Exclusive Interview: कोई भी स्टार बनकर पैदा नहीं होता, पैदा एक्टर होते हैं- के के मेनन

ओटीटी की दुनिया इन दिनों ऐसे अभिनेताओं को भी सफलता का आसमान दिखा रही है जो कि अभिनय के दुनिया के दिग्गज माने जाते हैं। मनोज बाजपेयी के बाद इस फेहरिस्त में नया नाम जुड़ा है के के मेनन का। मनोज बाजपेयी जहां श्रीकांत तिवारी के किरदार में फैमिली मैन बन चुके हैं।

वहीं 'स्पेशल ऑप्स 1.5' के हिम्मत सिंह की दमदार भूमिका से के के मेनन ने एक बार फिर से अभिनय की सीढ़ी पर ऊंचाई हासिल की है। Filmibeat Hindi फिल्मीबीट हिंदी से खास बातचीत में के के मेनन ने स्पेशल ऑप्स 1.5 में हिम्मत सिंह की जरूरत के साथ यह भी बताया कि कैसे फिल्म बिजनेस में उनका ध्यान हमेशा फिल्मों पर रहा है बिजनेस पर नहीं।

Kay Kay Menon

सफल लोकप्रिय अभिनेताओं में आपका नाम शामिल है। लोकप्रियता की सीढ़ी पर क्या अब फिल्मों का चुनाव दर्शकों की पसंद के हिसाब से कर रहे हैं?

जी नहीं। बतौर दर्शक फिल्म का चुनाव करना मेरी प्राथमिकता नहीं है। मैं हमेशा इसी सोच के साथ काम करता हूं कि अपना काम जहां से शुरू करना है, वहीं से करना चाहिए। जरूरी है कि आप उसे अपने तरीके से करे। क्रिकेट के तरीके से समझाऊं तो जरूरी है कि मैं अगर बाउंड्री पर देखूं चौका लगाने के लिए और गेंद को ना देखूं तो आऊट हो जाऊंगा। मेरे लिए किसी भी फिल्म का चुनाव ठीक ऐसा ही है। सबसे पहले हमारा काम होता है कि कलाकार के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभाना। कहानी को पर्दे पर उतारना। उस पर एकाग्रचित होकर हम कलाकार काम करते हैं। उसके बाद फिल्म दर्शकों के पास जाती है और फिर दर्शक उसे पसंद करते हैं या फिर नहीं करते हैं।

स्पेशल ऑप्स 1.5 की कहानी में आपकी दिलचस्पी थी या फिर नीरज पांडे के बेहतरीन लेखन पर विश्वास था?

निर्देशक नीरज पांडे हमारे पुराने दोस्त हैं। नीरज पांडे का लेखन भी बहुत खूबसूरत है। तो वह सारा कारण एक साथ मिलकर मैंने स्पेशल ऑप्स 1.5 में हिम्मत सिंह की भूमिका को साकार किया है। मैं फॉर्मूला फिल्म नहीं करता हूं। स्पेशल ऑप्स 1.5 में हिम्मत सिंह के जरिए हम एक इंसान को पेश कर रहे हैं। फिर चाहे वो राॅ में हो या सीबीआई में हो कोई फर्क नहीं पड़ता है। एक कलाकार का धर्म होता है कि वह स्क्रीन पर एक इंसान को सबसे पहले पेश करे।तो वही कोशिश थी, स्पेशल ऑप्स में हमने वही कोशिश की है।हम काम करने वाले लोग है। अब आप शिल्पकार से पूछोगे कि कला होने के बाद कैसा लगा? फिर उसमें क्या कहना, जो चीज है, हम उस पर काम कर चुके है। यह दर्शकों पर निर्भर करता है कि उन्हें स्पेशल ऑप्स 1.5 कैसी लगी है।

क्या आप मानते हैं कि सिनेमा में बीते कुछ सालों से कंटेंट किंग हो गया है, बड़े स्टार्स की फिल्म हो या नहीं इससे फर्क कम पड़ता है?

यह पहले से होना चाहिए था। मैंने कभी यह गौर नहीं किया। यह हो रहा है तो अच्छी बात है। लेकिन इतना है कंटेंट को ही हमेशा किंग होना चाहिए।

नए दौर के सिनेमा के साथ एक्टर के तौर पर आपने खुद में किसी तरह के बदलाव लाया है?

हम तो रोज सीखते हैं। मेरा सीखना जारी रहता है। हर बार काम में कुछ ना कुछ सीखते हैं। जिस दिन सीख खत्म हो जाएगी उस दिन आपका व्यवसाय भी खत्म हो जाएगा। खुद में बतौर एक्टर सुधार करते रहना चाहिए।

आपका हमेशा से फोकस एक्टर बनने पर रहा है ना कि स्टार बनने पर, क्यों?

आप यह बोल रहे हैं कि मैं क्रिकेटर बनने चला था तो मैं बिजनेस मैन क्यों नहीं बना। बस वही है क्रिकेट को बल्ला खेलना और बॉलिंग करना आना चाहिए। वही कर रहे हैं हम। जो पेशा है उसी को निभा रहे हैैं। एक्टर का मतलब है एक्टिंग करना। बाकी गलत कुछ नहीं है।

आपके लिए स्टारडम के मायने क्या हैं?

स्टारडम के मायने क्या है मुझे नहीं पता है लेकिन इतनी जानकारी है कि तारों को जमीन पर लाना मुश्किल है। जरूरी है कि स्टार जमीन पर पाए नहीं जाते हैं। जब कोई अपने आप को स्टार बोलता है तो अटपटा सा लगता है।मैंने कभी जमीन पर कोई स्टार देखा नहीं। जरूरी है कि आप जमीन पर रहें। आपको काम अच्छे से करते रहना चाहिए। मेरे ख्याल से स्टार बनाते हैं लोग, कोई स्टार पैदा नहीं होता। कलाकार पैदा होते हैं। स्टार को बनाया जाता है।

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