Exclusive Interview- पैसे की नहीं, शरीर की चिंता है, जो 40 साल पहले खाता था, वो आज नहीं खा पाता- अन्नू कपूर
हिंदी सिनेमा के दिग्गज और चर्चित अभिनेता का जिक्र होता है तो अन्नू कपूर का नाम इस फेहरिस्त में चमकता हुआ दिखाई देता है।उम्र के इस पड़ाव पर अन्नू कपूर बहुत कम कहानी के जरिए सिनेमा से रूबरू हो रहे हैं। जब भी वह स्क्रीन पर आते हैं तो अपना जादू छोड़ जाते हैं, फिर चाहे वह मिस्टर इंडिया हो या फिर विकी डोनर और ड्रीम गर्ल में उनकी यादगार भूमिका। इस बार वह लौट रहे हैं अमेजन प्राइम वीडियो की सीरीज क्रैश कोर्स के साथ।

एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में 40 साल से अधिक समय से अन्नू कपूर ने अपनी पकड़ को बतौर एक्टर,निर्माता, निर्देशक, होस्ट और गायक के तौर पर जमा कर रखा हुआ है। Filmibeat Hindi फिल्मीबीट हिंदी से हुई छोटी सी लेकिन खास मुलाकात में अन्नू कपूर ने जिंदगी के उस रंग की व्याख्या की जो कि हम सभी के दिल के करीब है। वो है बचपन। साथ ही अमेजन प्राइम वीडियो की सीरीज क्रैश कोर्स सीरीज पर भी चर्चा की। अन्नू कपूर का कहना है कि इस उम्र में मैं अब अपने शरीर और दिमाग को स्वस्थ रखना चाहता हूं। यही मेरी कोशिश रहती है। दूसरी बात अपने आचरण से ठीक रहना चाहता हूं।
अमेजन प्राइम वीडियो की सीरीज क्रैश कोर्स में आप एंग्री मैन की भूमिका में दिख रहे हैं?
मैं कोचिंग संस्थान के मालिक का किरदार निभा रहा हूं। आप जब यह सीरीज देखेंगे तो आपको मेरे किरदार के बारे में और भी जानकारी मिलेगी। मेरे किरदार में कई शेड्स हैं। मेरा किरदार अधिक महत्वाकांक्षी है। वह राज करना चाहता है। अपनी हुकूमत चाहता है। कई दफा वह क्रूर हो जाता है। यह 10 एपिसोड की ड्रामा सीरीज है। जो छात्र के जीवन के संघर्ष, कोचिंग सेंटर और शिक्षा के ईद-गिर्द घूमती है। जैसे ही मुझे इस किरदार के लिए संपर्क किया गया। इसके लिए मैंने तुरंत हामी भर दी।
कोचिंग सेंटर और बिजनेस के चलते क्या शिक्षा की अहमियत असल जिंदगी में दब चुकी है?
बिजनेस चलेगा ही तब जब बिजनेस चलाने वाले सकारात्मक नतीजा देंगे। हमारे देश के प्राइवेट और सरकारी शिक्षा संस्थान जो परिणाम नहीं दे पा रहे हैं वो कोचिंग सेंटर से मिल जाता है। बच्चों पर काम और शिक्षा का दबाव है। इतने सारे विषय हो गए हैं जो कि हमारे जमाने में नहीं थें। झक मार के पढ़ाई करनी ही है। तो यह बिजनेस है, इसमें कुछ गलत नहीं है। क्योंकि हमारे देश में जहां पर शिक्षा होनी चाहिए वो पौधा अभी बहुत कच्चा है। कोचिंग क्लास असल में एनर्जी बूस्टर करने की ड्रिंक है। माता-पिता बहुत पैसा कोचिंग क्लास में डाल रहे हैं। अगर बच्चा इसके बाद भी आगे नहीं निकल पाएगा तो कोचिंग क्लास बंद हो जायेंगे। इसलिए माता-पिता को खुश रखना जरूरी है। वो तब खुश होंगे जब उनके बच्चे आगे बढ़ जायेंगे। बिजनेस के लिहाज से सही है। जहां बिजनेस होगा वहां प्रतियोगिता होगी। जहां प्रतियोगिता होगी वहां पर एक मरेगा और दूसरा जिएगा।
इस सीरीज में दोस्ती भी दिखाई गई है, क्या आपको अपने कॉलेज के दिनों का कोई किस्सा याद है?
मैं तो कभी कॉलेज गया ही नहीं।मैं तो स्कूल का विद्यार्थी था। मैं कीचड़ के भीतर पैर डालकर स्कूल जाता था, हम लोग नीम के पेड़ के नीचे , हाथ में पाटी लेकर पढ़ाई करते थे। खाने के ब्रेक में रोटी खाते थे। नदी के पास की रेत हटाकर उसी का पानी पीते थे। उस वक्त यह गर्लफ्रेंड कहना भी बहुत बड़ी बात हो जाती थी। लड़की का नाम तक नहीं लिया जाता था। बहरहाल, उस की या समय की याद हमेशा रहेगी। तब जोश था। फिर जिंदगी की कड़वी याद का सामना करना पड़ता था। आपने कभी सोचा है कि बचपन क्यों इतना दिलचस्प होता है। बचपन भिखारी के बच्चे को भी याद आता है। बचपन मुकेश अंबानी को भी याद आता है। इसके पीछे वजह यह है कि मुकेश अंबानी ने जन्म लिया तो खाने का अभाव नहीं था। बचपन कीे एनर्जी उनको याद आता है। देखा जाए तो उम्र में बचपन का पड़ाव पार करने के बाद लोगों को आज पैसे की चिंता नहीं है। आज शरीर की चिंता है। जो मैं 40 साल पहले खाता था, वो आज मैं नहीं खा पाता था। इसलिए बचपन याद आता है क्योंकि जिंदगी की कड़वी हकीकत से सामना हो रहा है।


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