ग्रैमी से फिर जुड़ा भारत का नाता

By Staff

ग्रैमी से फिर जुड़ा भारत का नाता
अय्यर कहते हैं कि घर में उनकी बहन का पियानो था और वो उससे खेलते रहते थे. धीरे-धीरे वो उसमें रमते चले गए. अमरीका में संगीत के क्षेत्र में मशहूर ग्रैमी पुरस्कारों के लिए इस वर्ष दो भारतीय शास्त्रीय संगीतकारों विजय अय्यर और चंद्रिका टंडन को भी नामांकित किया गया है.

इससे पहले बॉलीवुड संगीतकार एआर रहमान, पंडित रविशंकर, विश्व मोहन भट्ट और ज़ाकिर हुसैन जैसे भारतीय कलाकारों को ग्रैमी पुरस्कार मिल चुका है. भारतीय मूल के अमरीकी जैज़ संगीतकार विजय अय्यर को वर्ष 2009 के उनके जैज़ अल्बम-हिस्टोरिसिटी के लिए इस साल ग्रैमी पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है.

बीबीसी हिंदी से विशेष बातचीत में अय्यर ने बताया कि वो इस नामांकन से चकित हैं और किस तरह भारत आकर संगीत पर काम करना चाहते हैं. उन्होंने कहा, ''मुझे तो हैरत हुई जब मैंने सुना कि मुझे ग्रैमी के लिए नामांकित किया गया है. मुझे तो इस पुरस्कार के लिए चुने जाने की प्रक्रिया के बारे में भी ज़्यादा कुछ मालूम नहीं है. मुझे बस यही पता था कि मेरा अल्बम पुरस्कार समिति के समक्ष जमा किया गया है, लेकिन हज़ारों लोगों इस सूची में शामिल थे. मैं तो इस बात से ही खुश हूं कि इतनी लंबी सूची में इस समिति ने मेरा नाम पहचाना.''

छोटी उम्र में ही विजय अय्यर को संगीत का शौक था. लेकिन उन्होंने शुरू में जैज़ संगीत के लिए किसी प्रकार का बाकायदा प्रशिक्षण नहीं लिया था, बल्कि ख़ुद ही अपने आपको सिखाना शुरू किया.

वह कहते हैं, “मैंने जैज़ कई सालों के प्रशिक्षण से ख़ुद ही सीखा. जब मैं बहुत छोटा था तब मैंने वॉयलन सीखना शुरू किया. मेरे घर में मेरी बहन का पियानो था और मैं उससे खेलता रहता था. बस धीरे-धीरे मैं उसमें रमता चला गया."

न्यूयॉर्क के रॉचेस्टर शहर में हाई स्कूल में उन्हें पियानो ग्रुप में चुना गया और वहां उन्होंने जैज़ पर अधिक ध्यान देना शुरू किया. उसके बाद जब अय्यर ने विज्ञान की पढाई के लिए बर्कले विश्वविद्यालय में दाखिला लिया तो वहां भी जैज़ सीखना और बजाना जारी रखा. वहीं उन्होंने प्रशिक्षित तरीके से जैज़ बजाना शुरू किया.

अमरीका में जन्मे, 39 वर्षीय विजय अय्यर लगभग दो दशक से जैज़ संगीत से जुड़े हुए हैं. विजय अय्यर के पिता मूल रूप से तमिलनाडु के तिरुनवेल्ली कट्टनायम गांव के रहने वाले हैं. उनकी मां मूल रूप से मुंबई की रहने वाली हैं. माता-पिता ने उन पर ज़ोर डाला कि वह ऐसी पढ़ाई करें जो उन्हें जीवन में स्थिरता प्रदान करे. उन्होंने बताया, ''मैं तो वैज्ञानिक बनने की तैयारी कर रहा था, इसलिए मैं भौतिकी और गणित की पढ़ाई भी कर रहा था. मेरे माता-पिता भी चाहते थे कि मैं कोई ऐसा करियर चुनूं जिसमें आर्थिक स्थिरता रहे.''

कैलिफ़ोर्निया में विज्ञान के साथ-साथ अय्यर संगीत की भी पढ़ाई करते रहे. फिर भौतिकी में एमएससी करने के बाद उन्होंने तय कर लिया कि उन्हे वैज्ञानिक नहीं संगीतकार ही बनना है. उसके बाद उन्होंने विज्ञान और संगीत को मिलाकर पीएचडी की पढ़ाई शुरु की. जिससे उन्हे विभिन्न संस्कृतियों के संगीत को जोड़कर कुछ नए आयाम ढूंढने में कामयाबी मिली.

उन्होंने जैज़ पर ही कला औऱ तकनीक में भी पीएचडी की है. अफ़्रीका के विभिन्न तरह के संगीत खासकर जैज़ की शुरूआत के बारे में भी उन्होंने गहन अध्ययन किया है. अय्यर को अपने जैज़ संगीत में भारतीय शास्त्रीय संगीत और पाश्चात्य संगीत का मिश्रण करने के लिए भी विजय अय्यर को सराहा जाता है.

वो कहते हैं, ''मैने भारतीय शास्त्रीय संगीत तो सुना था, खासकर कर्नाटक संगीत. मैंने भारतीय संगीत में कभी कोई प्रशिक्षण नहीं लिया, लेकिन खुद ही सुनकर उसे जैज़ से जोड़कर प्रयोग करने की कोशिश की. पॉप और पाश्चात्य शास्त्रीय संगीत तो बचपन से ही सुनता रहा हूं, यही वजह है कि उसे जैज़ में शामिल करने में मुझे आसानी हुई.''

अय्यर कहते हैं कि उनका संगीत अगर बॉलीवुड में किसी को पसंद आया तो हिंदी फ़िल्मों में भी काम कर सकते हैं. विजय अय्यर कई बार भारत आए हैं. मुंबई के 'ब्लूफ़्रॉग क्लब" के संगीतकारों का ज़िक्र करते हुए अय्यर बताते हैं कि जैज़ संगीत में अब लोगों की रूचि बढ़ रही है और वो मुंबई जाकर संगीत पर काम करना चाहता हैं.

अय्यर कहते हैं, '"मैं भारतीय संगीतकारों के साथ काम करता रहा हूं. अगर मेरा संगीत बॉलीवुड में किसी को पसंद आया तो हिंदी फ़िल्मों में भी काम कर सकता हूं.'' वैसे वो बॉलीवुड की मसाला फ़िल्में ज़्यादा नहीं देखते हैं, हां शोले उनकी पसंदीदा फ़िल्म है. अय्यर का रुझान कला फ़िल्मों की ओर ज़्यादा है. एक शास्त्रीय संगीतकार के तौर पर अपनी जद्दोजहद का ज़िक्र करते हुए अय्यर कहते हैं कि अमरीका में जैज़ अब भी लोकप्रीय नहीं हुआ है. यही वजह है कि वो किसी को ये यह राय नहीं देंगे कि वह शास्त्रीय संगीत को अपनी जीविका बनाए. उनका मानना है कि आर्थिक स्थिरता के लिए कोई और काम करना भी ज़रूरी है.

अय्यर कहते हैं, ''मैं तो अब बहुत दिनों से यही काम कर रहा हूं और इसे नहीं छोड़ सकता. मैं चाहता हूं कि जैज़ संगीत को लोकप्रिय बनाया जाए और उसके लिए मैं कोशिश कर रहा हूं. अब नए लोग भी इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं. कुछ जैज़ संगीतकारों के साथ मिलकर हमारी कोशिश है कि अमरीका में जैज़ के इतिहास को देखते हुए इस कला को पुनर्जीवित करने की कोशिश की जाए.''

फिलहाल जैज़ के कॉन्सर्ट के साथ साथ विजय अय्यर न्यूयॉर्क विश्विद्यालय में और कई अन्य संस्थानों में जैज़ और अन्य संगीत की शिक्षा भी देते हैं. हाल ही में उन्हें जीक्यू मैगज़ीन में 50 सबसे ज़्यादा असर वाले ग्लोबल इंडियन्ज़ में भी शामिल किया गया था. ग्रैमी पुरस्कार लॉस एंजेलेस में 2011 के फ़रवरी महीने में घोषित किए जाएंगे.

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