मेरे पास फिल्म बनाने की ऊर्जा नहीं: फारुख शेख

एक तरफ फारुख के साथ के अभिनेताओं नसीरुद्दीन शाह और दीप्ति नवल ने खुद को निर्देशन की ओर मोड़ लिया मगर फारुख टीवी की तरफ मुड़ गए। एक साक्षात्कार के दौरान शेख ने कहा कि पिछले साल उन्होंने एक फिल्म 'लाहौर' में काम किया था। वह फिल्म तीन-चार सप्ताह तक सिनेमा हॉल में चली उसके बाद उसका 'राम नाम सत्य हो गया'। लेकिन इस फिल्म में उनके काम को सराहा गया और उनके अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। इसलिए वह अपने सृजनात्मक जीवन से सुखी हैं।
शेख हाल ही में सोनी टीवी के सीआईडी गैलेंट्री अवार्ड्स के चयन मंडल में शामिल थे। अपने लगभग 35 साल लम्बे फिल्मी जीवन में उन्होंने फिल्म जगत के दिग्गजों के साथ काम किया है। उन्होंने सत्यजीत रे की 'शतरंज की खिलाड़ी', हृषिकेश मुखर्जी की 'रंग बिरंगी', यश चोपड़ा की 'नूरी' और 'फासले' सई परांजपे की 'कथा' और 'चश्मे बद्दूर' जैसी फिल्मों में काम किया है।
उन्होंने 1990 के दशक में टेलीविजन धारावाहिकों से नाता जोड़ लिया और उसके बाद फिल्मों में कभी कभार ही काम किया।
फिल्म 'लाहौर' में हालांकि उनके अभिनय को काफी सराहना मिली और उन्हें सहयोगी अभिनेता के तौर पर राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया।


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