Exclusive: मैं भी हीरोइन बन सकती थी, सलमान खान के साथ मैंने 'औज़ार' में डांस किया था- इला अरुण
हिंदी सिनेमा के अनमोल कलाकारों में विशेष स्थान इला अरुण का भी है। बहुमुखी प्रतिभा की धनी इला अरुण 67 की उम्र में भी एक्टिंग से अपना कद फिल्म दर फिल्म ऊंचा करती जा रही हैं। फिर चाहे वह 'जोधा अकबर' में महामंगा की दमदार भूमिका में हो। या फिर विद्या बालन की 'शेरनी' में एक छोटा लेकिन खास किरदार।
इला अरुण ने अपने नाम के आगे गुणों का ऐसा खजाना जुटाया है जो कि हर किसी के बस की बात नहीं है। गायक, डांसर, अभिनेत्री होने के साथ वह लेखक भी हैं। Filmibeat Hindi फिल्मीबीट हिंदी से हुई खास बातचीत में बहुआयमी इला अरुण ने खुद को शेरनी बताया है। उन्होंने ये साफ तौर पर कहा है कि वो चाहती तो शबाना आजमी और जया बच्चन के साथ लीड अभिनेत्रियों की फेहरिस्त में शामिल हो सकती थीं।

हमारे सवालों के आगे इला अरुण के जवाब की रफ्तार ऐसी रही कि इस इंटरव्यू को उन्हीं की जुबानी में पढ़ना अधिक दिलचस्प है। चलिए बिना समय गंवाए खुद जानते हैं ईला अरुण से।

मैं तो वो शेरनी हूं जो हर बार दहाड़ती हूं
मेरे लिए जीवन में कई बार शेरनी बनने का मौका आया है। क्योंकि मैंने हमेशा माना कि औरत को भीगी बिल्ली नहीं शेरनी होना चाहिए। जब भी किसी ने औरत शेरनी को मारने की कोशिश की, उसके उसकी जगह से हटाने की जुर्रत की तो ये ना भूले की मैं राजस्थान की मिट्टी से हूं। जोशेरनियों का गढ़ है। यही वजह है कि मेरे भीतर की शेरनी हमेशा जिंदा है और रहेगी।

मेरी मां सबसे बड़ी शेरनी, तब महिलाओं को दबा कर रखते थे
मेरी मां मेरे जीवन की सबसे बड़ी शेरनी थीं। जिनके पास सात बेटियां और दो बेटे थें। मध्यम वर्गीय परिवार से आने के बाद भी सब अपने क्षेत्र में कुछ ना कुछ कर रहे हैं। जहां पर उस युग में लड़कियों को दबा कर रखा जाता था, उन्हें शिक्षा नहीं दी जाती थी। लड़कियों की अपनी कोई सोच ना हो। ऐसे में मेरी मां ने शेरनी बन कर अपनी सब बेटियों को आगे बढ़ाया। उससे बढ़कर शेरनी मेरी असल जिंदगी में और कोई नहीं होगी।

फिल्म जगत में शबाना आजमी और फिर विद्या बालन
फिल्म जगत में रोल मॉडल में मेरे लिए शबाना आजमी रही हैं। उसके बाद छोटी शेरनी मैं विद्या बालन को कहूंगी। क्योंकि शबाना जब भी पर्दे पर आती हैं तो बेधड़क आती हैं। उन्हें मैं मानती हूं सिनेमा की शेरनी। फिर विद्या बालन ने मुझे चकित किया है। वो एक जवान शेरनी हैं। विद्या कभी भी रिस्क लेने से पीछे नहीं हटी हैं।
हर समय हर तरह के किरदार को बेबाक तरीके से पर्दे पर निभाया हैंl फिर चाहे वो डर्टी पिक्चर हो या कहानी और अब शेरनी। अमिताभ बच्चन के साथ पा फिल्म भी की। इतनी छोटी सी लड़की।नई लड़कियों के बीच विद्या बालन शेरनी हैं।

शबाना आजमी और जया बच्चन ने ये साबित कर दिया
रहा सवाल मेरा तो मैं भीतर से कलाकार हूं। मुझे खुद को सबके सामने भिन्न तरीके से व्यक्त करने में खुशी मिलती हैं। चाहे में कविता लिखूं या थियेटर करूं। मेरा पहला इश्क थियेटर हैं। इसमें आप हर चीज से जुड़ते हैं। हालांकि मैं हीरोइन भी बन सकती थी। मैं जिस वक्त इंडस्ट्री में आई, उस समय जया बच्चन अपने करियर की ऊंचाई पर थीं। शबाना आजमी भी थीं। वे दोनों साधारण चेहरे वालीं अच्छी अभिनेत्रियां थीं।
मुझे तब ये नहीं पता था कि खुद को सबके सामने कैसे प्रस्तुत करना हैं। जो ग्लैमरस और बाकी चीज होती हैं। लेकिन जया और शबाना ने साबित कर दिया की ऐसी कोई बात नहीं है। आपको अच्छा कलाकार होना चाहिए। ग्लैमरस होने की जरूरत नहीं हैं।

मैंने सलमान खान के साथ कार में डासं भी किया
मेरे कहने का मतलब ये है कि अगर मैं चाहती और उसी दौर में घुस पड़ती तो मैं अच्छी शक्ल में थी फिर भी मैंने जो काम किया पर्दे पर अपना नाम किया। बढ़िया किरदार निभाने का मुझे मौका मिला। जिन निर्देशकों और कलाकारों के साथ लोग उस वक्त काम करने को तरस रहे थे। मैंने उनके साथ काम किया।
मैंने कमर्शियल सिनेमा भी किया। मुझे आज भी याद है सलमान खान के साथ मैंने 'औजार' फिल्म में कार में डांस भी किया हैं। उसी वक्त गाना 'दिल्ली शहर में मारो' गाना आया था तो लोग मुझे गायक ईला अरुण बुलाते थे। इसी वजह से मुझे औजार का गाना सलमान के साथ मिला था। मुझे श्याम बेनेगल, गोविंद निहलानी उसके बादआशुतोष गोवरिकर जैसे नामी निर्देशकों के साथ काम मिला। ये मेरे लिए बड़ी बात है।

संगीत ने इला अरुण को ब्रांड बना दिया
जब मुझे संगीत में सफलता मिली तो मेरे भीतर की एक्ट्रेस शेरनी जागी। लोग मुझे पूछते थे की आप गाती हैं तो, एक्ट्रेस बनके खुश हैं? मैं जवाब देती थी कि जब में गाती हूं तो उसमें भी कैमरे के सामने एक्टिंग करनी होती हैं।। किसी भी सफल गायक को सिंगिंग से अधिक उसे जाहिर करना भी आना चाहिए।
जब मेरे प्राइवेट एल्बम रेशम का रुमाल, अस्सी कली का लहंगा, इनकी कैसेट धड़ल्ले से दुनिया में बिकी उसके साथ ये वीडियो बनाने का दौर शुरू हुआ तो मैंने अपना स्टाइल ग्लैमर सामने लाया। अपने पहनावे में राजस्थान के संस्कृति को दिखाया। लोगों को पता चला कीइला अरुण इतनी ग्लैमरस हैं। इसके बादइला अरुण ब्रांड हो गई।

महामंगा का किरदार निभाया तो मुझे खलनायिका बना दिया
सिनेमा में ये कहानियों का दौर हैं। फिर भी कलाकारों को लकीर का फकीर नहीं होना चाहिए। जब मैंने चोली के पीछे गाया तो हजार गाने मेरे पास चोली पर ही आ गए। मैंने किसी के लिए नहीं किया। जोधा अकबर में मैंने महामंगा का किरदार निभाया तो टीवी से लेकर फिल्म तक मुझे खलनायिका का किरदार निभाने का प्रस्ताव मिला। मुझे वो करना नहीं था। मैं दिल से वैसी नहीं हूं। मैंने रात अकेली में ये साबित कर दिया कि मैं एकसंवेदनात्मक मां भी हो सकती हूं।

जो सिंगिंग ने दिया वो एक्टिंग ने नहीं दिया
मेरा यही कहना हैं कि कलाकार को अलर्ट होना चाहिए की अगर वैसा ही काम मिल रहा है तो कोशिश करो की लालच में ना जाओ। नहीं तो ऐसा रहता तो मैं ललिता पवार हो जाऊंगी। इससे फटाफट कमाई तो हो जायेगी। बाकी कलाकार गायब हो जाएगा।एक एक्टर की सबसे बड़ी संपत्ति है कि वो कितना अधिक भिन्न किरदार अपनी झोली में बटोर रहा है। हां, ये सच है कि जो प्यार और पहचान गाने ने मुझे दिया वो एक्टिंग ने कभी दिया नहीं।

देखिए कोरोना में क्या-क्या कांड सामने आए हैं
मैंने अपनी बेटी को भी यही कहा था कि काम बोलता है पीआर नहीं। कितना भी पीआर लगा लो,कितने भी बड़े डायरेक्ट के साथ पेज 3 में दिख जाओ, कितनी भी बड़ी पार्टी का हिस्सा बन जाओ। वो सब में बड़े कांड भी हुए हैं। कोरोना के समय ये खुल कर सामने आया कि कौन कहां, क्या कर रहा है, मैं इस मामले में लकी रही हूं।
मुझे लोगों ने काम के लिए बुलाया हैं। अब उल्टा ये हो गया है कि मैं लोगों से कह रही हूं की छोटे रोल मत दो बड़ा काम दो। हां, मैं रोज मेकअप लगा कर किसी की मां या नानी का रोल करके खुद को थकाना नहीं चाहती। मैं सराहनीयकाम इस उम्र भी करना चाहती हूं। जैसी शेरनी हैं। भले ही इसमें मेरा काम छोटा था लेकिन मुझे नोटिस किया गया। मुझे खुशी हैं की एक उम्दा टीम के साथ मैंने काम किया।


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