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EXCLUSIVE: ''फ़िल्म रिलीज़ से पहले मुझे धमकाने का कोई फायदा नहीं....''

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फिल्म रिलीज से पहले विवाद होना अब हैरान करने वाली बात नहीं लगती। उड़ता पंजाब से लेकर लिपस्टिक अंडर माई बुर्का और इंदु सरकार.. कई फिल्में इस खेमे में शामिल हो चुकी हैं। ताजा विवाद है मधुर भंडारकर की आगामी फिल्म 'इंदु सरकार' को लेकर। इस फिल्म में 1975 में भारत में हुए आपातकाल के इर्द गिर्द कहानी बुनी गई है।

जाहिर है किसी काले दिन को सामने लाने की कोशिश की जाएगी जो मुद्दा बनेगा ही। 'इंदु सरकार' को लेकर भी राजनीतिक पार्टियों में तिममिलाहट शुरु हो चुकी है। कुछ लोगों ने निर्देशक के पुतले जलाए.. तो कुछ ने मुंह काला करने की धमकी दे डाली। 

बहरहाल, इन सब विवादों के बीच उस निर्देशक का क्या सोचना है, जिसकी ये फिल्म है.. यह जानने के लिए फिल्मीबीट ने मधुर भंडारकर से खास बातचीत की। इंटरव्यू के दौरान निर्देशक ने खुलकर अपना पक्ष रखा।

यहां पढ़ें इंटरव्यू के कुछ प्रमुख अंश- 

फिल्म को लेकर इतनी विवाद हो रही है.. आपकी क्या सोच है इस वक्त!

फिल्म को लेकर इतनी विवाद हो रही है.. आपकी क्या सोच है इस वक्त!

मुझे लगता है यह सब बेकार का विवाद बनाया जा रहा है। मेरी फिल्म इंदु के बारे में है। जो फ़िल्म की मुख्य किरदार है। वह एक अनाथ है और उसकी शादी एक नौकरशाह से हो जाती है, जो सरकार के लिए काम करता है। कहानी है उनके विचारधाराओं के टकराव की, जब देश में इमरजेंसी लागू होती है।

लेकिन यह सारा विवाद जो है, वह सिर्फ पोस्टर और ट्रेलर को देखकर किया जा रहा है। मुझे लगता है पहले पूरी फिल्म देख लेनी चाहिए।
फ़िल्म रिलीज़ से पहले मुझे धमकाने और कानूनी धमकी देने का कोई फायदा नहीं।

मेरी फिल्म पहले सेंसर बोर्ड देखेगी, उसके बाद ही कोई और।

क्या इमरजेंसी पर जिसने किताबें लिखी हैं या जिन्होंने डॉक्यूमेंट्री बनाये हैं, उन्हें भी धमकी दी गई थी कि पहले हमें पढ़ाओ या दिखाओ। नहीं ना, फिर मेरी फिल्म के साथ ही विवाद क्यों।

लगभग 40 सालों के बाद इमेरजेंसी पर फिल्म क्यों!

लगभग 40 सालों के बाद इमेरजेंसी पर फिल्म क्यों!

मैं हमेशा रियलिस्टिक फ़िल्म बनाना पसंद करता हूँ। लगभग 17 साल से मैं फ़िल्म इंडस्ट्री में हूँ। इस फ़िल्म की शुरुआत बस ऐसे हुई कि मैं इमरजेंसी पर एक फ़िल्म बनाना चाहता था। या यूं कह लें कि मैं 70s के समय पर फ़िल्म बनाना चाहता था। लेकिन अपनी कहानी के साथ। इसीलिए इंदु सरकार कोई बॉयोपिक नहीं है, ना ही डॉक्यूमेंट्री है।

क्या आपकी फिल्म में किसी राजनीतिक पार्टी पर तंज कसा गया है!

क्या आपकी फिल्म में किसी राजनीतिक पार्टी पर तंज कसा गया है!

नहीं.. फिल्म में किसी पर निशाना नहीं साधा गया है। लेकिन जाहिर है जब फ़िल्म उस समय को दिखा रही है तो उस वक़्त जो भी सरकार थी, उसे भी बैकड्रॉप में रखा गया है। लेकिन मेरा यह सवाल है कि जब समय पर बनी डॉक्यूमेंट्री और किताबों पर कोई सवाल नहीं उठाया गया तो मेरी फिल्म पर क्यों, जो कि पूरी तरह से उस मुद्दे को भी नहीं दिखा रही है।

Indu Sarkar of Madhur Bhandarkar to release on July 21 | FilmiBeat
फिल्म में कृति कुल्हारी का आना कैसे हुआ!

फिल्म में कृति कुल्हारी का आना कैसे हुआ!

मैंने जैसे ही पिंक देखी, मैंने तय कर लिया कि यही इंदु है। कीर्ति ने इस फ़िल्म पर बहुत ही मेहनत की है और अब मुझे उन पर गर्व है। यह किरदार निभाना किसी भी एक्ट्रेस के लिए काफी कठिन होता। कीर्ति के अलावा नील नितिन मुकेश और अनुपम खेर ने भी दमदार किरदार निभाया है।

ट्रेलर और पोस्टर्स को काफी पॉजिटिव रिस्पॉस मिले हैं.. आपका क्या कहना है!

ट्रेलर और पोस्टर्स को काफी पॉजिटिव रिस्पॉस मिले हैं.. आपका क्या कहना है!

मैं बहुत खुश हूं क्योंकि ट्रेलर ने पूरे भारत में एक नई लहर लायी है। लोग आज इमरजेंसी के बारे में जानना चाहते हैं। यह फ़िल्म आज की पीढ़ी के लिए एक summary की तरह होगी। जिससे वह जान पाएंगे कि उस वक़्त का माहौल, उस वक़्त की सोच क्या थी।

फिल्म बनाने के दौरान किस तरह की चुनौतियां सामने आईं!

फिल्म बनाने के दौरान किस तरह की चुनौतियां सामने आईं!

सबसे बड़ी मुश्किल थी उस वक्त को दोबारा लाना.. वह भी सीमित बजट में। हमने 42 दिनों में पूरी फिल्म शूट की। हम ओवर बजट भी नहीं गए।

फिल्म शूटिंग के दौरान कई सीन को हमें दोबारा शूट करना पड़ा.. जैसे किसी सीन में bislery पानी की बोतल दिख गयी, तो किसी में कुछ और.. तो इस तरह उस वक्त को ध्यान में रखते हुए हमें शूटिंग करनी थी।

हम कह सकते हैं यह पूरी तरह से काल्पनिक कहानी है!

हम कह सकते हैं यह पूरी तरह से काल्पनिक कहानी है!

इंदु सरकार 70 प्रतिशत काल्पनिक है.. 30 प्रतिशत सच्चाई है (जो भी किताबों और डॉक्यूमेंट्री में दिखाया गया है)।

हमने फिल्म के लिए काफी रिसर्च किया है.. बहुत ज्यादा। कई लोगों से बातें की, डॉक्यूमेंट्री देखी, किताबें पढ़ीं। और उन्ही सब बातों को पर्दे पर उतारने की कोशिश की है।

रियलिस्टिक, राजनीतिक, कॉमेडी.. किस तरह की फिल्म बनाने में खुद को ज्यादा कंर्फटेबल मानते हैं

रियलिस्टिक, राजनीतिक, कॉमेडी.. किस तरह की फिल्म बनाने में खुद को ज्यादा कंर्फटेबल मानते हैं

हर फिल्म मैं अपनी फिल्म मान के करता हूं.. मुझे इस पूरी प्रक्रिया में ही काफी मज़ा आता है। कुछ फिल्में चलती हैं.. कुछ नहीं चलती हैं.. लेकिन मैं खुश हूं कि मैंने अपनी फिल्मों की अलग तरह की कैटेगरी बनाई है। लोग कहते हैं कि यह तो मधुर भंडारकर स्टाइल की फिल्म है.. मुझे यह सुनकर खुशी होती है।

मेरी फिल्मों को समीक्षकों ने सराहा है.. नेशनल अवार्ड मिला है.. बॉक्स ऑफिस पर भी सफलता मिली है.. बतौर निर्देशक अब और क्या चाहिए।

आने वाले प्रोजेक्ट्स

आने वाले प्रोजेक्ट्स

अभी तो बस इंदु सरकार रिलीज हो जाए.. बिना किसी विवाद के। यही चाहता हूं।

वैसे कई आइडिया हैं.. कुछ स्टोरी हैं। लेकिन फिलहाल किसी पर काम शुरु नहीं किया गया है।

English summary
In an exclusive interview Madhur Bhandarkar shares his views on controversy surrounding his film Indu Sarkar.
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