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    Exclusive Interview: कलाकारों को सिर पर चढ़ाकर रखा है, वो कुछ भी बोलते हैं लोग बड़ा बना लेते हैं-प्राची देसाई

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    बड़े स्टार्स, नामी बैनर और लोकप्रिय मेकर्स के साथ काम करने के बाद भी प्राची देसाई ने बतौर एक्ट्रेस खुद के करियर में बदलाव लाने के लिए इंतजार किया। हालांकि फिल्म इंडस्ट्री में इंतजार की कीमत क्या होगी इसका गणित समझना मुश्किल है। लेकिन बॅालीवुड का दूसरा मतलब है खतरा मोल लेना।

    प्राची देसाई ने 'रॉक ऑन', 'बोल बच्चन', 'अजहर' जैसी एक दर्जन हिट फिल्मों के बाद भी खुद को टाइपकास्ट होने से बचाने के खुद को फिल्मों की चलती हुई गाड़ी से नीचे उतारा। इस बीच अपनी कोशिश जारी रखी। नतीजा ये हुआ है कि वह अब एक्शन करते हुए पुलिस अफसर की भूमिका में ओटीटी से डेब्यू करने जा रही हैं।

    'साइलेंस कैन यू हियर इट' से प्राची पर्दे पर अपनी रोमांटिक इमेज को हटा कर ये दिखाने की कवायद कर रही हैं वह भी एक सशक्त महिला किरदार निभाने के काबिल हैं। फिल्मीबीट से खास बातचीत में प्राची देसाई ने बॅालीवुड में टाइपकास्ट होने से लेकर सोशल मीडिया ट्रोलिंग पर भी अपनी बेबाक राय जाहिर की।

    प्राची देसाई ने बताया कि वह इस तरह के रोल के लिए कई बड़ी फिल्मों से इंकार कर चुकी हैं। एक ही तरह की भूमिका निभाने से वह टाइपकास्ट भी हो गई थीं। यहां पढ़िए हमारे सवाल और प्राची देसाई के सीधे जवाब।

    पहली बार पुलिस अफसर की भूमिका, एक्शन के लिए कोई तैयारी की?

    पहली बार पुलिस अफसर की भूमिका, एक्शन के लिए कोई तैयारी की?

    साइलेंस कैन यू हियर इट मेरे लिए उत्साहित करने वाला किरदार रहा है।पहली बार मैं पुलिस अफसर की भूमिका निभा रही हूं। इस सीरीज में हम एक केस पर काम करते हुए नजर आएंगे। तो उसी आधार पर हमारी रिसर्च हुई है। हां, मैंने एक्शन किया है। लेकिन वो इतना अधिक नहीं है। जरूरत के हिसाब से रियल स्पेस में है। यहां एक्शन में कमर्शियल फिल्मों की तरह धुंआधार नहीं है। जो रियल लाइफ में हो सकता है उस तरह से एक्शन करते हुए हम दिखेंगे।

    इस तरह का रोल बतौर एक्ट्रेस आपको किस तरह की संतुष्टि देता है?

    इस तरह का रोल बतौर एक्ट्रेस आपको किस तरह की संतुष्टि देता है?

    मैंने बहुत सारी स्क्रिप्ट भी पढ़ी। बहुत सारी बड़ी फिल्मों में भी रोल थे लेकिन वे वैसे ही किरदार थे जो मैं कर चुकी हूं। मेरी कोशिश थी कि अब तो ये हो चुका है, मेरे लिए नया क्या है? जब ये रोल मुझे मिला तो तुरंत ये महसूस हुआ कि ये करना ही है। मैंने यही सोचा कि पहले कोई मेरे लिए इतना अद्भुत किरदार क्यों नहीं लेकर आया? कई बार टाइपकास्ट इतना हो जाता है कि आपको अपने लिए सीमाएं तोड़नी पड़ती है।

    पहले महिला प्रधान फिल्में आज की तुलना में इतनी अधिक नहीं लिखी जाती थी? क्या इस वजह से आपको खुद को भिन्न किरदारों में दिखाने का अवसर नहीं मिला?

    पहले महिला प्रधान फिल्में आज की तुलना में इतनी अधिक नहीं लिखी जाती थी? क्या इस वजह से आपको खुद को भिन्न किरदारों में दिखाने का अवसर नहीं मिला?

    मैं आपसे बिल्कुल सहमत हूं। जब मेरा डेब्यू हुआ था तब माहौल काफी अलग था। इसी में लोगों की दिलचस्पी थी कि आप बड़ी फिल्में कर रहे हो या नहीं। आप किसके साथ स्टार हुए हो और कौन निर्माता हैं? ये सब तब जरूरी था और मुझे तब ये सब समझ में नहीं आता था। मेरे ख्याल से महिलाओं को अच्छे रोल मिलना उनके लिए अच्छे किरदार लिखे जाना, ये काफी बाद में ध्यान दिया गया।

    बहरहाल, मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानती हूं कि हम आज भी ऐसा दौर देख रहे हैं कि अब हम भी बहुत सारी चीजें कर सकते हैं। आज तो हमारे पास दूसरा प्लेटफार्म भी है। सिर्फ थिएटर रिलीज नहीं ओटीटी भी है।ऐसे में और भी प्रयोग हो सकते हैं। जो कहानी आप बड़े पर्दे पर ना दिखा सकते उसे दूसरे माध्यम से दिखा सकते हैं।

    रॉक ऑन जैसी बड़ी फिल्में, बड़े स्टार्स के साथ काम करने के बाद भी आप ने खुद के लिए ब्रेक लिया? क्या वजह रही इसकी?

    रॉक ऑन जैसी बड़ी फिल्में, बड़े स्टार्स के साथ काम करने के बाद भी आप ने खुद के लिए ब्रेक लिया? क्या वजह रही इसकी?

    मैंने बहुत कम उम्र में डेब्यू कर लिया था। कोई बड़ा प्लान नहीं था। सबकुछ मेरे लिए बड़ा सरप्राइज रहा है। बहुत कम उम्र में मैंने बड़े उम्र का किरदार प्ले किया था। मुझे नहीं पता था कि फिर उसी तरह के किरदार मेरे पास आएंगे। मुझे लगा था कि मैं यंग हूं तो और भिन्न किरदार कर सकती हूं। एक समय के बाद लगा कि एक तरह के किरदार मैं फिर से दोहरा नहीं सकती।

    मैंने फिर इंतजार किया। हमारी इंडस्ट्री में ये तय नहीं कर पाते हैं कि ये एक महीने का इंतजार होगा या एक साल का या फिर उससे भी ज्यादा। उम्र अभी भी मेरे साथ मेरी तरफ है। मैंने हमेशा ही अपने नियम पर काम किया। मैं कभी रेस में थी ही नहीं। दिखने के लिए मैंने कभी काम नहीं किया। मैं वही काम लेती थी जो मुझे करना है। मैं दूसरों को देखकर अपने करियर की स्पीड तेज या धीमी नहीं करती हूं। खैर,अब मुझे मौका मिल रहा है।

    वेब के आने से मौका कलाकारों के लिए बड़ा है, लेकिन क्या आप बोल्ड सीन के लिए तैयार हैं?

    वेब के आने से मौका कलाकारों के लिए बड़ा है, लेकिन क्या आप बोल्ड सीन के लिए तैयार हैं?

    हम ये चार्ट नहीं बना सकते कि ये चीज़ होगा और ये नहीं होगा। मैं पहले से इस बात को लेकर निश्चित हूं कि जो देखने और करने में खुद सहज हूं वहीं काम करूंगी।। वो मेरे लिए आज भी लागू करता हैं। मैं ये मजबूती से विश्वास करती हूं कि सिर्फ जबरदस्ती के व्यूअरशिप के लिए सब्सक्राइबर्स के लिए कुछ तरह का कंटेंट आप सीरीज या फ़िल्म में डालते हो तो मेरी दिलचस्पी नहीं है।

    ओटीटी पर भी इस फ़िल्म को लेने में मैंने इतना समय बिताया क्योंकि ये बहुत ही साफ और अच्छा रोल है। हमारी फ़िल्म की कहानी और किरदार इतने दमदार हैं कि और किसी चीज़ की जरूरत नहीं है। मैं ऐसी फिल्में और वेब शो करना पसंद करूंगी जिसमें जबरदस्ती कुछ ना डाला गया हो।

    कोरोना के बढ़ते मामले के बीच शूटिंग और मनोज बाजपेयी के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?

    कोरोना के बढ़ते मामले के बीच शूटिंग और मनोज बाजपेयी के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?

    कोरोना के दौरान क्या उम्मीद की जानी चाहिए ये पता नहीं। डर बना रहता है। हमारे सेट पर कोरोना के पूरे नियम फॉलो किए गए। मास्क पहना और कोरोना सावधानी को लेकर माहौल सख्त था। रहा सवाल मनोज बाजपेयी सर का तो एक कलाकार के तौर पर वह चौंका देते हैं। बहुत मेहनत करते हैं इतने काबिल होने कर बाद भी। हम चार ऑफिसर हैं फ़िल्म में तो हमारे बीच सहजता होनी कहानी के लिए आवश्यक है।मनोज सर ने हमें शूटिंग के कुछ ही घंटों में सहज कर दिया। वो मजाक भी करते हैं तो कभी डांट भी देते थे ज्यादा मस्ती सेट पर होने पर। काफी सीखने को मिला है।

    कोरोना के बढ़ते हुए मामले के बीच फिल्मों की थिएटर रिलीज को कितना सुरक्षित मानती हैं?

    कोरोना के बढ़ते हुए मामले के बीच फिल्मों की थिएटर रिलीज को कितना सुरक्षित मानती हैं?

    मैं कलाकर हूं तो चाहती हूं कि हमारे बिज़नेस को मुनाफा हो। इसके साथ मैं भी समझ सकती हूं कि कोरोना में लोगों की मानसिक हालात ऐसी होगी कि क्या करना है और क्या नहीं करना चाहिए। देखिए, होटल,जिम आदि खुल चुके हैं। कोरोना के नियम का पालन हमें सही से करना है। अगर हम कोरोना के नियम और सावधानी को ध्यान रखकर बाहर खाना खाने जा सकते हैं तो फिल्म देखना चाहते हैं तो वो भी कर सकते हैं। मेरे ख्याल से कोरोना में खुद की सुरक्षा खुद के हाथ में रखने वाला भी मामला है। एक जिमेदारी के साथ आप सिनेमा देखने जाओ।

    कोरोना काल में ट्रोलिंग से इंडस्ट्री को स्टार्स को काफी परेशानी हुई, इस पर आपकी निजी राय क्या है?

    कोरोना काल में ट्रोलिंग से इंडस्ट्री को स्टार्स को काफी परेशानी हुई, इस पर आपकी निजी राय क्या है?

    आपको ये पॅावर मिला है कि किसी स्क्रीन के पीछे छिपकर आप किसी के बारे में कुछ भी लिख रहे हो। अगर किसी के लिए बुरा लिखना आपको अच्छा महसूस करवाता है तो ये बहुत दुख की बात है। एक आदर का भाव एक दूसरे के लिए होना ही चाहिए। फिर चाहे वह परिवार के लिए हो या कलाकार के लिए। निजी स्पेस हर किसी को मिलना चाहिए। बचपन में ही अच्छा पेश होने की सीख मिलती है। बड़े होकर भी कई लोग ये नहीं समझ पाते हैं। ये दुखद है। कलाकार अपना काम करते हैं।

    आपने ही कलाकारों को इतना सिर पर चढ़ाकर रखा है कि वह कुछ भी बोलते हैं तो उसको बड़ा बना लेते हैं। हम कौन हैं? हम इंसान हैं, अपना काम करते हैं और घर जाते हैं। यही कहूंगी कि हमें इतना सिर पर मत चढ़ाना, फिर आप ही लोग गिरा भी देते हैं।

    English summary
    Exclusive interview: Prachi Desai talk about her ott debut, trolling and being typecast
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