For Quick Alerts
    ALLOW NOTIFICATIONS  
    For Daily Alerts

    12 मार्च बम्बई बम ब्लास्ट - मैंने संजय को थप्पड़ मारा, उसने सब कुबूल किया- पूर्व डीसीपी राकेश मारिया

    |

    आज 12 मार्च है। 1993 में आज के काले दिन, बम्बई धमाकों से दहल गई थी और इन धमाकों में एक नाम सबको चौंका गया था - संजय दत्त। संजय दत्त ने सालों इसकी सज़ा भुगती और आखिरकार उन्हें आतंकवादी होने के तमगे से बरी कर दिया गया था। उन्हें गिरफ्तार करने वाले ऑफिसर थे डीसीपी राकेश मारिया।

    अपनी किताब में राकेश मारिया उस दिन का ज़िक्र करते हैं जब उन्होंने संजय दत्त को गिरफ्तार किया था। इस लेख को स्क्रोल ने छापा है जिसके कुछ अंश हम आपको लिए अनुवाद कर रहे हैं। पूरा लेख आप यहां पढ़ सकते हैं।

    संजय दत्त की गिरफ्तारी के बाद किसी को यकीन ही नहीं हुआ कि वो आतंकवादी हैं। उनके पिता सुनील दत्त ने राकेश मारिया से बात करते हुए कहा था कि मेरे खून के एक एक कतरे में देशप्रेम है। मेरा बेटा ऐसा कर ही नहीं सकता है।

    जवाब में राकेश मारिया ने कहा था कि ये दुखद है लेकिन आपके बेटे ने ऐसा किया है। पुलिस क्यों यूं ही किसी पर भी बिना वजह इतना बड़ा आरोप लगाएगी। राकेश मारिया ने संजय दत्त को जेल से बुलवाया और सुनील दत्त से कहा कि आप खुद अपने बेटे से क्यों नहीं पूछ लेते?

    संजय दत्त, सुनील दत्त को देखते ही उनके पैरों में गिर गए और कहा - मुझे माफ कर दीजिए, मुझसे गलती हो गई। और फिर उन्होंने वो सब कुबूल किया जो उन्होंने राकेश मारिया के सामने कुबूल किया। पढ़िए राकेश मारिया के सामने संजय ने क्या क्या कुबूल किया -

    मॉरीशस से लौटे संजय दत्त

    मॉरीशस से लौटे संजय दत्त

    बम्बई बम ब्लास्ट के बाद 19 अप्रैल 1993 को संजय दत्त भारत लौट रहे थे। उनकी फ्लाईट दो बजे आनी थी। उनका परिवार, उनके सपोर्टर और मीडिया, एयरपोर्ट पर मौजूद था। राकेश मारिया की स्ट्रैटेजी थी कि अरेस्ट तुरंत हो जाए और किसी को भी कोई भी ड्रामा करने का मौका ना मिले।

    ऐसे हुए गिरफ्तार

    ऐसे हुए गिरफ्तार

    राकेश मारिया, सादे कपड़ों में एयरोब्रिज पर इंतज़ार कर रहे थे। संजय दत्त फर्स्ट क्लास में यात्रा कर रहे थे और प्लेन से निकलने वाले पहले यात्री थे। राकेश मारिया उन्हें किनारे ले गए और कहा, "मैं डीसीपी राकेश मारिया। अपना बोर्डिंग पास और पासपोर्ट दो।"

    मजबूर थे संजय दत्त

    मजबूर थे संजय दत्त

    संजय दत्त हैरान थे और मजबूरी में जैसा कहा गया, वैसा उन्होंने किया। राकेश मारिया ने अपने ऑफिसर को बोर्डिंग पास और पासपोर्ट पकड़ाया। संजय दत्त एयरोब्रिज से नीचे उतरे। प्लान के मुताबिक दो गाड़ियां खड़ी थीं। एक राकेश मारिया की एंबेज़डर कार और दूसरी क्राइम बांच की एक जीप। राकेश कार में बैठे, साथ में ड्राईवर था और पीछे, संजय दत्त, दो कॉन्सटेबल के बीच बैठे।

    नहीं बोला एक शब्द

    नहीं बोला एक शब्द

    दोनों गाड़ियां चल पड़ीं, किसी ने संजय से एक शब्द नहीं कहा। राकेश मारिया ने सबको सख्त हिदायत दी थी कि कोई कुछ भी नहीं बोलेगा। चाहे संजय कितना भी, कुछ भी पूछे। संजय दत्त बार बार पूछते रहे कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है। वो गिड़गिड़ाते रहे कि उनके पिता, परिवार सब इंतज़ार कर रहे हैं। आप ऐसा नहीं कर सकते, मुझे एक बार उनसे मिलने दीजिए, मुझे मेरे पिता से मिलने दीजिए, संजय कहते रहे लेकिन किसी ने एक शब्द नहीं बोला। दोनों कॉन्सटेबल चुपचाप बैठे रहे, किसी ने संजय को देखा तक नहीं।

    एकदम अलग थलग रखा गया

    एकदम अलग थलग रखा गया

    एयरपोर्ट से संजय को सीधा क्रॉफोर्ड मार्केट में क्राइम ब्रांच लाया गया। उसे एक कमरे में रखा गया जिसमें एक बाथरूम था। राकेश मारिया ने सुबह ही ये कमरा संजय के लिए फिक्स कर लिया था। कमरे में कुछ चुने हुए गार्ड्स लगाए गए। किसी को उससे बात करने की इजाज़त नहीं थी, सिवाय राकेश मारिया के। राकेश मारिया के आदेश के बिना कोई उस कमरे में नहीं जा सकता था। अगर संजय को बाथरूम जाना था तो दरवाज़ा खोलकर जाने के आदेश दिए गए। सिगरेट पीना भी मना था।

    होनी थी पेशी

    होनी थी पेशी

    इस बीच राकेश मारिया के। ऑफिसर ने संजय दत्त का सामान एयरपोर्ट से लिया और उनके परिवार को सौंप दिया जो एयरपोर्ट के बाहर उनका इंतज़ार कर रहा था। अगले दिन सुबह साढ़े नौ बजे संजय दत्त को MN Singh के सामने पेश होना था। 8 बजे राकेश उस कमरे में गए। रात भर संजय से किसी ने बात नहीं की थी।

    टूट गए थे संजय

    टूट गए थे संजय

    परिवार का साथ और किसी से बात ना करने के कारण संजय टूट चुका था और अकेला था। अगर उसे परिवार से मिलने दे दिया गया होता तो वो एक अलग ही आदमी होता। राकेश मारिया ने संजय दत्त से पूछा कि तुम मुझे सच बताओगे या मैं ही तुम्हारी कहानी बताऊं?

    लगाया ज़ोरदार थप्पड़

    लगाया ज़ोरदार थप्पड़

    सर मैंने कुछ नहीं किया है, संजय दत्त एक कुर्सी पर बैठा था। उन्होंने राकेश मारिया की तरफ देखा और अपनी दुख भरी आंखों में दर्द के साथ कहा सर मैंने कुछ भी नहीं किया है। राकेश मारिया, पिछले कुछ दिनों से इस केस में उलझे थे। उनसे बर्दाश्त नहीं हुआ और राकेश मारिया ने संजय दत्त को एक ज़ोर का थप्पड़ मारा। संजय कुर्सी से पीछे झुक गए, उनके दोनों पांव हवा में थे। राकेश मारिया ने संजय दत्त के लंबे बालों को पकड़ा और उनकी आंखों में घूरते हुए कहा, मैं तुमसे सभ्यता से सवाल पूछ रहा हूं और तुम भी मुझे वैसे ही जवाब दोगे।

    सब कुछ किया कुबूल

    सब कुछ किया कुबूल

    सर क्या आपसे अकेले में बात कर सकता हूं? संजय दत्त सफेद पड़ चुके थे। राकेश मारिया ने सबको कमरे से बाहर भेज दिया और संजय दत्त ने सब कुबूल कर लिया। हनीफ से लेकर समीर और बाकियों तक, सबका काला चिट्ठा।

    हथियार का क्या किया

    हथियार का क्या किया

    तो क्या हथियार तुम्हारे घर में हैं? राकेश मारिया ने संजय दत्त से पूछा। चलो मुझे दिखाओ कहां। संजय दत्त, रोते हुए राकेश मारिया के पैरों में गिर गए और बताया कि उनके दोस्त हथियारों को नष्ट कर चुके हैं। संजय फिर गिड़गिड़ाए - मेरे पिता को कुछ मत बताईएगा।

    सच बताना ही पड़ेगा

    सच बताना ही पड़ेगा

    राकेश मारिया ने कहा, "मैं झूठ नहीं बोल सकता। मुझे सच बताना पड़ेगा। समय आ गया है कि तुम भी अपनी गलतियों को मानों और उनका भुगतान करो। बड़े बनो और उन्हें कुबूल करो। अपने पिता को बताओ कि तुमने क्या किया है।" लेकिन संजय लगातार गिड़गिड़ाते रहे कि उनके पिता को ये सब ना बताया जाए।

    English summary
    Former DCP Rakesh Maria narrated he had to slap Sanjay Dutt hard enough to make him confess for his deeds after he was arrested in 1993 Bombay Bomb Blast case. Sanjay Dutt was booked under TADA Act - Terrorist and Disruptive Activities Act.
    तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
    Enable
    x
    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    X