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    INTERVIEW: इंडस्ट्री में आए बदलाव, रिजेक्शन और सफलता पर विद्या बालन- 'अभिनेत्रियों के लिए यह बेस्ट समय है'

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    "मुझे याद है शुरुआत में लोग मुझसे कहते थे कि अभिनेत्रियों की स्क्रीन लाइफ बहुत कम होती है, उन्हें पूरे करियर में एक या दो मजबूत और यादगार रोल मिलते हैं। मैं ये बिल्कुल नहीं मानती।" हर फिल्म, हर किरदार के साथ दर्शकों के दिल में खास जगह बनाने वालीं पावरहाउस अभिनेत्री विद्या बालन कहती हैं।

    पद्मश्री, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और छह फिल्मफेयर पुरस्कार अपने नाम कर चुकीं विद्या बालन मानती हैं कि वह फिल्म इंडस्ट्री में आए बदलाव का हिस्सा रही हैं। वह कहती हैं, "इंडस्ट्री में आ रहे बदलाव को मैं सकारात्मक तौर पर देखती हूं। मानती हूं कि अभी भी काफी कुछ बदलना है, लेकिन यह समय के साथ ही होगा, रातोंरात नहीं।"

    विद्या बालन और शेफाली शाह अभिनीत फिल्म 'जलसा' 18 मार्च को अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज होने वाली है। फिल्म की रिलीज से पहले विद्या बालन ने मीडिया से खास बातचीत की, जहां उन्होंने फिल्म उद्योग में आए बदलाव, शेफाली शाह के साथ सहयोग करने के अनुभव, रिजेक्शन का सामना करने, सफलता का आनंद लेने पर खुलकर बातें की।

    यहां पढ़ें इंटरव्यू से कुछ प्रमुख अंश-

    फिल्म में आपके और शेफाली शाह के साथ होने को लेकर बहुत चर्चा है। आप दोनों की पहली मुलाकात कैसी रही थी?

    फिल्म में आपके और शेफाली शाह के साथ होने को लेकर बहुत चर्चा है। आप दोनों की पहली मुलाकात कैसी रही थी?

    हमारी पहली मुलाकात स्क्रिप्ट रीडिंग के दौरान हुई। सच कहूं तो मैं नर्वस थी। हमने पहले कभी साथ में काम नहीं किया था। मैंने मानव (कौल) से बात की थी, तो उन्होंने कहा था कि शेफाली बहुत कूल हैं। लेकिन मुझे इनके प्रॉसेस को लेकर कोई जानकारी नहीं थी। जब हम स्क्रिप्ट रिडिंग के लिए मिले, तो शेफाली ने मुझे बहुत प्यार से गले लगाया। इसके बाद मैं बहुत ही कम्फ़र्टेबल हो गई। मुझे लगता है कि हमारी वाइब काफी एक जैसी है। फ़िल्म में एक साथ हमारे ज़्यादा सीन नहीं हैं, लेकिन जो हैं वो बहुत महत्वपूर्ण हैं। वैसे मैं शेफाली के साथ फिर से काम जरूर करना चाहूंगी क्योंकि मुझे उनके काम करने के प्रॉसेस को समझना है।

    'जलसा' को पहले आपने रिजेक्ट कर दिया था। फिर आपका निर्णय कैसे बदला?

    'जलसा' को पहले आपने रिजेक्ट कर दिया था। फिर आपका निर्णय कैसे बदला?

    हां, मना कर दिया था क्योंकि मुझे उस वक्त लगा था कि मुझमें हिम्मत नहीं है ये करने की। ये थोड़ा ग्रे किरदार है, तो मुझे लगा कि लोग शायद मुझे इसके लिए जज करेंगे। दरअसर, मैं खुद को ही जज कर रही थी। लेकिन मुझे स्क्रिप्ट बहुत ही बेहतरीन लगी थी। फिर लॉकडाउन आ गया.. और मुझे लगता है वो ऐसा वक्त था, जब सबकी सोच में थोड़ा बदलाव आया। जो आप खुद के बारे में सोचते हैं, दूसरों के बारे में सोचते हैं, दुनिया के बारे में सोचते हैं.. सबकुछ में बदलाव आया। उसी वक्त मुझे लगा कि मैं माया का किरदार निभाने के लिए तैयार हूं।

    फिल्मों में आपने इतने दमदार किरदार निभाए हैं। आपको लगता है कि इस वजह से इंडस्ट्री में आपको लेकर लोगों ने पहले ही धारणाएं बना रखी हैं?

    (हंसते हुए) यदि कोई धारणाएं हैं भी, तो बहुत अच्छी हैं। मुझे इससे परेशानी नहीं है क्योंकि मुझे बहुत अच्छी भूमिकाएं मिल रही हैं, मजबूत किरदार मिल रहे हैं। ऐसी फिल्में मिल रही हैं जहां मैं केंद्र भूमिका निभा रही हूं।

    इतने सालों में फिल्मों के चुनाव को लेकर आपकी प्रक्रिया में कोई बदलाव आया है?

    इतने सालों में फिल्मों के चुनाव को लेकर आपकी प्रक्रिया में कोई बदलाव आया है?

    शायद साल 2007- 2008 के दौरान मैंने कुछ ऐसी फिल्में की थीं, जिसमें मैंने अपना 100 प्रतिशत नहीं दिया था। फिर मैंने महसूस किया कि इसका कोई औचित्य नहीं है। यदि कोई कहानी मुझे मेरा सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रेरित नहीं कर रही है, तो मुझे वो नहीं करनी चाहिए। कभी कभी थोड़ा इंतजार करना भी सही होता है। अक्सर लोग कहते हैं कि अभिनेत्रियों की स्क्रीन लाइफ बहुत कम होती है। मैं ये बिल्कुल नहीं मानती।

    जिस तरह के किरदार आज अभिनेत्रियों के लिए लिखे जा रहे हैं, आपको लगता है यह एक बड़ा सकारात्मक बदलाव है?

    बिल्कुल, फीमेल एक्टर्स के लिए यह सबसे सही वक्त है। हमारे लिए इतने दिलचस्प किरदार, इतनी अच्छी कहानियां लिखी जा रही हैं.. मेल एक्टर्स कर क्या रहे हैं? मैं किसी का अनादर नहीं करना चाहती, लेकिन वो उसी पुराने ढ़ांचे में बंधे हैं। जबकि हम बहुस्तरीय, nuanced भूमिकाएं कर रही हैं। अभिनेत्रियों द्वारा सामान्य से लेकर असाधारण कहानियों को एक्सप्लोर किया जा रहा है।

    यही वजह है कि, तुम्हारी सुलु, शेरनी से लेकर शंकुलता देवी तक, अब आपकी ज्यादातर फिल्में महिला-केंद्रित होती हैं?

    यही वजह है कि, तुम्हारी सुलु, शेरनी से लेकर शंकुलता देवी तक, अब आपकी ज्यादातर फिल्में महिला-केंद्रित होती हैं?

    नहीं, ऐसा नहीं है। मुझे अब मेल एक्टर्स के साथ फिल्में ऑफर भी नहीं होती हैं और मैं उन्हें मिस भी नहीं करती हूं। मैंने कई बेहतरीन कलाकारों के साथ काम किया है, लेकिन मैं यहां कथित तौर ए- लिस्ट स्टार्स की बात कर रही थी। वैसे बीच में मैंने अक्षय कुमार के साथ मिशन मंगल किया था। लेकिन उसके अलावा किसी हीरो के साथ साल 2008 से लेकर अब तक कुछ ऐसा मिला नहीं है, जो मुझे दिलचस्प लगे। मुझे यूं ही बहुत शानदार कहानियां और किरदार मिल रहे हैं, तो मैं उस बारे में सोच भी नहीं रही हूं। मुझे खुशी है कि इंडस्ट्री में यह बदलाव आ रहा है। लेकिन इसके लिए उन सभी अभिनेत्रियों को धन्यवाद, जिन्होंने यह रास्ता तैयार किया। मीना कुमारी, हेमा मालिनी, रेखा, जया बच्चन से लेकर शबाना आज़मी, श्रीदेवी.. यहां तक पहुंचने में हर किसी का योगदान रहा है। मुझे याद है शुरुआत में लोग मुझसे कहते थे कि अभिनेत्रियों को पूरे करियर में एक या दो मजबूत यादगार रोल मिलते हैं। लेकिन आज ऐसा नहीं है। समय के साथ बदलाव आया है। आज तापसी, कंगना, आलिया, दीपिका.. सभी को देंखे, सभी बेहतरीन काम कर रही हैं।

    ओटीटी से आए बदलाव को किस तरह देखती हैं?

    मुझे लगता है कि ओटीटी ने कई तरह से भेदभाव मिटा दिया है; कहानियों को कहने के तरीके से लेकर, कलाकारों के चुनाव तक। ओटीटी एक काफी बड़ा स्पेस है और यहां हर तरह के कंटेंट के लिए जगह है। मुझे लगता है कि कलाकारों के लिए यह काफी दिलचस्प समय है।

    क्या ये सच है कि, एक दफा आप गुस्से में मरीन ड्राइव से बांद्रा तक पैदल चली गई थीं?

    क्या ये सच है कि, एक दफा आप गुस्से में मरीन ड्राइव से बांद्रा तक पैदल चली गई थीं?

    (हंसते हुए) हां, ये बहुत पहले की बात है। शायद साल 2003- 2004 की। हुआ कुछ ऐसा था कि मैंने के बालाचंदर सर के साथ दो फिल्में साइन की थीं। और वो एक ऐसा दौर था, जब मैं हर फिल्म में रिप्लेस हो रही थी। उस दिन मुझे पता चला था कि मैं उन दो फिल्मों में भी रिप्लेस हो गई थी और उन्होंने मुझे बताया भी नहीं था। इनमें से एक फिल्म की शूटिंग के लिए हम न्यूजीलैंड जाने वाले थे। जब उन्होंने पासपोर्ट के लिए कोई संपर्क नहीं किया तो मुझे महसूस होने लगा था कि कुछ गड़बड़ है। फिर मेरी मां ने के बालाचंदर की बेटी से बात की, तो उन्होंने बताया कि सर को लगता है कि विद्या फिल्म के लिए सही नहीं है। फिर ना उन्होंने कुछ कहा, ना हमने। लेकिन मेरा दिल बुरी तरह से टूट चुका था, मैं खुले में सांस लेना चाहती थी। तो मैं बस घर से निकल गई। मुझे महसूस भी नहीं हुआ था कि मैं कड़ी धूप में चार- पांच घंटे तक बस चलती रही थी। फिर मैं बहुत रोई।

    आज के समय में रिजेक्शन को किस तरह से लेती हैं?

    आज के समय में रिजेक्शन को किस तरह से लेती हैं?

    किसी भी तरह से जब आपको रिजेक्शन से सामना करना पड़ता है तो दुख तो होता ही है.. लेकिन अब बाउंस बैक टाइम कम हो चुका है। अब यह भी लगता है कि तमाम संघर्षों के बाद मैं आगे भी तो बढ़ी। यदि मैं उस वक्त से बाहर निकल सकती हूं तो ये क्या चीज़ है।

    अपने करियर में आपने जैसी फिल्में कीं हैं, वो कहीं ना कहीं आज के दौर में एक उदाहरण के तौर पर रहा है। आप आज अपने अब तक के सफर को किस तरह देखती हैं?

    मैं कृतज्ञ महसूस करती हूं। सच कहूं तो अपनी सफलता के लिए मुझे लगता है कि सही वक्त पर मैं सही जगह पर थी.. क्योंकि ये कहानियां मैंने नहीं लिखीं, ये फिल्में किसी और ने बनाए हैं। लेकिन बतौर एक्टर मैं बहुत भूखी हूं.. तो मैंने उन फिल्मों को हां कर दी और वो फिल्में चलीं। इस बदलाव के लिए सिर्फ मैं जिम्मेदार नहीं हूं। लेकिन मुझे खुशी है कि मैं बदलाव का मैं हिस्सा रही हूं।

    English summary
    In an interview with Filmibeat, powerhouse actress Vidya Balan speaks about change in the film industry, experience of collaborating with Shefali Shah, about facing rejections, rejoicing success and much more.
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