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INTERVIEW: मैं एक्शन फिल्में भी कर लूंगा, लेकिन कुछ अलग होना चाहिए- आयुष्मान खुर्राना

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साल 2012 में फिल्म विकी डोनर से डेब्यू करने से लेकर 2018 तक आयुष्मान खुर्राना ने लगभग 9 फिल्में की हैं। लेकिन उनके फिल्मों की लिस्ट में ऐसी फिल्में हैं, जो शायद कोई और अभिनेता करने से पहले 10 बार सोचे। आयुष्मान ने इंटरव्यू के दौरान बताया कि फिल्म विकी डोनर को भी कई अभिनेताओं ने रिजेक्ट कर दिया था। लेकिन उन्होंने डेब्यू के लिए उस फिल्म का चुनाव किया क्योंकि उन्होंने विषय पसंद आया। 

श्रीराम राघवन के निर्देशन में बनी फिल्म अंधाधुन से आयुष्मान एक बार फिर दर्शकों का मनोरंजन करने वाले हैं। फिल्म 5 अक्टूबर को रिलीज होने वाली है। आयुष्मान के साथ अंधाधुन में राधिका आप्टे और तबू दिखेंगी। यह एक रोमांटिक थ्रिलर है। हाल ही में फिल्म के प्रमोशन के दौरान आयुष्मान ने फिल्मीबीट से खास बातचीत की, जहां उन्होंने अपनी फिल्मों पर खुलकर बातें कीं।

Ayushmann Khurrana

अपने किरदारों के चुनाव को लेकर आयुष्मान ने कहा- मुझे अलग तरह के विषय पर बनी फिल्में करने में मजा आता है। ऐसी फिल्में करने से पहले शायद कोई एक्टर 10 बार सोचे। विकी डोनर कई एक्टर्स ने रिजेक्ट की थी। लेकिन मैं खुश हूं कि मैंने वह फिल्म की। शुभ मंगल सावधान के साथ भी ऐसा ही। मुझे लगता है कि इन विषयों पर फिल्म बननी चाहिए। यह आज की जरूरत है।

यहां पढ़ें इंटरव्यू से कुछ प्रमुख अंश-

फ़िल्म का प्रोमो लोगों को काफी दिलचस्प लग रहा है। गानों की भी तारीफ हो रही है। अपने किरदार के बारे में कुछ बताएं?

फ़िल्म का प्रोमो लोगों को काफी दिलचस्प लग रहा है। गानों की भी तारीफ हो रही है। अपने किरदार के बारे में कुछ बताएं?

खुश हूँ कि लोगों को प्रोमो पसंद आ रहा है। अब श्रीराम राघवन की फ़िल्म है तो कुछ तो अलग होना ही है। मेरे किरदार पर भी सवालिया निशान है। लेकिन बस दर्शकों को कुछ ही दिनों में सारी असलियत पता चल जाएगी। दरअसल मैं पहली बार थ्रिलर फ़िल्म कर रहा हूँ तो जवाब भी काफी सोच समझ कर देना पर रहा है। कुल कहानी फिलहाल यही बता सकता हूँ कि अंधा आदमी एक मर्डर का गवाह बना दिया जाता है। जो अपने आप में एक सवाल है। आपको इस फ़िल्म में हर 5 मिनट में एक ट्विस्ट मिलेगा।

फ़िल्म में आपने एक अंधे आदमी का किरदार निभाया है। कितना मुश्किल रहा?

फ़िल्म में आपने एक अंधे आदमी का किरदार निभाया है। कितना मुश्किल रहा?

अंधे आदमी के सुनने की क्षमता गज़ब की होती है। फ़िल्म में मैं म्यूजिक भी बजाता हूँ। तो मैंने जाना कि बिना देखे आपको संगीत की बेहतरीन समझ होती है। लेकिन हां, एक अंधे आदमी का क़िरदार निभाना बहुत मुश्किल होता है।

अक्सर किरदार को निभाते वक़्त आप किसी ना किसी का रेफेरेंस लेते हो, कभी किसी आप मिलें हों या किसी को जानते हों। लेकिन आज तक किसी अंधे आदमी से मैं मिला नहीं था कि जिसका मैं रेफेरेंस ले सकूँ। और मैं किसी बॉलीवुड या हॉलीवुड फ़िल्म देखकर रेफेरेंस लेना नहीं चाहता था। तो मैंने कुछ समय ब्लाइंड स्कूल में बिताए, एक ब्लाइंड म्यूजिशियन से भी मिला, राहुल नाम है उसका, वो पियानो बजाते हैं। फ़िल्म में भी मैं पियानो ही सिखाता हूँ, लिहाज़ा, मैंने 4, 5 महीने तक पियानो ट्रेनिंग ली थी। यह किरदार काफी मुश्किल रहा था।

बॉलीवुड में कई फिल्में बनी हैं, जिसमें हीरो या विलेन अंधे होते थे। अक्षय कुमार हों ऋतिक रोशन या नसीरुद्दीन शाह। आपको यह करते वक़्त किसी किरदार को याद नहीं आई?

बॉलीवुड में कई फिल्में बनी हैं, जिसमें हीरो या विलेन अंधे होते थे। अक्षय कुमार हों ऋतिक रोशन या नसीरुद्दीन शाह। आपको यह करते वक़्त किसी किरदार को याद नहीं आई?

हां, मैंने इनकी फिल्में देखी भी हैं, लेकिन मैं किसी से रेफेरेंस नहीं ले सकता था। श्रीराम राघवन अपने किरदारों को लेकर बहुत सटीक रहते हैं। उन्हें रियल एक्टिंग चाहिए। आप विश्वास नहीं करेंगे कि पूरी फ़िल्म में हमने कहीं भी बॉडी डबल का इस्तेमाल नहीं किया है। पियानो भी मैंने खुद ही बजाया है, जबकि काफी आसानी से बॉडी डबल का इस्तेमाल किया जा सकता था।

रियल लाइफ में भी आप संगीत से जुड़े हैं। तो फ़िल्म के लिए यह कितना फायदेमंद रहा ?

रियल लाइफ में भी आप संगीत से जुड़े हैं। तो फ़िल्म के लिए यह कितना फायदेमंद रहा ?

बहुत ही ज़्यादा। बतौर म्यूजिशियन मेरे लिए थोड़ा आसान रहा। किसी नॉन म्यूजिशियन के लिये अंसभव ही था ये लगभग। शायद श्रीराम राघवन ने भी मुझे इस बात को ध्यान में रखकर ही कास्ट किया। मुझे पियानो सीखने में उतना वक़्त नहीं लगा।

फ़िल्म में आपके साथ राधिका आप्टे और तब्बू भी हैं। उनके साथ काम करना कैसा रहा ?

फ़िल्म में आपके साथ राधिका आप्टे और तब्बू भी हैं। उनके साथ काम करना कैसा रहा ?

राधिका आप्टे को मैं बहुत ही हिम्मती एक्ट्रेस मानता हूँ। जिस तरह वह अपनी फिल्में, अपने किरदार चुनती हैं। वह काफी अलग है। वहीं तब्बू का तो मैं हमेशा से फैन रहा हूँ। आप शुरुआती 90s की फ़िल्म देखेंगे तो उसमें एक्टिंग थोड़ी ऊंची की जाती थी। लाउड एक्टिंग बोल सकते हैं। लेकिन उस वक़्त से ही तब्बू ने अपनी एक्टिंग को रियल रखा है। हैदर हो या गोलमाल अगेन, उनके लिए किरदार में ढलना बहुत आसान होता है।

विकी डोनर से लेकर अब तक फिल्मों को लेकर आपका चुनाव काफी अलग रहा है। क्या कभी बॉलीवुड मसाला मारधाड़ वाली फिल्म आप स्वीकार करेंगे?

विकी डोनर से लेकर अब तक फिल्मों को लेकर आपका चुनाव काफी अलग रहा है। क्या कभी बॉलीवुड मसाला मारधाड़ वाली फिल्म आप स्वीकार करेंगे?

हां, क्यों नहीं। लेकिन उसमें भी कुछ अलग होना चाहिए। मुझे अलग तरह के विषय पर बनी फिल्में करने में मजा आता है। ऐसी फिल्में करने से पहले शायद कोई एक्टर 10 बार सोचे। विकी डोनर कई एक्टर्स ने रिजेक्ट की थी। लेकिन मैं खुश हूं कि मैंने वह फिल्म की। शुभ मंगल सावधान के साथ भी ऐसा ही। मुझे लगता है कि इन विषयों पर फिल्म बननी चाहिए। यह आज की जरूरत है। और बतौर अभिनेता या सिनेमा का हिस्सा होने के नाते यह हमारी जिम्मेदारी है कि उन विषय को ऊपर लाएं, जिस पर बात होनी चाहिए लेकिन लोग कतराते हैं।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने 377 को लेकर ऐतिहासिक फैसला दिया है। आपका क्या कहना है ? क्या आप कभी इस सब्जेक्ट पर फ़िल्म करना चाहेंगे ?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने 377 को लेकर ऐतिहासिक फैसला दिया है। आपका क्या कहना है ? क्या आप कभी इस सब्जेक्ट पर फ़िल्म करना चाहेंगे ?

हां यह सच में एक ऐतिहासिक फैसला है। इससे पता चलता है कि हम एक प्रगतिशील भारत की ओर बढ़ रहे हैं। इस तरह के फैसलों की वजह से ही आज न्याय व्यवस्था पर हमारा भरोसा टिका है। हालांकि अभी भी कई छोटी लड़ाइयां बाकी है। आज भी समाज में कुछ लोग पिछड़ी सोच के साथ रहते हैं। हमें ज़रूरत है उनकी सोच बदलने की। सुप्रीम कोर्ट ने तो फैसला सुना दिया। अब ज़रूरत है कि लोग भी इसे खुली सोच और दिल से अपनाएं। आज भी लोगों को इस विषय पर शिक्षित करने की ज़रूरत है। उन्हें समझना होगा कि यह हर इंसान का व्यक्तिगत फैसला है।
फ़िल्म की बात करें तो हां ज़रूर, यदि इस सब्जेक्ट पर कोई फ़िल्म बने तो ज़रूर करना चाहूंगा।

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    English summary
    Recently In an interview Ayushmann Khurrana shared his view on doing films with quirky subjects. He said, as an actors it's our responsibility to bring taboo subjects on screen, so that people can atleast start talking on that.

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