INTERVIEW: रोहित शेट्टी से बोलिए मुझे गोलमाल दें, मैं कॉमेडी फिल्म करना चाहती हूं- काजोल

Kajol: पिछले तीन दशक से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपने अभिनय का जादू बिखेर रहीं अभिनेत्री काजोल अपनी नई फिल्म के साथ दर्शकों के सामने आने को तैयार हैं। रेवती के निर्देशन में बनी फिल्म 'सलाम वेंकी' में काजोल और विशाल जेठवा मुख्य किरदारों में नजर आएंगे। इस इमोशनल ड्रामा में काजोल एक मां का किरदार निभा रही हैं, जिसका बेटा मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से गुजर रहा है। सलाम वेंकी श्रीकांत मूर्ति की किताब 'द लास्ट हुर्राह' पर आधारित है।
सलाम वेंकी 9 दिसंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। फिल्म की रिलीज से पहले, काजोल ने फिल्मीबीट के साथ बातचीत की है, जहां एक्ट्रेस ने सलाम वेंकी के अलावा आमिर खान के साथ काम करने के अनुभव और फिल्मों से ब्रेक लेने के अपने फैसले पर भी खुलकर बातें की हैं। साथ ही काजोल ने कहा है कि आगे वो कॉमेडी फिल्में करने की इच्छा रखती हैं।
यहां पढ़ें इंटरव्यू से कुछ प्रमुख अंश-

Q. सलाम वेंकी में आप एक मां का किरदार निभा रही हैं। इस किरदार से जुड़ना कितना आसान या मुश्किल रहा?
A. मैं एक रियल लाइफ महिला सुजाता का किरदार निभा रही हूं। जब मैं सुजाता से मिली, तो उनकी सिंपलिसिटी मुझे भा गई। वो बहुत ही स्ट्रॉन्ग औरत हैं। कई बार जो सिंपल लोग होते हैं, वो सबसे ज्यादा निडर भी होते हैं। यही सुजाता की खासियत है कि उन्होंने जो भी देखा और जो भी किया है, वो बहुत ही कम लोग कर पाते हैं। मेरे लिए उनका किरदार निभाना काफी चैलेंजिंग रहा है। उनके इमोशंस को स्क्रीन पर निभाना, बहुत मुश्किल टास्क था। भगवान से यही दुआ करूंगी कि उन्होंने जो फेस किया है, दुनिया में कोई भी इंसान उससे ना गुजरे। उनसे मैंने यही सीखा है कि अपने डर को कभी भी बच्चों पर हावी मत होने दो। उनके जो सपने हैं, सोच हैं या जिंदगी है, हमारे डर की वजह से उसमें कोई ब्रेक ना आए।
Q. आप सुजाता से खुद को कितना रिलेट कर पाईं?
A. खुद से मैं सुजाता को बहुत ज्यादा रिलेट कर पाती हूं क्योंकि वो पूरी तरह से एक मां हैं। वो 90 प्रतिशत मां है और सिर्फ 10 प्रतिशत सुजाता हैं। जब तक वैंकी गुजरा नहीं, तबतक उनकी पूरी जिंदगी अपने बेटे के ईर्द-गिर्द घूमती रही। जब हम मां बन जाते हैं, तो वो अलग ही फीलिंग होती है। जब मेरी बेटी नीसा छोटी थी, तो वो पहला साल मैंने कैसे गुजारा है, वो मैं ही जानती हूं। मैं उस वक्त पागल हो गई थी। मेरा पूरा फोकस यही था कि इस एग्जाम में मैं फेल नहीं हो सकती। ये एक ऐसी चीज है, जिसमें मैं कोई गलती कर ही नहीं सकती। एक नन्हीं सी जान को मेरे हाथ में रख दिया गया है और भगवान ने कहा कि मुझे उसे बड़ा करना है। मेरा यही फोकस था कि वो अच्छे से एक साल की हो जाए। उसके पहले जन्मदिन पर मैंने बहुत राहत महसूस किया था। यह अहसास वाकई में सुकून देता है कि आपका बच्चा ठीक है। मैं सुजाता की सिचुएशन अपने बुरे सपने में भी कंपेयर नहीं कर सकती हूं।

Q. मां बनने के बाद आपने करियर में ब्रेक लिया था। उस निर्णय पर क्या कहना चाहेंगी?
A. मां बनने के बाद मैंने जानबूझकर अपने करियर से ब्रेक लिया था। वो पूरी तरह से मेरा निर्णय था। मैंने यही सोचा था कि मैं आर्थिक तौर पर स्टेबल हूं और ये कर सकती हूं। काम को छोड़ना पूरी तरह से मेरी च्वॉइस थी। मुझे ना ही अजय ने या बच्चों या किसी परिवार ने फोर्स किया था। मैं उस वक्त अपने बच्चों के साथ वक्त गुजारना चाहती थी। मैंने बच्चे पैदा किए हैं, तो मैं मानती हूं कि कहीं न कहीं मेरी यह जिम्मेदारी भी है कि मैं उन्हें अच्छी तरह से बड़ा करूं। जिसका मतलब यही है कि मैं पूरा वक्त उनके साथ गुजारूं। जिस रफ्तार से मेरा करियर चल रहा था, उसको जारी रखती, तो जिम्मेदारी नहीं निभा पाती। मैंने तो इस फैसले के लिए किसी से इजाजत ही नहीं ली थी। यहां तक कि मेरी सास ने कहा था कि बेटा तुम काम करो, ये मत सोचना कि बच्चा पैदा हुआ है, तो काम नहीं करना है.. नीसा की टेंशन मत लो, हम संभाल लेंगे। मैं बहुत लकी हूं कि मेरे ईर्द-गिर्द इतनी खूबसूरत औरतों का सपोर्ट रहा है।
Q. बच्चों के साथ आपकी बॉण्डिंग किस तरह की है?
A. मेरे बच्चे मेरे दोस्त की तरह हैं। मैं बहुत कोशिश करती हूं कि उनको अपनी दोस्ती भी दिखाऊं और जब जरूरत पड़े, तो मां भी बन जाऊं। मेरे लिए जरूरी है कि मैं मां तो बनी रहूं, इससे एक अथॉरिटी आती है।

Q. फिल्म का विषय इतना संवेदनशील है। शूटिंग के दौरान कभी ब्रेकडाउन का मोमेंट भी आया?
A. यह विषय और किरदार ऐसा है कि इसे आप चाहकर भी हल्के में ले ही नहीं सकते हैं। शूटिंग के दौरान कई ऐसे सीन्स रहे हैं कि सेट पर हम बिना ग्लीसरीन रोए हैं। हमारे रोने की वजह से कई रीटेक्स भी हुए हैं। जब आपको अचानक से याद आता है कि यह तो असल घटना है, कोई इससे गुजर चुका है.. बहुत रोना आता है। ये फिल्म ही ऐसी है कि कहीं न कहीं आपके दिल को छू जाएगी। इस किरदार को निभाना बहुत बड़ी जिम्मेदारी थी।
Q. बैक टू बैक कई फिल्मों में आपने मां के किरदारों का ही चुनाव किया है। कोई खास वजह?
A. नहीं, कोई खास वजह तो नहीं है। मैं हमेशा से कहती हूं कि मुझे अच्छे स्क्रिप्ट की तलाश है। ऐसे बहुत कम मौके होते हैं, जब एक बकाएदा अच्छी स्क्रिप्ट आपके पास आए। लोगों को यह भी पता है कि मैं बहुत चूजी रही हूं। ऐसी कोई भी प्लानिंग नहीं है कि मैं केवल एक तरह की ही फिल्म करना चाहती हूं। जैसे हां, मुझे कॉमेडी फिल्म करने की बहुत इच्छा है। मेरी कोशिश होगी कि मैं अगला प्रोजेक्ट कॉमेडी ही करूं। आप लोगों को तो रोहित शेट्टी और अजय से पूछना चाहिए कि मुझे क्यों गोलमाल में रोल नहीं देते हैं। मुझे लगता है कि मैं बहुत ही फनी हूं।

Q. सलाम वेंकी में आपके साथ आमिर खान भी नजर आ रहे हैं। लंबे समय बाद एक बार फिर साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
A. मुझे आमिर के साथ काम करने में बहुत मजा आया। मैं उनकी इस बात की बहुत रिस्पेक्ट करती हूं कि इतने सालों तक काम करने के बावजूद आमिर का कोई सेट स्टाइल नहीं है। उन्होंने अपने आपको स्टाइलाइज नहीं किया है, बांधा नहीं है। हर फिल्म में उनका एक बिल्कुल अलग किरदार होता है। साथ ही आप उनसे यह पूरी उम्मीद कर सकते हो कि जो भी फिल्म वो करेंगे.. वो अपना सौ प्रतिशत दे देंगे। जिस भी फिल्म में वो होंगे, फिल्म बेहतरीन ही बनेगी, बुरी नहीं बनेगी। सलाम वैंकी में भी बिलकुल वही हुआ है। एक बेहतर एक्टर बनने से लेकर बेहतर सीन, बेहतर लुक को लेकर जो उनकी कोशिश है, वो आज भी जारी है। और ये बात काबिल ए तारीफ है।
Q. नीसा के फिल्मी डेब्यू को लेकर काफी बातें होती रहती हैं। आप इस बारे में कितनी सहज हैं?
A. मेरी बेटी और मैं इस टॉपिक पर बहुत बार बात कर चुके हैं। अभी तो नीसा पढ़ाई कर रही है। अभी वो अपनी जिंदगी एन्जॉय कर रही है। मुझे नहीं लगता है कि इतनी जल्दी वो इंडस्ट्री में आने का सोच भी रही है।

Q. सोशल मीडिया पर आप काफी एक्टिव रहती हैं। पॉपुलैरिटी के साथ साथ नेगेटिविटी से कैसे डील करती हैं?
A. लोग अलग दिखने के चक्कर में आजकल कई बातों को तूल दे देते हैं। ये सब देखकर बुरा भी लगता है। लेकिन मैं ट्रोल्स को वैल्यू ही नहीं देती हूं। मैं निगेटिव को छोड़ पॉजिटिव देखने पर यकीन रखने वाली हूं।
Q. शायद इसीलिए इतने लंबे करियर में आप कभी किसी कंट्रोवर्सी का भी हिस्सा नहीं रही हैं?
A. (हंसते हुए) हां यार, मेरी जिंदगी में कोई कंट्रोवर्सी नहीं है। अगर होती, तो शायद लाइफ और दिलचस्प होती। खैर, मैं मानती हूं कि अगर मुझे किसी को कुछ कहना है, तो मैं जाकर डायरेक्ट उसके फेस पर कहती हूं। मुझमें इतनी हिम्मत है कि मैं अपनी बात रख सकती हूं। मुझे सोशल मीडिया पर जाने की या किसी के पीठ पीछे जाने की जरूरत नहीं है।

Q. फिल्म दृश्यम 2 को बॉक्स ऑफिस पर अपार सफलता मिली है। मानती हैं कि फिल्म गेम चेंजर साबित हुई है?
A. बिलकुल, दृश्यम 2 गेम चेंजर रही है। फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप होना डराता था। दृश्यम 2 एक पॉजिटिविटी लेकर आई है। मैं बहुत खुश हूं कि अब लोग थिएटर की ओर अपना रूख कर रहे हैं। हमारी फिल्मों को तवज्जो दी जा रही है। हम जो आपको फिल्में देते हैं, वो सोसायटी का ही तो रिफ्लेक्शन है। हमें उसे बनाने में बहुत मेहनत लगती है। पूरी कोशिश होती है कि अपना बेस्ट दें। फिल्म रूपी बच्चा बनाने में हमें दो साल लगते हैं। हम अपने बच्चे को आपके सामने रख देते हैं और पूछते हैं कि पसंद आया कि नहीं.. आप प्लीज थप्पड़ मत मारो। मैं उम्मीद करती हूं कि लोग ज्यादा से ज्यादा थिएटर जाएं और फिल्मों को देंखे। सलाम वेंकी भी एक अच्छी फिल्म है और सही वक्त पर आ रही है। उसका जो मेसेज है, वो सबको समझने की जरूरत है। जिंदगी लंबी नहीं बड़ी होनी चाहिए, ये हमने कोविड के बाद ही तो सीखा है। अब तो लोग मोमेंट में जीने लगे हैं, जो भी करना है अब कर लो, पता नहीं कल हो न हो।


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