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बाघों के संरक्षण के लिए लियोनार्डो

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Leonardo De Caprio

सलीम रिज़वी, न्यूयॉर्क से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

हॉलीवुड स्टार लियोनार्डो डी कैप्रियो अब भारत में बाघों की घटती संख्या को रोकने में मदद करेंगे. इसके लिए वह खुद भारत जाकर बाघों के बारे में आम लोगों में और जानकारी बढ़ाने की मुहिम में शामिल होंगे. इस सिलसिले में न्यूयॉर्क में लियोनार्डो डी कैप्रियो ने भारत के पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश से मुलाकात भी की है.

कोएलिशन फ़ॉर रेनफ़ारेस्ट नेशन्स नामक एक संस्था ने बाघों की घटती संख्या के बारे में जानकारी बढ़ाने के मकसद से न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम आयोजित किया था जिसमें हॉलीवुड स्टार लियोनार्डो डी कैप्रियो और भारतीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश समेत कई देशों के मंत्रियों और अधिकारियों ने शिरकत की.

भारतीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा,“लियोनार्डो डी कैप्रियो बाघों के संरक्षण में मदद करने के लिए काफ़ी उत्साहित हैं और बढ़ चढ़ कर इस मुहिम में हिस्सा लेना चाहते हैं. औऱ उनके जैसे स्टार की मदद से आम लोगों में बाघों की घटती संख्या के बारे में जानकारी बढ़ाने में कोशिशों में मदद मिलेगी." लियोनार्डो डी कैप्रियो का इरादा है कि अब वह भारत जाकर जंगलों में बाघों का मुआयना करेंगे और विश्व भर में भारतीय बाघों की घटती संख्या को रोकने के लिए मुहिम में शामिल होंगे.

हॉलीवुड की मशहूर फ़िल्मों जैसे टाइटेनिक और बॉडी ऑफ़ लाईज़- के स्टार लियोनार्डो डी कैप्रियो वर्लड वाइल्ड लाइफ़ फ़ंड के दूत भी हैं. लियोनार्डो डी कैप्रियो ने बाघों के बारे में कहा, “बाघों को बचाकर हम बहुत कुछ बचा सकते हैं. दुनिया भर में बाघों की संख्या तेज़ी से घट रही है और इसका असर विश्व भर के पर्यावरण पर भी पड़ेगा. इसलिए विश्व भर में बाघों को बचाने की मुहिम में तेज़ी लाना ज़रूरी है."

अभी लियोनार्डो डी कैप्रियो की भारत यात्रा की कोई तारीख तय नहीं हुई है लेकिन कुछ महीनों के अंदर ही उनके भारत जाने की बात कही जा रही है. 35 वर्षीय अभिनेता का इरादा है कि सन 2022 तक बाघों की संख्या दोगुना करने के मकसद से वह अपनी मुहिम के ज़रिए दो करोड़ डॉलर जमा कर लेंगे.

बाघों की घटती संख्या

भारत में एक अंदाज़ के अनुसार करीब 1400 बाघ ही बचे हैं जबकि विश्व भर में बाघों की कुल संख्या करीब 3200 ही रह गई है. पिछले सौ वर्षों में बाघों की संख्या 97 प्रतिशत घट गई है. लियोनार्डो डी कैप्रियो पहले ही कई देशों में जाकर वन संरक्षण जैसे मुद्दों पर काम कर रहे हैं. और हाल ही में उन्होंने बाघों को बचाने के मकसद से नेपाल का भी दौरा किया था.

लियोनार्डो डी कैप्रियो के भारत जाकर बाघों को बचाने की मुहिम में शामिल होने के लिए राज़ी होने पर कोएलिशन फ़ॉर रेनफ़ारेस्ट नेशन्स के निदेशक केविन कॉनरेड ने खुशी जताई और कहा, “लियोनार्डो डी कैप्रियो अब दुनिया भर में घूम कर बाघों की घटती संख्या पर जलवायु परिवर्तन के असर को भी आंकने की कोशिश कर रहे हैं. हम चाहते हैं कि वह भारत जाकर जलवायु, वन और जंगली जानवरों से जुड़े मामलों पर भी भारत के साथ मिलकर काम करें."

भारत के फ़िल्म सुपरस्टार अमिताभ बच्चन भी बाघों को बचाने की मुहिम में शामिल हैं. भारत में सरकारी तौर पर भी कई दशकों से बाघों को बचाने की कोशिशें की जाती रही हैं.

दो साल पहले ही प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने बाघों की संख्या में भारी कमी हो जाने के कारण एक राष्ट्रीय स्तर के जंगली जानवरों से संबंधित अपराध ब्यूरो की स्थापना भी की जिसमें पुलिस, पर्यावरण संस्थाएं औऱ कस्टम विभाग के अधिकारियों को भा शामिल किया गया जिससे बाघों के गैरकानूनी शिकार पर रोक लगाई जा सके.

लेकिन इस सबके बावजूद बाघों को मारने का काम जारी है. वाइल्ड लाइफ़ प्रोटेक्शन सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के अनुसार पिछले साल करीब 32 बाघों का शिकार किया गया, औऱ इस साल भी तीन बाघ मार दिए गए. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाघों के शरीर के हिस्सों का व्यापार करना वर्जित है.

लेकिन फिर भी बाघों को मारकर उसके कई हिस्सों जैसे खाल, हड्डियां, पंजे और दांत को विश्व के विभिन्न हिस्सों में महंगे दाम पर बेचा जाता है. खासकर चीन, थाईलैंड और बर्मा जैसे देशों में यह हिस्से पारंपरिक दवाओं के मिश्रण में प्रयोग किए जाते हैं

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