बॉलीवुड की इन फिल्मों ने बढ़ाया है हिंदी भाषा का महत्व, देखें लिस्ट

युवा भारत पर हिंदी की तुलना में अंग्रेजी भाषा का अधिक प्रभाव पड़ता जा रहा है। आम बोल चाल में भी अंग्रेजी का प्रयोग काफी बढ़ चुका है। ऐसे में हमारी फिल्में भी इससे अछूती नहीं हैं। फिल्मों में भी शुद्ध हिंदी की जगह पर हिंग्लिश का अधिक प्रयोग किया जाता है। खासतौर पर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अंग्रेजी भाषा का प्रभाव दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। लेकिन बॉलीवुड में बनी कुछ फिल्में ऐसी भी हैं, जिन्होंने न सिर्फ हिंदी का मान बढ़ाया है बल्कि यह भी समझाया है कि हिंदी बोलना हिनता का नहीं बल्कि गर्व का प्रतीक है। हिंदी के साथ भारतीय दर्शकों का भावनात्मक जुड़ाव होता है।

आइए बॉलीवुड की ऐसी फिल्मों के बारे में जानते हैं जिन्होंने हिंदी के महत्व को बढ़ाया-

 गोलमाल :

गोलमाल :

साल 1979 में आई फिल्म 'गोलमाल' बॉलीवुड की प्रमुख कॉमेडी फिल्मों में गिनी जाती है। फिल्म में अमोल पालेकर, उत्पल दत्त, बिन्दिया गोस्वामी, दीना पाठक, ओम प्रकाश, युनुस परवेज ने प्रमुख किरदार निभाये थे। फिल्म में लोगों के बीच खूब नाम भी कमाया था। 'गोलमाल' ने युवाओं के बीच हिंदी की दुर्दशा के साथ-साथ हिंदी के महत्व को काफी बारीकी से समझाया था।

चुपके-चुपके :

चुपके-चुपके :

जिन लोगों को पुरानी फिल्में पसंद हैं, वे साल 1975 में आई फिल्म 'चुपके-चुपके' को कैसे भूल सकते हैं। फिल्म में धर्मेंद्र, शर्मिला टैगोर, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन और ओम प्रकाश मुख्य किरदार में नजर आए थे। फिल्म का मुख्य आकर्षण ड्राइवर बने धर्मेंद्र की शुद्ध हिंदी भाषा की प्रयोग थी। फिल्म में अमिताभ बच्चन बॉटनी के प्रोफेसर बने थे, जबकि ओमप्रकाश ने शर्मिला टैगोर के जीजाजी का किरदार निभाया था।

हिंदी मीडियम :

हिंदी मीडियम :

साल 2017 में आयी फिल्म 'हिंदी मीडियम' ने हिंदी भाषा पर अधिक बल दिया था और इसके महत्व को समझाया था। फिल्म में इरफान खान और पाकिस्तानी अभिनेत्री सबा करीम ने मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म की कहानी एक हिंदी मीडियम माता-पिता की थी जो अपनी बच्ची का एडमिशन अंग्रेजी मीडियम की एक स्कूल में करवाना चाहते हैं। अंग्रेजी भाषा पर कम पकड़ होने की वजह से इरफान खान को अपनी बेटी का एडमिशन करवाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी।

इंग्लिश-विंग्लिश :

इंग्लिश-विंग्लिश :

साल 2015 में आयी श्रीदेवी की फिल्म 'इंग्लिश-विंग्लिश' में प्रवासी भारतीयों की कहानी दिखायी गयी थी। फिल्म की कहानी एक ऐसी महिला पर आधारित है जो विदेश में टूटी-फूटी अंग्रेजी भाषा में बात करती है। उसके बच्चे उसे स्कूल में होने वाली अभिभावकों की बैठक में उसे लेकर जाने में शर्मिंदगी महसूस करते हैं। इसके बाद वह महिला अंग्रेजी भाषा सीखकर फर्राटेदार अंग्रेजी तो बोलती है लेकिन उसने हिंदी को नहीं छोड़ा।

नमस्ते लंदन :

नमस्ते लंदन :

साल 2007 में आयी फिल्म 'नमस्ते लंदन' ने विदेशी धरती पर हिंदी को कम आंकने वाले अंग्रेजों को मुंहतोड़ जवाब देने जैसा था। फिल्म में अक्षय कुमार ने देसी मुंडे का किरदार निभाया था जिसने विदेशियों के साथ-साथ प्रवासी उन भारतीयों को जो अपनी ही सभ्यता और संस्कृति को भूलते जा रहे हैं, उन्हें भारतीय संस्कृति और इसकी खूबसूरती का अहसास करवाया था। फिल्म में कैटरीना कैफ, ऋषि कपूर प्रमुख किरदारों में नजर आए थे।

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