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    EXCLUSIVE INTERVIEW: नसीरुद्दीन शाह ने ऋत्विक भौमिक को दी थी ये सलाह, मजा मा और बंदिश बैंडिट्स 2 पर बोले एक्टर

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    इंटरटेनमेंट की दुनिया में कई अभिनेताओं को उभारने का क्रेडिट ओटीटी को दिया जा रहा है। इन्हीं कलाकारों में शामिल हैं एक्टर ऋत्विक भौमिक, जो फिलहाल अपनी लेटेस्ट फिल्म 'मजा मा' की रिलीज को एन्जॉय कर रहे हैं। फिल्म में वो माधुरी दीक्षित और गजराज राव के बेटे की भूमिका निभा रहे हैं। इससे पहले वेब सीरीज 'बंदिश बैंडिट्स' से रातोंरात चर्चा में छाए ऋत्विक खुश हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म उन्हें वह एक्सपोजर दे रहा है जो वह हमेशा से चाहते थे।

    ऋत्विक भौमिक ने फिल्मीबीट से विशेष बातचीत की है, जहां उन्होंने माधुरी दीक्षित और नसीरूद्दीन शाह जैसे कलाकारों के साथ काम करने के अनुभव को शेयर किया। स्टीरियोटाइप होने के अपने डर को शेयर करते हुए, एक्टर ने अपनी फिल्मों और सीरीज के चुनाव पर कहा, "बस कोशिश यही रहेगी कि अच्छा काम करना है। तब तक किसी प्रोजेक्ट को हां नहीं करूंगा, जब तक ना लगे कि ये स्क्रिप्ट अच्छी है, ये लोग अच्छे हैं , कहानी अच्छी है।"

    यहां पढ़ें इंटरव्यू से कुछ प्रमुख अंश-

    Q. बंदिश बैंडिट्स की सफलता ने आपको कितना बदला?

    Q. बंदिश बैंडिट्स की सफलता ने आपको कितना बदला?

    18 साल की उम्र में मैं बंगलौर से मुम्बई वापस आ गया था। मैं वहां पढ़ाई पूरी कर रहा था। और 21 की उम्र से प्रोफेशनली बतौर एक्टर मैंने काम खोजना शुरू कर दिया था। फिर बंदिश बैंडिट्स मिली, जब मैं 26 साल का था। तो वो 5 साल थे जब काम ज्यादा था नहीं मेरे पास। वो 5 साल मैंने जैसे गुजारे, बंदिश बैंडिट्स की रिलीज़ के बाद मुझे वो साल याद रहे.. कि एक वक्त वो था, एक वक्त ये है। मेरी सिर्फ यही सोच थी कि काम करने आए हैं, अच्छे से काम करेंगे.. कुछ चलेंगी, कुछ नहीं चलेंगी। सारे प्रोजेक्ट्स शायद अच्छे नहीं होंगे। लेकिन मेरी किस्मत अच्छी रही कि जितने भी प्रोजेक्ट्स मैंने किए हैं, वो काम कर गए। लोगों से बहुत बहुत प्यार मिला है, व्यूअरशिप भी मिली है। कभी कोई ऐसा प्लान नहीं रहा है कि क्या करना है। बस कोशिश यही रहेगी कि अच्छा काम करना है। तब तक किसी प्रोजेक्ट को हां नहीं करूंगा, जब तक ना लगे कि ये स्क्रिप्ट अच्छी है, ये लोग अच्छे हैं , कहानी अच्छी है।

    Q. बंदिश बैंडिट्स में आपके किरदार को जितना प्यार मिला, उसके बाद उसी में बंधे रह जाने का डर था?

    हां, मुझे स्टीरियोटाइप होने की चिंता था क्योंकि बंदिश बैंडिट्स के बाद जो तीन- चार कॉल्स आए सबने एक ही तरह का रोल ऑफर किया.. कि वो राजस्थान का एक बहुत सीधा साधा लड़का है। इसीलिए मैंने इस बात को ध्यान में रखकर ऐसे स्क्रिप्ट चुने, जो मुझे राधे (बंदिश बैंडिट्स में किरदार का नाम) से बहुत दूर ले जाए। इसी दौरान मुझे सोनी लिव का शो मिला whistleblower.. जिसमें मेरा किरदार राधे से बिल्कुल ही अलग था, फिर उसके बाद मॉडर्न लव किया, जहां मुंबई की लव स्टोरी दिखाई गई। और अब मजा मा आई है, जहां एक लड़के का किरदार मिला जो प्यार में पागल है और अपनी गर्लफ्रैंड से शादी करने के लिए कुछ भी कर सकता है, साथ ही अपने परिवार से भी बहुत प्यार करता है। तो मेरी किस्मत अच्छी रही कि ये सभी किरदार एक दूसरे से बिल्कुल अलग रहे और लोगों ने सभी को पसंद किया। तो हां, स्टीरियोटाइप का डर हमेशा बना रहता है.. लेकिन यदि हम अपने च्वॉइस के साथ सावधान रहें तो फिर हम कहीं नहीं फंसेंगे।

    Q. मैंने सुना था कि सीरिज के लिए आपके साथ 150 से ज्यादा लोगों ने ऑडिशन दिया था?

    Q. मैंने सुना था कि सीरिज के लिए आपके साथ 150 से ज्यादा लोगों ने ऑडिशन दिया था?

    मैं आपको बताता हूं, 191 लड़कियों ने और तकरीबन 175-180 लड़कों ने ऑडिशन दिया था। मुझे आज तक नहीं पता, मुझे वो रोल कैसे मिला.. (हंसते हुए)। मैं किसी से ये पूछना भी नहीं चाहता.. बस मिल गया और मैं खुश हूं।

    Q. आप कंपिटिशन में विश्वास रखते हैं?

    हां, आम तौर पर मैं बहुत प्रतिस्पर्धी हूं, लेकिन जैसे ही एक्टिंग शुरु करता हूं, मुझे समझ आ जाता है कि अभिनय का कंपिटिशन से कोई लेना देना नहीं है। एक अच्छा शॉट दो ना तो दिल खुश हो जाता है। मुझे लगता है कि अभिनय के क्षेत्र में कंपिटिशन है ही नहीं। यदि आप लोगों के करियर ग्रॉफ की तुलना करेंगे तो वहां कंपिटिशन हो सकता है, लेकिन जब आप परफॉर्म कर रह होते हैं तो आप कभी नहीं तुलना कर सकते हैं कि सामने वाले एक्टर से मैंने बेहतर किया या किसी और एक्टर से अच्छा किया या नहीं। ये बात को आप कभी माप ही नहीं सकते।

    Q. 'मजा मा' की रिलीज को कितना एन्जॉय कर रहे हैं?

    Q. 'मजा मा' की रिलीज को कितना एन्जॉय कर रहे हैं?

    पहले दो- तीन मैंने बड़ा एन्जॉय किया कि फिल्म को पॉजिटिव रिस्पॉस मिल रहा है, सब बड़ी अच्छी बातें कर रहे हैं। लेकिन मुझे नसीर सर (नसीरूद्दीन शाह) ने ये सलाह दी थी कि Do not take any of the critisism to your heart and don't take any of the praises too seriously.. और वो मैंने अब तक अपने दिमाग में रखा हुआ है। इसीलिए कुछ दिन मैं खुश रहा, लेकिन अब फिल्म हमारे हाथों से निकलकर दुनिया की हो चुकी है, अब आगे का रास्ता फिल्म खुद तय करेगी। मैं आगे बढ़ चुका हूं और अपने अगले प्रोजेक्ट की तैयारी में लगा हूं। अब मैं सिर्फ आने वाले किरदार के बारे में सोच रहा हूं कि वो कैसा जाएगा।

    Q. माधुरी दीक्षित के साथ आपने अच्छा खासा स्क्रीन टाइम शेयर किया है। उनके साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा, क्या सीखा?

    बहुत कुछ सीखा मैंने, बहुत कुछ। माधुरी मैम हों, नसीर सर हों या गजराज राव हों, इन सबके साथ काम करके तो सबसे पहले ये समझ आया कि ये लोग कभी भी अपने 25-30 साल के अनुभव को लेकर सेट पर नहीं आते हैं। वो ये भूल जाते हैं कि वो स्टार हैं। वो जब सेट पर आते हैं, तो किरदार बन जाते हैं। यदि मैं अगले 20-30 सालों तक काम करता रहूं, तो मैं चाहता हूं कि उस वक्त भी काम को लेकर मेरे अंदर उतना ही प्यार, उतना ही लगाव और उतनी ही एकाग्रता रहे, जैसे नसीर सर या जैसे माधुरी मैम में है। सबसे बड़ी सीख तो ये मिली। बाकी ऐसा किरदार मिलना मुझे लगता है लाखों में एक अवसर था मेरे लिए.. क्योंकि इसमें मेरे किरदार का ग्रॉफ इतना अलग है, जो आम तौर पर हीरोज को दिया नहीं जाता। और ना सिर्फ मुझे एक अलग किरदार मिला, बल्कि एक ऐसा डायरेक्टर (आनंद तिवारी) मिला, जो ना सिर्फ किरदारों को समझता है, बल्कि ये भी समझता है कि ये एक्टर इस किरदार को किस तरह से कर पाएगा।

    Q. आनंद तिवारी ने बंदिश बैंडिट्स और मजा मा दोनों में ही बतौर एक्टर आपको ग्रो करने का काफी मौका दिया है। इस बात को मानते हैं?

    Q. आनंद तिवारी ने बंदिश बैंडिट्स और मजा मा दोनों में ही बतौर एक्टर आपको ग्रो करने का काफी मौका दिया है। इस बात को मानते हैं?

    बिल्कुल, लेकिन मेरे लिए आनंद सर के साथ काम करना एक तरह से आसान है क्योंकि मैं जानता हूं कि मैं एक इतने काबिल डायरेक्टर के पास जा रहा हूं कि मैं कैसा भी परफॉर्म करूं, वो मुझे संभाल लेंगे, वो मुझे सही तरीके से गाइड करेंगे और मेरा बेस्ट परफॉर्मेंस निकाल के ही छोड़ेंगे। लेकिन साथ ही ये भी डर रहता है कि इस इंसान को अपने काम से इतना प्यार है, यदि मैंने उस प्रोजेक्ट को उसी लेवल पर प्यार नहीं दिया.. तो शायद कहीं मैं पीछे छूट जाउंगा। आनंद तिवारी अपनी फिल्मों को अपने बच्चे की तरह प्यार करते हैं। तो उनके सेट पर जाने से पहले मुझे हमेशा ये डर रहता है कि यदि मैंने अपना 100% नहीं दिया तो शायद मैं ही खुद से निराश हो जाउंगा।

    Q. फिल्म 'मजा मा' के दौरान या उसके बाद LGBTQ समुदाय को लेकर सोच में कितना बदलाव आया?

    सच कहूं तो अपने परिवार की वजह, या स्कूल या आस पास के लोगों की वजह से मुझे हमेशा से LGBTQ समुदाय को लेकर जानकारी, समझदारी और acceptance थी।

    Q. एक्टर बनने का ख्वाब हमेशा से था? बचपन में किस एक्टर के फैन रहे थे?

    Q. एक्टर बनने का ख्वाब हमेशा से था? बचपन में किस एक्टर के फैन रहे थे?

    (मुस्कुराते हुए) बचपन से मुझे एक्टर ही बनना था। जबसे फिल्में देखना शुरु किया, तब से मुझे लगता था कि टीवी के अंदर जो नाच रहा है, गा रहा है, घूम रहा है, मुझे वही करना है। और परिवार ने मेरा बहुत सपोर्ट किया, बल्कि उन्होंने मेरे ख्वाब को अपना ख्वाब लिया था। और आइडल की बात करें तो.. बस वन एंड ओनली शाहरुख खान.. उनसे बड़ा कौन हो सकता है! 90 के दशक में उनसे ज्यादा प्रभाव डालने वाला कोई और एक्टर था ही नहीं। और भी कई बड़े बड़े एक्टर्स थे, लेकिन मेरे लिए शाहरुख खान ही थे, जिन्होंने मेरे दिमाग में ये बात डाली कि.. "मैं जब ये करता हूं मुझे बहुत खुशी मिलती है, तू भी ट्राई कर ले, तुझे भी खुशी मिलेगी।"

    Q. जाते जाते आने वाले प्रोजेक्ट्स के बारे में कुछ बताना चाहेंगे?

    कुछ बढ़िया प्रोजेक्ट्स आ रहे हैं। ज्यादातर ओटीटी पर ही आने वाली हैं। साथ ही एक प्रोजेक्ट जिसका पूरी दुनिया इंतजार कर रही है कि कब आएगी.. बंदिश बैंडिट्स 2.. उम्मीद है कि वो भी अब बहुत जल्द सबके सामने आएगी।

    English summary
    In an exclusive interview with Filmibeat, actor Ritwik Bhowmik talked about his latest release Maja Ma, his learning experience with Madhuri Dixit, about Bandish Bandits 2, getting stereotyped and more.
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