थियेटर में नकल नहीं होती: शबाना

यहां पेश है शबाना से बातचीत। शबाना का कहना है, "पहले हमारे पास केवल फिल्में या थियेटर ही होते थे लेकिन अब हमारे पास कलाकारों के लिए कई माध्यम हैं, वास्तव में यह बहुत अच्छा समय है। हर आयु वर्ग के कलाकारों को अर्थपूर्ण भूमिकाएं और अच्छे दर्शक मिल रहे हैं। पहले 30 वर्ष से अधिक उम्र की अभिनेत्रियों के लिए गिनी चुनी अच्छी भूमिकाएं होती थीं लेकिन अब परिदृश्य बदल गया है।"
अपनी सशक्त भूमिकाओं के लिए पहचानी जाने वाली शबाना ने कहा, "अब स्वतंत्र सिनेमा बहुत ज्यादा है। इससे हर उम्र के कलाकारों को यथार्थपूर्ण भूमिकाएं निभाने के कई अवसर मिल रहे हैं।" शबाना चण्डीगढ़ थियेटर महोत्सव में हिस्सा लेने के लिए आई हुई थीं। सोमवार शाम प्रदर्शित हुए उनके नाटक 'ब्रोकन इमेजेज' को यहां दर्शकों की खूब पसंद किया गया।
पांच बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी शबाना बॉलीवुड के उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल हैं जिन्होंने प्रायोगिक और मुख्यधारा के सिनेमा में भी सफलतापूर्वक काम किया है। उन्होंने 'अंकुर', 'निशांत', 'अर्थ', 'मासूम', 'गॉडमदर' और 'फायर' से लेकर 'हनीमून ट्रैवल्स प्रायवेट लिमिटेड', 'सॉरी भाई' और 'इट्स ए वंडरफुल आफ्टरलाइफ' जैसी फिल्मों में अभिनय किया है।
शबाना ने कई अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों में भी अभिनय किया है। थियेटर और फिल्मों के अपने अनुभवों के बारे में बाताते हुए शबाना कहती हैं दोनों में काम करने का अनुभव बेहद अलग होता है।
उन्होंने कहा, "थियेटर में रीटेक नहीं होते और फिल्में आपको नकल की अनुमति नहीं देतीं। थियेटर में अभिनय हमेशा कठिन होता है क्योंकि वहां हमेशा ही गलतियों की संभावना रहती है। थियेटर के लिए बहुत से धैर्य और एकाग्रता की जरूरत होती है। यह मनोरंजन के अलावा समाज में बदलाव लाने के लिए भी बहुत अच्छा माध्यम है।"


Click it and Unblock the Notifications











