेकर आश्चर्यचकित हैं। पैंसठ वर्षीय अख्तर कहते हैं, "मुझे आश्चर्य होता है कि एक फिल्म कैसे भारतीय मानस में इतनी गहराई से प्रवेश कर गयी है। फिल्मोद्योग में इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ।"

अख्तर के मुताबिक "पैंतीस साल बाद भी 'शोले' के छोटे से छोटे किरदार का विज्ञापनों, प्रोमो, फिल्मों और यहां तक कि हास्य धारावाहिकों में भी इस्तेमाल हो रहा है।"' उन्होंने कहा, "यह दुनियाभर में पूरी तरह अप्रत्याशित है। 'गॉडफादर' और 'जेम्स बांड' जैसी फिल्मों के साथ इन पूरी फिल्मों को याद रखने की बजाए इनके एक-दो किरदार ही लोगों को याद रहे। मुझे ऐसी कोई फिल्म याद नहीं है जिसके कई किरदारों को कई सालों बाद भी याद रखा गया हो।"

शोले' 15 अगस्त 1975 को रिलीज हुई थी। रोमांस, रोमांच और हास्य से भरी इस फिल्म का निर्माण तीन करोड़ रुपये के बजट में हुआ था। वर्ष 1999 में बीबीसी इंडिया ने इसे 'सहस्राब्दी की फिल्म' घोषित किया था। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर लगातार पांच साल तक सफलता अर्जित की। इसलिए इस फिल्म को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉडर्स में दर्ज किया गया है।

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