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    मेरी रेस हीरोइन से नहीं हीरो से

    By Super
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    एशिया की सबसे सेक्सी लेडी का खिताब जीत चुकी बिपाशा यूं तो काफी फिल्मों में सेक्स बॉम के रूप में नज़र आई हैं मगर फिल्म 'रेस" में उन्होंने अपने लिए नया किर्तीमान स्थापित किया है. इस फिल्म में वह एक मॉडल बनी है जो अपनी खूबसूरती से हर किसी को जीतने का हौंसला रखती है.

    आपके इतने खूबसूरत हेयर स्टाइल का क्या राज़ है ?

    दरअसल मैं खुद को एक जैसे देख देखकर ऊब जाती हूं. जब मैं स्कूल में थी तो मैं देखती थी कि कुछ लडकियों के बाल छोटे है और उन्होंने उसमें खूबसूरत से हेयर बैंड पहने होते थे. मगर मुझे मेरी इच्छा के विरुद्ध दो लंबी चोटी बनानी पडती थी. मैं अपनी मां से जब भी कहती अपने बाल कटवाने के लिए वह कभी नहीं मानती. मुझे लगता है अभी मैं उसकी खुन्नस निकाल रही हूं क्योंकि अब वह सिवाय कुढने के मुझे कुछ नहीं कह सकती.

    हमनें सुना है 'रेस" में आपका किरदार कुछ ग्रे शेड लिए हुए है ?

    सच कहूं तो इसमें सभी का किरदार ग्रे शेड लिए हुए है. दरअसल ये कहानी दो भाइयों की हैं जो एक दूसरे से आगे निकलने की कोशिश में लगे रहते हैं. उनके बीच काफी परेशानियां रहती है. इस फिल्म में मेरा किरदार एक मॉडल का है जो यह मानती है कि वह जिसे चाहे अपने कदमों पर झुका सकती है. उन दो भाइयों में से एक भाई से वह प्यार करती है लेकिन परिस्थितियां कुछ ऐसी बन जाती है कि वह दूसरे भाई की महबूबा बन जाती है. इस फिल्म का पटकथा लेखन इतनी खूबसूरती से किया गया है कि कौन सा किरदार क्या चाहता है वह अंत तक समझ में नहीं आता है. आधी फिल्म के दौरान एक कत्ल हो जाता है और दो नए किरदारों से दर्शकों का परिचय करवाया जाता है. वह दो नए किरदार है अनिल कपूर और समीरा रेड्डी का, जो इस कत्ल की छान बीन करते हैं.

    इस फिल्म में नायिकाओं के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा ?

    मुझसे हमेशा यह सवाल पूछा जाता है. मैं आपको बता दूं मेरी हमेशा यह कोशिश रहती है कि मेरी रेस हीरोइन की बजाय हीरो से हो. मैने अब तक जितनी भी मल्टीस्टारर्र फिल्में की है उनमें दर्शकों ने मेरे काम को काफी सराहा है फिर भले ही मेरा रोल कितना ही छोटा क्यो न रहा हो. मेरी कोशिश हमेशा यह रहती है कि मैं अपना काम ठीक से करूं. मुझे खुशी है कि मेरे को स्टार, जिनमें हीरोइन के साथ साथ हीरो भी शामिल हैं, भी काफी मेहनत करते हैं. जब तक फिल्म में सबका योगदान बराबर नहीं रहेगा तब तक फिल्म अच्छी बन ही नहीं सकती है.

    तो क्या नायिकाओं के साथ किसी तरह की कैट फाइट नहीं हुई ?

    कम से कम आप तो यह मत कहिए. नायिकाओं से ज़्यादा नायक परेशानियां उत्पन्न करते हैं. दरअसल यह हमारी परेशानी है कि हम हमेशा लडकों का ही साथ देते हैं. अगर लडके की गलती होगी तब भी हम लडकियों की ही गलती निकालते हैं. मुझे खुशी है मैं उन महिलाओं की तरह नहीं हूं जो अपनी कौम को बदनाम करे. मै हमेशा लडकियों का साथ देना पसंद करती हूं. जहां तक कैटरिना और समीरा की बात है आपको जानकर हैरानी होगी हम जहां जाते थे एक साथ जाते थे.
     
    जब आप नई थी तब भी अब्बास मस्तान के साथ काम किया था अब आप इतनी सफल होने के बाद एक बार फिर अब्बास मस्तान के साथ काम कर रही हैं. अपने प्रति उनके स्वभाव में किसी तरह का कोई बदलाव पाती हैं ?

    जी नहीं. जितना प्यार वह मुझे पहले करते थे उतना ही प्यार वह आज भी मुझसे करते हैं. मैंने उनके साथ अपनी फिल्मी पारी की शुरुआत की थी सो वह मुझे अपने बच्चे की तरह प्यार करते हैं. वह मुझे इसलिए नहीं चाहते क्योंकि मैं बहुत अच्छी अदाकारा हूं बल्कि इसलिए चाह्ते हैं क्यंकि मैं बहुत अच्छी इंसान हूं. फिर भी जहां तक उनके बदलने की बात है तो मैं यही कहना चाहूंगी कि वह समय के साथ आगे बढते जा रहे हैं. वह आज भी पूराने एक्टिंग स्कूल के टीचर की तरह है. साथ ही जिस तरह वह किसी भी विषय वस्तु के साथ डिल करते हैं वह काबिले तारीफ है. मेरे अनुसार पूरे भारत में अब्बास मस्तान एक मात्र निर्देशक हैं जो थ्रिलर फिल्मों में माहिर हैं.

    इन दिनों काफी कम फिल्में करने की वजह ? क्या अपनी भलाई के मद्देनज़र आप ठहरकर काम कर रही हैं ?

    इसमें अच्छे बुरे की कोई बात नहीं है. मुझे तो सब अच्छा लगता है मगर ज़रूरी नहीं है कि वह सबको अच्छा लगे. मैं हर रोज़ काम करना ज़रूरी नहीं समझती. अपने करियर के शुरूआती दिनों में पूरे तीन साल तक मैंने हर रोज़ काम किया है. मगर उसका नतीजा यह निकला कि मैं बीमार हो गई, अपने परिवार को समय नहीं दे पाई. उन दिनों मेरा संतुलन काफी बिगड गया था. मगर अबके जो पिछले तीन साल है वह काफी अच्छी तरह से गुज़रे. मुझे लगता है इन तीन सालों में मैं काफी परिपक्व हो गई हूं साथ ही अपनी गलतियों से भी मैंने काफी कुछ सीखा है.

    शुरूआती दौर में 'अजनबी" के दौरान नकारात्मक भूमिका लेते समय और इस फिल्म में नकारात्मक भूमिका लेते समय क्या सोच थी ?

    'अजनबी" के दौरान जब मैंने नकारात्मक भूमिका ली थी तब लोग मुझे पागल समझते थे. दरअसल उस समय मैं मॉडलिंग से काफी ऊब चुकी थी और तभी मुझे एक ऐसी फिल्म का ऑफर मिला जिसमें मेरा किरदार नकारात्मक था साथ ही यह विषय फिल्म इंडस्ट्री में काफी बोल्ड विषय था. किसी भी न्यू कमर के लिए शुरूआती दौर में नकारात्मक भूमिका लेना घाटे का सौदा होता है. मगर बॉलीवुड में हीरोइन बनने का मेरा कोई इरादा नहीं था मैं कुछ नया करना चाहती थी सो मैंने यह फिल्म अपना ली. मगर जब फिल्म में मेरे अभिनय की तारीफ हुई और 'राज़" मैंने की उसके बाद से फिल्मों में मेरी दिलचस्पी काफी बढ गई. आज भी मुझे लगता है कि अगर मैं नकारात्मक भूमिकाओं की तरफ आकर्षित होती हूं तो इसका मतलब यह है कि मैं ऐसी नहीं हूं और ना होंउंगी. "जिस्म" करने की भी यही वजह थी. इसे मैं चुनौती की तरह लेती हूं.

    इस तरह से परकाया में प्रवेश लेना आपके लिए कैसे संभव होता है ?

    सबसे पहले इसका क्रेडिट मैं निर्देशक को दूंगी. साथ ही अपने अंदर निहित कलाकार को दूंगी. मैं कभी कलाकार नहीं बनना चाहती थी. मगर जब मैंने इस क्षेत्र में कदम रखा तो कुछ ऐसी चीज़ थी जो मुझे प्रेरित करती रहती थी. आज मैं देखती हूं अधिकतर लोग अभिनय के लिए पूरी तरह से तैयार होकर आते हैं. मुझे लगता है अच्छे कलाकार की कोई परिभाषा नहीं होती और ना ही कोई अच्छा कलाकार बना सकता है. अच्छा कलाकार बनने का हौंसला हमारे अंदर होता है यह हम पर है कि उसे हम कैसे बाहर निकालते हैं.

    'जिस्म" के बाद आपकी छवि एक सेक्सी हीरोइन की बन गई थी. 'कॉर्पोरेट", 'अपहरण" और अब 'पंख" से क्या उस इमेज को बदलने की कोशिश कर रही हैं ?

    सबसे पहली बात तो मैं आपको बता दूं कि 'अजनबी" से ही मेरी इमेज सेक्सी हीरोइन की हो गई थी. इस इमेज को मैंने कभी बदलने की कोशिश नहीं की. मुझे अलग अलग तरह की भूमिकाएं निभाना पसंद है सो जितने अवसर मिलते हैं उनका मैं फायदा उठाती हूं.

    अपनी सभी फिल्मों में आप एक आत्मविश्वासी महिला का चरित्र काफी खूबसूरती से निभाती हैं. सो यह बताइए किरदार आपको चुनते हैं या आप किरदार को ?

    नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं है. मैंने कुछ बकवास फिल्में भी की है जिनमें मैं कहीं से भी आत्मविश्वासी महिला के रूप में नज़र नहीं आ रही हूं. उनमें दो साल पहले की 'बरसात" और 'हमको दीवाना कर गए" शामिल हैं. इससे आप जान सकती हैं कि मैं भी गलतियां करती हूं.

    तो फिर 'धन धना धन गोल" के बारे में क्या कहेंगी ?

    मुझे यह फिल्म पसंद है. साथ ही इसमें मेरा किरदार भी मुझे बहुत पसंद आया. इसमें मेरा किरदार अब तक के सारे किरदारों से अलग रहा है और इसे फिल्म समीक्षकों ने भी माना. मुझे फिल्म 'गोल" पर गर्व है.

    क्या यह सच है कि 'बिल्लो रानी" के बाद आपने आइटम सॉग से तौबा कर ली है ?

    सबसे पहले तो मुझे कोई यह समझाए कि आइटम सॉग किसे कहते हैं. मुझे लगता है जिस तरह पांच साल पहले सेक्सी को लोग अच्छा नहीं समझते थे और आज हर कोई सेक्सी दिखने और बनने की कोशिश में लग हुआ है. उसी तरह आइटम सॉग की शुरूआत भी काफी बुरी तरह से हुई होगी मगर अब यह काफी सम्मानित हो गया है क्योंकि अब इसके साथ शाहरुख खान का नाम जुड गया है. जहां तक आइटम सॉग से तौबा करने की बात है तो मैंने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है. अगर किसी अच्छे बैनर की अच्छी फिल्म में अच्छा गीत हो, उसे अच्छे से फिल्माया जाए तो मुझे आइटम सॉग करने में कोई परहेज़ नहीं होगा.

    'राज़ 2" बनने जा रही है क्या कहना चाहेंगी ?

    यह फिल्म एक साल से बन रही है और हमेशा मुझसे यह सवाल पूछा जाता है. मुझे तो कोई ऑफर नहीं आया सो मैं अकेले कैसे 'हां" और 'नहीं" बोलूं. इसका सही जवाब आपको मुकेश भट्ट ही दे सकते हैं.

    रज़ा मलाल की अंग्रेज़ी फिल्म 'क्विक सिप मी ए ब्राइड" इसके बारे में बताइए ?

    अभी तक तो मुझे अधिक नहीं पता इसके बारे में लेकिन हां कुछ दिनों बाद मैं आपको ज़रूर बताऊंगी. इसके बारे में मैं सिर्फ यह बता सकती हूं कि यह ब्रिटिश प्रोडक्शन हाउस की फिल्म है जो पूरे विश्व में रिलीज़ की जाएगी. 

    आपकी बंगाली फिल्म के बारे में बताइए ?

    रितुपर्णो घोष की फिल्म 'सब चरित्र काल्पनिक" मेरी आने वाली बंगाली फिल्म है. इसकी शूटिंग पूरी हो चुकी है. यह एक ऐसी लडकी की कहानी है जो लंदन की पली बढी है और बंग्ला साहित्य से उसका ज़रा भी सरोकार नहीं रहता है. इत्तिअफाक से उसकी शादी एक बंगाली कवि से हो जाती है. बांग्ला साहित्य से ज़रा भी सरोकार न होने के कारण उसके वैवाहिक जीवन में कई परेशानियां आ जाती है. इसी दौरान उसके पति की मृत्यु हो जाती है और बांग्ला साहित्य के प्रति उसका आकर्षण बढ जाता है.

    आपकी आने वाली फिल्म 'मिस्टर फ्रॉड" और 'पंख" के साथ अपनी आने वाली फिल्मों के बारे में बताइए ?

    मिस्टर फ्रॉड" काफी दिनों से अटकी हुई है और मुझे बहुत दुख हो रहा है कि इतनी अच्छी फिल्म रिलीज़ नहीं हो पा रही है. इसमें स्लैप स्टिक कॉमेडी नहीं बल्कि सिच्यूएशनल कॉमेडी है. यह पहली ऐसी कॉमेडी फिल्म है जिसे करने में मुझे खुद काफी मज़ा आया. आशा करती हूं अजय देवगन और संजय दत्त इस फिल्म को पूरा करने में मदद करेंगे. 'पंख" संजय गुप्ता की एक आर्ट फिल्म है. इस फिल्म में मैं एक युवा लडके के लिए अपनी प्रतिरूप बनी हूं जो मुझे देखकर एक बाल कलाकार बन जाता है. इस फिल्म में मेरा किरदार काल्पनिक है. इसके अलावा मैं यशराज की एक फिल्म कर रही हूं जिसमें मेरे साथ रणबीर कपूर हैं. यह एक रोमांटिक कॉमेडी फिल्म है और इसके निर्देशक सिद्धार्थ आनंद हैं.

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