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    Exclusive: आर्मी का सपना टूटा, बिना गॉडफादर रोहतक से‌ मुंबई और अब 'पाताल लोक' पहुंचे जयदीप अहलावत

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    लॉकडाउन के चलते OTT प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट की भरमार है। कुछ फिल्में और वेब सीरीज तो इतनी शानदार है कि बार बार देखी जा सकती हैं। ऐसे में एक वेब सीरीज काफी चर्चा में है जिसका नाम है 'पाताल लोक'। अनुष्का शर्मा द्वारा प्रोड्यूस, जयदीप अहलावत, नीरज काबी और गुल पनाग द्वारा सजी। वेब सीरीज अमेजन प्राइम पर उपलब्ध है। इस वेब सीरीज के सबसे बड़े हीरो जयदीप अहलावत से फिल्मीबीट हिंदी को खास बातचीत का मौका मिला।

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    जयदीप अहलावत ने वेब सीरीज 'पाताल लोक' से लेकर अपनी निजी जिंदगी से जुड़े तमाम सवालों को जवाब दिए। शांत और एकदम सरल एक्टर जयदीप अहलावत ने बताया कि कैसे ये वेब सीरीज मौजूदा समय में एकदम सार्थक सीरीज है। इसे क्यों पसंद किया जाना चाहिए और क्यों नहीं। पढ़िए जयदीप अहलावत के संग बातचीत।

    लॉकडाउन में कैसे वक़्त काट रहे हैं ?

    लॉकडाउन में कैसे वक़्त काट रहे हैं ?

    वही जो आम इंसान कर रहा है। घर पर रह रहे हैं। इंटरनेट और फिल्मों का सहारा है। बीच में थोड़ी बहुत किताबे पढ़ लेते हैं। जब तक ठीक नहीं होता, घर पर ही रहना है।

     रोहतक से मुंबई का सफर और आप अपने रियल किरदार के बारे में बताएं ताकि आपके फैंस और करीब से आपको जान पाएं ?

    रोहतक से मुंबई का सफर और आप अपने रियल किरदार के बारे में बताएं ताकि आपके फैंस और करीब से आपको जान पाएं ?

    मैं हरियाणा से आता हूं। यहीं रोहतक से पढ़ाई की। मैंने इसके बाद एफटीआईआई से एक्टिंग के गुर सीखे। फिर 2009 से 'खट्टा मिट्ठा' से अपने करियर की शुरुआत की। रही बात फिल्मों की तो मैंने ग्रेजुएशन के बाद सोचा कि मैं एक्टिंग के क्षेत्र में जाउंगा। वरना इससे पहले मैं आर्मी में जाने का सपना देखता था। ये सपना टूट गया और फिल्मों की दुनिया में जगह मिली।

     पाताल लोक में आपका किरदार काफी दिलचस्प है। आपको इस किरदार का सबसे मजबूत पहलू क्या लगा?

    पाताल लोक में आपका किरदार काफी दिलचस्प है। आपको इस किरदार का सबसे मजबूत पहलू क्या लगा?

    इस किरदार की सबसे खूबसूरत बात है कि ये कॉमनमैन के स्ट्रगल से जुड़ा है। जोकि तमाम परिस्थितियों से जूझ रहा है। यही बात इस किरदार को ओरों से अलग बनाती है। अपनी जॉब के चलते हाथीराम चौधरी (पाताल लोक में जयदीप का किरदार) कुछ अलग कर नहीं पाता। कॉमन मैन है लेकिन कुछ हासिल नहीं कर पाता। वह हर तरफ से प्रेरणाहीन है।

    सस्पेंस सीरीज को लेकर दर्शकों में उम्मीद काफी बढ़ जाती है, आपको कैसे रेस्पॉन्स की उम्मीद है?

    सस्पेंस सीरीज को लेकर दर्शकों में उम्मीद काफी बढ़ जाती है, आपको कैसे रेस्पॉन्स की उम्मीद है?

    जिस तरह टीजर, प्रोमो और ट्रेलर को पसंद किया है, उस हिसाब से अच्छे रिस्पॉन्स की उम्मीद है। ट्रेलर सिर्फ तीन मिनट का है जिसमें वेब सीरीज का केवल एक छोटा सा अंश है, इसे दर्शकों ने काफी पसंद किया है। वेब सीरीज के नौ एपिसोड है जिनमें दर्शकों को अलग अलग पड़ाव देखने को मिलेंगे। ये सिर्फ क्राइम बेस्ड सीरीज नहीं, इसमें समाज से जुड़ी कई विषय हैं। ये वास्तव में समाज का आईना है। अलग-अलग समाज, रईस लोग, आम आदमी और दबे कुचले तबके को भी दर्शाया गया है।

    आपका आज तक का पसंदीदा रोल कौन सा है?

    आपका आज तक का पसंदीदा रोल कौन सा है?

    वैसे तो मुझे 'राज़ी' का किरदार खालिद मीर, 'वासेपुर' का शाहिद खान, 'कमांडो' का अमृत...और भी कई हैं जिन्हें मैं काफी पसंद करता हूं। लेकिन एक चुनना है तो मैं 'पाताल लोक' का हाथीराम चौधरी के रोल चुनुंगा जिसकी यात्रा फिलहाल जारी है।

    पाताल लोक को अनुष्का प्रोड्यूस कर रहीं हैं। आपका शो से जुड़ना कैसे हुआ और कैसा आपका एक्सपीरिंयस रहा?

    पाताल लोक को अनुष्का प्रोड्यूस कर रहीं हैं। आपका शो से जुड़ना कैसे हुआ और कैसा आपका एक्सपीरिंयस रहा?

    मेरे पास इस वेब सीरीज का ऑफर क्रिएटर और राइटर सुदीप शर्मा और कर्णेश शर्मा (अनुष्का शर्मा के भाई) के ओर से आया था। इस सीरीज की राइटिंग बहुत अच्छी थी जिसे मना करने का सवाल ही नहीं उठता। रही बात प्रोडक्शन की तो अनुष्का जी पहले ही सब्जेक्ट आदि पहले ही फाइनल कर चुकी थीं। इस प्रोजेक्ट का हिस्सा होना मेरे लिए शानदार रहा।

    Lockdown की वजह से ओटीटी को काफी ऑडिएंस मिल रही है। आपको लगता है वेब सीरीज की रिलीज के लिए यह उपयुक्त समय है ?

    Lockdown की वजह से ओटीटी को काफी ऑडिएंस मिल रही है। आपको लगता है वेब सीरीज की रिलीज के लिए यह उपयुक्त समय है ?

    ऐसा नहीं था कि हमनें लॉकडाउन में ही सीरीज रिलीज करने का सोचा था लेकिन इस समय दूसरा कोई चारा ही नहीं है। लॉकडाउन का समय है और टीवी पर भी रि-टेलिकास्ट प्रोग्राम आ रहे हैं तो ऐसे में इंटरनेट पर जब चाहे दर्शक वेब सीरीज व फिल्में देख सकते हैं।

    हाल ही में फ़िल्म राज़ी ने 2 साल पूरे किए हैं, उस फिल्म से जुड़ी कोई याद शेयर करना चाहेंगे?

    हाल ही में फ़िल्म राज़ी ने 2 साल पूरे किए हैं, उस फिल्म से जुड़ी कोई याद शेयर करना चाहेंगे?

    'राज़ी' फिल्म बहुत स्पेशल फिल्म है और मेरा शाहिद मीर का किरदार जिसे मेघना गुलजार जी ने लिखा, वह भी बेहद खास है। फिल्म ने शूट के दौरान भी खूब हमें रोलाया था। 'राज़ी' फिल्म एक इमोशनल जर्नी रही है। लेकिन मेरे साथ हमेशा ही एक चीज जुड़ी रहेगी। वह है, मेरा शूट का पहला दिन। उस दिन गुलजार साहब और विशाल भारद्वाज जी आए थे। मैंने पहला शॉट ही गुलजार साहब के पैर छूककर दिया। मुझे उनका आशीर्वाद मिला और मेरे लिए कभी न भूलने वाला दिन था। वहीं विशाल भारद्वाज जी मेरे फेवरेट डायरेक्टर हैं।

    आर्मी से एक्टिंग की तरफ किस तरह आप ने अपने करियर को मोड़ा?

    आर्मी से एक्टिंग की तरफ किस तरह आप ने अपने करियर को मोड़ा?

    ये एक पल नहीं होता ये एक प्रक्रिया होती है। ये वो समय होता है जब आप सोच में होते हैं। आप खुद को और खुद की राहे तलाशते हैं। कॉलेज के दौरान मैं स्टेज पर खूब जाता था। मैंने थिएटर और खूब डांस किया है। लेकिन करियर के तौर पर मैंने कभी थिएटर नहीं किया था। जब इस बारे में सोचा तो मैंने थिएटर को और सीरियस लेना शुरू किया। एक दो फेलियर जो रास्ते में आ रहे थे इसके बाद मुझे राह भी मिल गईं। ये वो समय होता है जब आप उसे फेस करते हो और उसे बाहर निकलते हैं।

    बिना गॉडफादर इंडस्ट्री में पहला चांस मिलना और आगे बढ़ना कितना मुश्किल रहता है?

    बिना गॉडफादर इंडस्ट्री में पहला चांस मिलना और आगे बढ़ना कितना मुश्किल रहता है?

    हां, बहुत मुश्किल होता है। सबसे बड़ी बात ये होती है कि आपको ये नहीं पता होता कि आपको क्या करना है। कैसे लोगों से मिलना है और किन से काम मांगना है। जब आपका कोई गॉडफादर न हो तो ये सफर और मुश्किल हो जाता है। लेकिन जब शिद्दत से आते हैं और कुछ करना चाहते हैं तो जरूर सफल होते हैं। आजकल वैसे भी कई प्लेटफॉर्म हैं। टीवी से लेकर डिजिटल और फिल्में। इसीलिए काम की चाह होनी जरूरी है।

    आपने अनुराग कश्यप और धर्मा प्रोडक्शन दोनों के साथ काम किया। दोनों के स्टाइल में स्विच करना कितना आसान या मुश्किल था?

    आपने अनुराग कश्यप और धर्मा प्रोडक्शन दोनों के साथ काम किया। दोनों के स्टाइल में स्विच करना कितना आसान या मुश्किल था?

    बिल्कुल भी मुश्किल नहीं था। करण सर के प्रोडक्शन में फिल्म 'राजी' बनी जिसे मेघना गुलजार ने बनाया। करण जौहर ने अपना नाम देने का योगदान दिया और इससे जुड़े। लेकिन राजी को करण जौहर की नहीं, मेघना गुलजार की फिल्म कहेंगे।

    ऋषि कपूर और इरफन खान जैसे दो दिग्गज इंडस्ट्री ने खो दिए, आप क्या कहना चाहते हैं?

    ऋषि कपूर और इरफन खान जैसे दो दिग्गज इंडस्ट्री ने खो दिए, आप क्या कहना चाहते हैं?

    ऐसा होना, हमारे लिए बहुत बुरा है। स्टार की तरह तो नहीं लेकिन हमनें स्टूडेंट के तौर पर ऋषि कपूर और इरफान खान को देखा है। जो जगह खाली हुई है उसे कोई नहीं भर नहीं सकता। हम इन सितारों को देखते हुए इंस्पायर हुए और बड़े हुए। ये सिनेमा को बहुत बड़ा नुकसान है।

    English summary
    Exclusive Inerview: paatal lok actor jaideep ahlawat army dream how became actor
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