EXCLUSIVE INTERVIEW: ना किसी कैंप में हूं, ना किसी भेड़ चाल में, सिर्फ सिनेमा के पीछे पागल हूं- मधुर भंडारकर

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Madhur Bhandarkar: पेज 3, चांदनी बार, कॉर्पोरेट, फैशन समेत फिल्म इंडस्ट्री को कई उम्दा फिल्में देने वाले निर्माता- निर्देशक मधुर भंडारकर अपनी नई फिल्म 'इंडिया लॉकडाउन' के साथ दर्शकों के सामने आए हैं। फिल्म ज़ी5 पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध हो चुकी है। दर्शकों से मिल रहे रिस्पॉस पर खुशी जताते हुए निर्देशक ने कहा, " दो महीने पहले ही मेरी फिल्म बबली बाउंसर रिलीज हुई थी ओटीटी पर, उस फिल्म को भी बहुत पसंद किया था। अभी तक उसके लिए मुझे लोग मैसेज करते हैं। और अब 'इंडिया लॉकडाउन' आई है, जो पूरी तरह से अलग फिल्म है। दर्शकों से जिस तरह का रिस्पॉस मिला है, मैं उससे बहुत ही खुश हूं।

फिल्मीबीट के साथ एक खास इंटरव्यू में, मधुर भंडारकर ने इंडिया लॉकडाउन के अलावा फिल्मों के बजट, अपने करियर और ओटीटी के बाद सिनेमा के बदलाव पर खुलकर बातें की हैं।

यहां पढ़ें इंटरव्यू से कुछ प्रमुख अंश-

Q. 'इंडिया लॉकडाउन' की शुरुआत कैसे हुई थी?

Q. 'इंडिया लॉकडाउन' की शुरुआत कैसे हुई थी?

A. ये 2020 की बात है, मैंने बबली बाउंसर की स्क्रिप्ट खत्म की थी और मैं अपने राइटर्स के साथ बैठा था। हम यही सोच रहे थे कि किस विषय पर फिल्म बना सकते हैं। उस वक्त कोविड का माहौल चल ही रहा था, इसीलिए हम कोई छोटी फिल्म बनाना चाहते थे। मुझे अचानक ये आइडिया आया कि चलो लॉकडाउन पर ही एक फिल्म बनाते हैं। बता दूं, बबली बाउंसर्स के राइटर्स ने ही इंडिया लॉकडाउन की स्क्रिप्ट भी लिखी है। पहले सबको लगा कि मैं मजाक कर रहा हूं, लेकिन मैंने इस पर गंभीरता से काम शुरु किया। उस वक्त कोविड से संबंधित टेलीविजन, न्यूजपेपर, इंटरनेट, हर जगह हम इतनी सारी बातें देख रहे थे, सुन रहे थे। हमने उसी दौरान कई लोगों से बातें भी की। फिर हमने स्क्रिप्ट पर काम शुरु किया। शुरुआत में हमारे पास 12 कहानियां थीं, फिर हमें लगा कि इतना तो फिल्म में नहीं बांध सकते। इन सभी कहानियों के लिए तो वेब सीरीज बनाना पड़ेगा। फिर हमने कहानियों को छांटना शुरु किया और 12 से 10, फिर 8, फिर अंत में 4 कहानियों को हमने फाइनल किया। कहानियों का चुनाव जरूरी था क्योंकि हर कहानी को एक अच्छा ट्रीटमेंट देना था, एक अच्छा मोड़ देना जरूरी था। यह एंथोलॉजी नहीं है कि एक कहानी के बाद दूसरी शुरु होगी। इसमें सभी कहानियां साथ साथ आगे बढे़गीं। टाइमलाइन सबकी एक है। फिर 2021 में लॉकडाउन खत्म होने के बाद हमने बबल में इसकी शूटिंग की। सरकार की तरफ से जितने भी प्रोटोकॉल के थे, उन सभी को देखते को हमने शूट खत्म की। इस फिल्म की यूनिट में बहुत कम लोग थे और हमने केवल 25-26 दिन में इसकी पूरी शूटिंग खत्म कर ली थी।

Q. फिल्म को थियेटर्स के बजाए ओटीटी पर लाने की कोई खास वजह?

Q. फिल्म को थियेटर्स के बजाए ओटीटी पर लाने की कोई खास वजह?

A. ये बात मुझे कई लोगों ने बबली बाउंसर के लिए भी पूछी थी। लेकिन इंडिया लॉकडाउन की बात करें तो ये फिल्म बनी ही ओटीटी के लिए है। मुझे अंदाजा था कि इस फिल्म का विषय ऐसा है कि इसकी पहुंच बहुत व्यापक होगी और ओटीटी के जरीए ये 190 से ज्यादा देशों में रिलीज हुई है। ज़ी5 की पहुंच देश के काफी छोटे छोटे शहरों और गांवों में भी है , इसीलिए मुझे खुशी होगी कि यदि गांव गांव तक पहुंचे ये फिल्म। एक तो फिल्म का विषय ऐसा है और साथ इसमें कोई सुपरस्टार नहीं हैं, सभी परफॉर्मर्स हैं। इसीलिए मैं चाहता था कि ये ओटीटी पर ही आए और हर वर्ग के दर्शक इस फिल्म को देख पाएं। बबली बाउंसर को भी कितने ही परिवारों ने घर में बैठकर देखा, जो आजकल फिल्म देखने थियेटर जाते ही नहीं हैं। इंडिया लॉकडाउन भी ऐसी फिल्म है, जिससे भारत ही नहीं, विश्वभर में लोग इससे कनेक्ट कर पाएंगे।

Q. आपका भी मानना है कि थियेटर में अब सिर्फ बड़े स्तर पर बनी फिल्में ही चलेंगी?

A. निर्भर करता है कि फिल्म कैसी है। आज हम देख रहे हैं कि बड़े बड़े सुपरस्टार्स की फिल्म भी आ रही ओटीटी पर। मुझे लगता है कि क्रिएटिविटी की कोई सीमा नहीं होती है। ओटीटी और थियेटर्स के बीच में एक हल्की की ब्लर लाइन है, जो समय के साथ वो भी खत्म हो जाएगी। कितनी ही वेब सीरीज ओटीटी पर सुपरहिट रही हैं। ओटीटी का अपना अलग अवार्ड्स है। सिनेमा का अपना अलग जलवा है, जो चलता रहेगा। हां अभी कुछ वक्त से हमारी फिल्में उतना अच्छा नहीं कर पा रही हैं, साउथ की फिल्में ज्यादा चल रही हैं। लेकिन बॉलीवुड का वक्त था और हमेशा रहेगा। लोग सिनेमाघर जाएंगे, फिल्में देखेंगे।

Q. बीते दिनों एक इवेंट में अक्षय कुमार ने कलाकारों के फीस कम करने की बात कही है, ताकि फिल्में सीमित बजट में बन सकें। इस बारे में आपका क्या सोचना है?

Q. बीते दिनों एक इवेंट में अक्षय कुमार ने कलाकारों के फीस कम करने की बात कही है, ताकि फिल्में सीमित बजट में बन सकें। इस बारे में आपका क्या सोचना है?

A. यदि अक्षय कुमार ने ये बात कही है तो अच्छी बात है। मैं सराहना करता हूं। ऐसा होना चाहिए। मैं हमेशा कहता हूं कि हमें प्रैक्टिकल होना चाहिए। कभी फिल्म फ्लॉप होती नहीं होती है, बजट फ्लॉप होते हैं। मैंने हमेशा सीमित बजट में फिल्में बनाई हैं। इंडिया लॉकडाउन मेरी 15वीं फिल्म है। मेरी फिल्में कभी चली , कभी थोड़ी नहीं भी चली है, लेकिन उसने हमेशा अपना बजट रिकवर किया है। ये मेरी यूएसपी है कि मैं हमेशा बजट को कंट्रोल में रखता हूं। मैं फिल्म बनाता हूं.. कहानियों के साथ, एक्टर्स के साथ। दिक्कत तब आती है जब आप फिल्म ओवर बजट कर देते हैं। लोगों का क्या है, उनके पास आज कंटेंट की कमी नहीं है। लोग घर बैठे इंटरनेशनल कंटेंट देख रहे हैं। तो आपको बहुत सोच समझ कर फिल्मों पर काम करना होगा। उम्मीद है सिर्फ अक्षय कुमार ही नहीं, बाकी एक्टर्स भी इस बारे में प्रैक्टिल होकर सोचेंगे।

Q. आप हमेशा से ही सीमित बजट में फिल्में बनाने के लिए चर्चा में रहे हैं।

A. हां, क्योंकि मैं फिल्म बनाता हूं, प्रपोजल नहीं। मैंने हमेशा विषय प्रधान फिल्में बनाई हैं।

Q. इंडिया लॉकडाउन आपकी 15वीं फिल्म है। अब तक के सफर से कितने संतुष्ट रहे हैं?

Q. इंडिया लॉकडाउन आपकी 15वीं फिल्म है। अब तक के सफर से कितने संतुष्ट रहे हैं?

A. मैं फिल्मों का दीवाना रहा हूं बचपन से। चार साल तक वीडियो कैसेट लाइब्रेरी चलाया था मैंने। मैं उठते बैठते हमेशा फिल्में ही देखता हूं, उसी के बारे में सोचता हूं। मैं पागल हूं फिल्मों के पीछे। मुझे अच्छा लगता है कि मैंने जिंदगी में ऐसी फिल्में बनाई हैं, जिसे लोगों ने पसंद किया है। इतना प्यार दिया है। मैं बस सिनेमा बनाना चाहता हूं और इसीलिए मैं खुश हूं। मेरा ड्रीम था हमेशा फिल्ममेकर बनना। और जैसा कि मैंने कहा कि मैं घर घर जाकर वीडिया कैसेट देता था.. मैं तब से फिल्ममेकर ही बनना चाहता था। मुझे 21 साल हो गए फिल्म इंडस्ट्री में.. लोगों ने इतना प्यार दिया। मेरी फिल्मों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिले। मुझे पद्मश्री मिला। मैं किसी कैंप में नहीं हूं, किसी लॉबी में नहीं हूं। मैं फिल्म इंडस्ट्री में अपनी दुनिया में रहता हूं, अपनी फिल्में बनाता हूं, अपने टाइप का कंटेंट बनाता हूं, कभी कभी ब्रेक भी ले लेता हूं। मैं किसी भेड़ चाल में नहीं हूं। जब कोई विषय आकर्षित करती है, तो उस पर रिचर्स करता हूं और फिल्में बनाता हूं।

Q. अपने इतने सालों के अनुभव के बाद, आने वाले फिल्ममेकर्स को क्या सलाह देना चाहेंगे?

Q. अपने इतने सालों के अनुभव के बाद, आने वाले फिल्ममेकर्स को क्या सलाह देना चाहेंगे?

A. मुझे लगता है कि हमें कहानियां पर थोड़ा और इंवेस्ट करना चाहिए। सलाह यही देना चाहूंगा कि जैसी फिल्में बनाना चाहते हैं, वैसी फिल्में बनाएं। अच्छी फिल्में बनाएं, एक्सीपेरिमेंट करें। फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोग मेरे बारे में ही बोलते हैं कि यार मधुर कुछ भी कहीं भी देख लेता है तो उस पर फिल्म बना देता है। देश में कहीं भी कुछ भी होता है कि कोई ना कोई ट्विट आ ही जाता है कि अब मधुर भंडारकर इस पर फिल्म बनाएंगे। तो कहीं ना कहीं मैं इसे पॉजिटिव तरीके से भी लेता हूं.. कि लोगों को मुझ पर विश्वास है कि मधुर भंडारकर बेबाकी से किसी विषय पर फिल्म बना सकता है।

Q. लोगों ने आपको "रिएलिस्टिक फिल्ममेकर", "हार्ड -हिटिंग फिल्ममेकर" जैसे काफी टैग्स दे रखे हैं। इन टैग्स पर क्या सोचते हैं?

A. मुझे अच्छा लगता है। एक फिल्ममेकर के तौर पर मेरे ऑडियंस मेरे लिए सबसे ज्यादा मायने रखते हैं। जो ऑडियंस है, वो मेरे स्टार हैं। दर्शक मेरे काम को सराहती है, तो मुझे अच्छा लगता है। मैं आज जो भी हूं, दर्शकों की वजह से हूं। मैंने कहा ना कि मैं किसी कैंप से नहीं हूं, मेरा कोई लॉबी नहीं है, इंडस्ट्री में मेरा कोई दोस्त नहीं है, मैं अपना ही सिनेमा बनाता हूं। मुझे यही अच्छा लगता है। मुझे खुशी है कि इतने सालों तक मैंने अपना सिनेमा बनाया, बिना किसी गॉडफादर, बिना किसी लॉबी के।

Q. इंडिया लॉकडाउन के बाद आपने किसी फिल्म पर काम शुरु किया है?

A. फिलहाल नहीं। अभी मैं थोड़ा ब्रेक लूंगा, खुद को समय दूंगा। जनवरी के बाद ही मैं अब किसी नई फिल्म पर काम शुरु करूंगा।

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