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    Exclusive Interview: '2-3 साल तक काम नहीं था, खाने के पैसे नहीं थे, लेकिन मैंने एक्टिंग नहीं छोड़ी'

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    'सनम तेरी कसम' फेम अभिनेता हर्षवर्धन राणे अपनी हालिया फिल्म 'तैश' को लेकर चर्चा में हैं। 'तैश' एक सीरीज और फिल्म है जो ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर दर्शकों के लिए उपलब्ध है। इस सीरीज में हर्षवर्धन राणे के अलावा जिम सरभ, पुलकित सम्राट, संजीदा शेख, कृति खरबंदा, अभिमन्यु सिंह, अंकित राठी, अरमान खेड़ा समेत कई स्टार्स हैं। इसके ट्रेलर को पहले ही काफी पसंद किया जा चुका है।'तैश' के सिलसिले में अभिनेता हर्षवर्धन राणे ने फिल्मबीट से खास बातचीत की।

    हर्षवर्धन राणे हाल में ही कोविड 19 की चपेट में आ गए। इसके चलते उनकी तबीयत इतनी बिगड़ गई थी कि उन्हें आईसीयू में भर्ती करवाना पड़ा। अब वह कोरोना से उभर रहे हैं और पहले के मुकाबले बेहतर हैं। अपनी सेहत, फिल्म और करियर से जुड़े सभी विषयों पर अभिनेता ने जवाब दिए। उन्होंने 'तैश' फिल्म को लेकर बताया कि कैसे इस फिल्म का टाइटल रखा गया और कैसे आज वह अपने करियर में ये मुकाम हासिल कर पाए।

    सबसे पहला तो यही कि आपकी तबीयत कैसी है, कोरोना से कैसे खुद का ख्याल रख रहे हैं?

    मैं अब पहले से काफी बेहतर हूं। मैं नहीं चाहता कि ये बुरा फेज किसी की जिंदगी में आए। लेकिन कोई भी कोरोना की चपेत में आए तो मेरी उन्हें यही सलाह है कि वह पॉजिटिव रहें और अच्छे ख्यालों अपने भीतर आने दें। मुझे भी यही नुस्खा दवाओं से ज्यादा काम आया है। मुझे खुद तैश फिल्म के निर्देशक बेजॉय नांबियार आईसीयू में फिल्म के पोस्टर और ट्रेलर भेजते रहते थे। इन सभी चीजों से मैंने जल्दी रिक्वर किया है।

    आपकी डाइट और लाइफ स्टाइल ने कैसे इस वक्त आपकी मदद की?

    आपकी डाइट और लाइफ स्टाइल ने कैसे इस वक्त आपकी मदद की?

    फिल्मों के चलते खास डाइट लेना हमारी दिनचर्या का खास हिस्सा बन जाता है। लेकिन मुझे डॉक्टरों ने कहा कि सामान्य खाना आपको इस दौरान खाना है। फिलहाल मैं नॉर्मल खाना खा रहा हूं। कई सालों बाद मैंने नॉर्मल खाना खाया है, जैसे दाल चावल। मैंने पिछले कई सालों से दाल चावल नहीं खाया था। मैं अब कोरोना से ठीक हो रहा हूं और जल्द ही अपनी आने वाली फिल्म की शूटिंग में भी जुट जाऊंगा।

    आपकी फिल्म 'तैश' एक फिल्म और वेब सीरीज दोनों तरह से रिलीज हुई है, ऐसा कैसे और क्यों हुआ?

    आपकी फिल्म 'तैश' एक फिल्म और वेब सीरीज दोनों तरह से रिलीज हुई है, ऐसा कैसे और क्यों हुआ?

    जी हां, 'तैश' की शूटिंग कोरोना महामारी और लॉकडाउन से पहले हो रही थी। ये फिल्म सिनेमाघरों के लिए बनाई गई। फिर लॉकडाउन के चलते इसकी रिलीज पर दिक्कत आई। इसके बाद फिल्म निर्माता और बेजॉय नांबियार ने सोचा कि इस फिल्म को अब फिल्म और वेब सीरीज दोनों तरीके से बनाया जाए। जब फिल्म दोनों तरह से बनकर आई तो सभी को बहुत पसंद आई। इसीलिए ऐसा दुनिया में पहली बार हो रहा है कि कोई फिल्म वेब सीरीज और फिल्म दोनों तरह से रिलीज हुई है।

    'तैश' का विषय दूसरी फिल्मों के मुकाबले कैसे अलग है?

    'तैश' का विषय दूसरी फिल्मों के मुकाबले कैसे अलग है?

    'तैश' इंसान की वो परिस्थिति है जब वह गुस्सा आने के बाद वाले स्टेज पर होता है, हर इंसान का गुस्सा दिखाने और जताने का तरीका अलग होता है। कुछ लोग इस परिस्थिति को संभाल लेते हैं तो कुछ लोग तैश में आ जाते हैं। ये फिल्म उन पांच लोगों की कहानी है जो इस परिस्थिति को दर्शाएगी। दर्शकों को ये कनेक्ट करेगी क्योंकि ये फिल्म सामान्य फिल्मों से अलग है। अक्सर हम हीरो हीरोइन और गाने आदि देखते हैं। अन्य फिल्मों में हम देखते हैं कि हीरो विलेन को मार देता है और सब अच्छा अच्छा दिखाया जाता है। लेकिन बहुत कम फिल्म ही होती है जो ऐसे पक्ष को दिखाए।

    इस फिल्म का नाम 'तैश' क्यों रखा गया?

    इस फिल्म का नाम 'तैश' क्यों रखा गया?

    तैश का मतलब होता है जो गुस्से से भी आगे की स्टेज होती है। गुस्सा होता है जहां आप कंट्रोल में रहते हैं या थोड़ा चिल्लाते हैं। लेकिन अपना आपा खो देने वाली परिस्थिति को तैश कहा जाता है। मध्य प्रदेश समेत उत्तर भारत में तैश शब्द का आमतौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसी शब्द और पांच किरदारों को पिरोकर बेजॉय नांबियार ने फिल्म बनाई है, उम्मीद है दर्शकों को पसंद आएगी।

    आपका दमदार लुक देखने को मिला है, इस रोल को आपने कैसे निभाया व क्या तैयारियां कीं?

    आपका दमदार लुक देखने को मिला है, इस रोल को आपने कैसे निभाया व क्या तैयारियां कीं?

    मैंने इस केरेक्टर को निभाने के लिए एकदम अलग तरीके से अप्रोच किया। मैं इस किरादर को निभाने के लिए मुंबई से दूर चला गया। इस दौरान फोन तक बंद करके एक हफ्ते तक सबसे दूर चला गया। इस बीच मैंने किसी से बातचीत नहीं की। टीवी या कोई गैजेट नहीं देखा। खाना तक के लिए मैं किसी से नहीं मिला। मैंने अपने केरेक्टर को इस तरह से पकड़ा और उस किरदार में ढालने की तैयारी की। मैंने इस किरदार को निभाने के लिए बहुत कोशिश की है। मुझे उम्मीद है कि लोगों को किरदार की तरह फिल्म भी पसंद आएगी।

    आपकी जर्नी काफी अलग रही है, आपने इस सफर को कैसे तय किया?

    आपकी जर्नी काफी अलग रही है, आपने इस सफर को कैसे तय किया?

    मैं 16 साल की उम्र में घर से बैग लेकर भागकर आ गया था। मैं बचपन से ऐसा था कि मैं किसी और की सलाह पर न चलूं बस अपने दिमाग से चलूं। मैंने हर परिस्थिति में खुद को जीना सिखाया। एक समय था जब मेरे पास खाना तक नहीं होता था। रहने, खाने, कपड़े, सोना और नहाने तक का कुछ पता नहीं होता था। परिवार के बारे में सोचना बहुत दूर की बात थी। मैंने एक एक चीज पर काम शुरू किया। पहले मैंने खाने पर काम किया। इसके लिए मैंने वेटर का काम किया और फिर साइबर केफे, कार पेंटर, डीजे आदि का काम किया। मैं अपनी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट 16 साल की उम्र को मानता हूं। इस उम्र में मैं घर से आ गया और अपने लिए फैसले लेने शुरू कर दिए थे। इसी सोच की वजह से मैं आज जो भी हूं सबकुछ हूं। मैं ये कहना चाहता हूं कि सब अपनी दिल की बात सुनो और खुद को जानूं। दूसरों की लाइफ से पॉजिटिव चीजों को जानों।

    बिना किसी सहारे के इंडस्ट्री में सफर तय करना कितना कठिन है? क्या ये सच है कि सिर्फ टैलेंट के बलबूते पर काम मिल जाता है या फिर किसी सहारे की जरूरत होती है?

    बिना किसी सहारे के इंडस्ट्री में सफर तय करना कितना कठिन है? क्या ये सच है कि सिर्फ टैलेंट के बलबूते पर काम मिल जाता है या फिर किसी सहारे की जरूरत होती है?

    मेरा मानना ये है कि जब लोग आप पर विश्वास नहीं करेंगे तो आपको उसके लिए खुद पर विश्वास होना चाहिए। कुछ लोग आप पर हंसेंगे फिर कुछ आपको नकारेंगे। लेकिन आप खुद पर विश्वास रखो। मुझ पर भी कई सालों तक लोग हंसे कि ऐसे ही एक्टर थोड़ी बन जाते हैं। क्या तेरे पास किसी डायरेक्टर का नंबर है। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। मैं ये नहीं मानता कि सिर्फ गॉडफादर हो तो ही आप सफलता हासिल कर सकते हैं। शाहरुख खान, अक्षय कुमार, आयुष्मान खुराना, राजकुमार राव जैसे तमाम स्टार्स हैं जो अपने दम पर आज के चमकते सितारे बने हैं। अगर आप गिनती करें तो फैमिली के बच्चों से ज्यादा हम जैसे आउटसाइडर्स हैं। बाहर से आने वाले बच्चे रिजेक्शन के बारे में बेहतर तरीके से जानते व समझते हैं।

    मुश्किल दौर किसे मानते है?

    मुश्किल दौर किसे मानते है?

    मुश्किल वक्त मैं सीखाने वाले समय को मानता हूं। ऐसे बहुत समय था जब मेरे पास कई कई महीने तक बिल्कुल पैसे नहीं थे। साउथ में पहली फिल्म करने के बाद एक समय फिर ऐसा हुआ कि मेरे पास दो तीन साल तक काम नहीं था। फिर वो समय आया जब मेरे पास खाने के पैसे नहीं तक थे। मेरे पास काम करने वाले लड़के ने मुझे खाना दिया करता था। ये वक्त था साल 2012 का। लेकिन मैंने काम में कोई शर्म नहीं की। मैंने काम के लिए कार पेंटर से लेकर दूसरे कई काम किए। अगर दोबारा मेरे पास ऐसा समय आया तो मैं इसे फेस करने के लिए दोबारा तैयार हूं। मैं हिम्मत नहीं हारा हूं। मेरे पास अगर पैसे नहीं हुए तो मैं दोबारा ऐसे काम करूंगा और फिर से एक्टिंग में आऊंगा। मैं एक्टिंग नहीं छोड़ सकता।

    English summary
    Exclusive Interview: Taish Actor Harshvardhan Rane share his struggle and inspiring story
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