INTERVIEW: सिंगर्स और कंपोजर्स के लिए यह चैलेजिंग लेकिन पॉजिटिव समय है- निकिता गांधी
डेलीहंट के शॉर्ट वीडियो ऐप 'जोश' ने पिछले हफ्ते भारत की सबसे बड़ी डिजिटल म्यूजिकल चैलेंज 'लेट्स प्ले अंताक्षरी' सेलिब्रेट किया। इस चैलेंज में म्यूजिक इंडस्ट्री के कलाकार शामिल रहे, जहां उन्होंने जोश ऐप यूजर्स के साथ भारत का सबसे लोकप्रिय खेल खेला- अंताक्षरी। फिल्मीबीट से विशेष रूप से बात करते हुए, सिंगर, कंपोजर और परर्फोमर निकिता गांधी ने म्यूजिक इंडस्ट्री में अपने सफर के बारे में बातें की, डेंटल की पढ़ाई करते हुए उन्होंने संगीत को करियर के रूप में कैसे चुना, आदि।

राब्ता, इत्तेफाक से, घर (जब हैरी मेट सेजल) और कई अन्य गानों के लिए चर्चित गायिका ने संगीत की दुनिया में एक लंबा सफर तय किया है। अपने पहले प्रोफेशनल सिंगिंग प्रोजेक्ट के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "मैं चेन्नई में डेंटल की पढ़ाई कर रही थी जब मैं रहमान सर (ए आर रहमान) से मिली। मैं संगीत से जुड़े रहना चाहती थी सिर्फ इसीलिए मैंने उनके म्यूजिक स्कूल में एडमिशन ले लिया था। मैं पहले से हिंदुस्तानी क्लासिकल जानती थी और मैं वेस्टर्न क्लासिकल सीखना चाहती थी। मेरी क्लास सप्ताह में 2 दिन होती थीं, लेकिन मैं वहां इतनी involve होने लगी कि मैं लगभग हर दिन वहां जाने लगी। मैंने हर गतिविधि में भाग लेना शुरू कर दिया। संगीत में मेरी रुचि बढ़ी। फिर एक ऑडिशन के दौरान रहमान सर ने मेरी आवाज सुनी और वो मुझे फिल्म प्रोजेक्ट्स के लिए बुलाने लगे। तो यहीं से मेरे सफर की शुरुआत हुई। कॉलेज के दौरान ही मैं प्रोफेशनल तौर पर म्यूजिक से जुड़ चुकी थी। जब तक मैंने अपनी डेंटल की पढ़ाई पूरी की, तब तक मैं 4-5 तमिल-तेलुगु गाने गा चुकी थी। तो मुझे एहसास हुआ, मुझे शायद अब संगीत में करियर बनाने के बारे में सोचना चाहिए, देखते हैं कि किस्मत मुझे कहां ले जाती है।"
इस इंडस्ट्री में प्रासंगिक और हमेशा आगे रहने के लिए वह क्या करती है, इस बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा, "मेरा व्यक्तित्व ऐसा है कि मैं लगातार काम करती रहती हूं। मैं restless रहती हूं। मेरी एक दिनचर्या है और मैं उसका पालन करती हूं। मैंने लॉकडाउन के दौरान भी कई नई चीजें सीखीं। मुझे लगता है कि इसीलिए मैंने इस इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धी होने और हमेशा आगे रहने के बारे में कभी नहीं सोचा। मैं चीजों को अपने तरीके से करती हूं।"
सिंगर ने म्यूजिक इंडस्ट्री के गुण- दोष, बदलते रुझानों के साथ संगीत कलाकारों के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में चर्चा की। आजकल कम गाने वाली फिल्मों का एक नया चलन है, इस बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, यह निश्चित रूप से एक चुनौतीपूर्ण समय है लेकिन मुझे नहीं लगता कि संगीत को किसी भी मामले में नुकसान होगा।
"लोग हमेशा गाने सुनते रहेंगे। अगर फिल्मों में कोई गाना नहीं है, तो कलाकार अपने एकल और एल्बम लाएंगे और वहां से उन्हें पहचाना जाएगा। सच कहूं तो मैं इसे लेकर उत्साहित हूं क्योंकि इससे लोगों को एक गायक, एक संगीतकार को बेहतर तरीके से जानने में मदद मिलेगी। इसलिए, अगर यह बदलाव होता है, तो यह एक अच्छा बदलाव होगा", उन्होंने कहा।
निकिता गांधी ने हिंदी के साथ-साथ तमिल, तेलुगु, बंगाली और कन्नड़ में भी गाने गाए हैं। इस बारे में पूछे जाने पर गायिका ने जवाब दिया, "हालांकि मैंने ज्यादातर काम हिंदी में किया है, लेकिन संगीत में भाषा कभी बाधा नहीं बनती। मैंने रहमान सर के लिए गाने भी गाए हैं जिनमें कोई लिरिक्स नहीं है।"
इंटरव्यू के अंत में, उन्होंने अपने 3 पसंदीदा गीतों को शेयर किया, जिसे वो अंतराक्षरी के दौरान जरूर गाती हैं, वह है- लग जा गले, डार्लिंग आंखें से आखें चार करने दो और ओ ओ जाने जाना। साथ ही उन्होंने जोश ऐप के म्यूजिक लवर्स के लिए संदेश भी दिया है। उन्होंने कहा, "मैं कहना चाहती हूं कि भारत में म्यूजिक इंडस्ट्री हमेशा फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा रहा है, लेकिन अभी एक बदलाव देखा जा रहा है और दोनों के बीच एक दूरी देखी जा रही है। मैं संगीत प्रेमियों को बताना चाहती हूं कि हम (गायक) अपनी अलग इंटिपेंडेंट सफर की शुरुआत भी कर रहे हैं। हम एकल और एल्बम्स लाते रहते हैं। इसलिए, इस बदलाव में हमारा समर्थन करते रहें। हमारे गैर फिल्मी गानों को भी सपोर्ट दें, ताकि फिल्मों से अलग भी म्यूजिक इंडस्ट्री विकसित हो सके और बेहतर हो सके।"
यहां देखें निकिता गांधी का पूरा इंटरव्यू:


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