'ऑस्कर मिलने से स्लमडॉग श्रेष्ठ नही हो गई'
प्रख्यात फिल्मकार मृणाल सेन फिल्म स्लमडॉग मिलनयर से कतई प्रभावित नही है। फिल्म को मिले आठ ऑस्कर पुरस्कारों के बारे में उनका कहना है ऑस्कर मिलने से कोइ फिल्म श्रेष्ठ नही हो जाती है। मृणाल के अनुसार महान फिल्मकारों को कभी इन पुरस्कारों से नवाजा नहीं गया, जिसमें चार्ली चैपलिन या सत्यजीत रे के नाम शामिल है।
मृगया, भुवन सोम, रातभोर और पदातिक जैसी अनगिनत बेहतरीन फिल्में बना चुके इस वयोवृद्ध फिल्मकार ने मौजूदा दौर की फिल्मों के स्तर पर निराशा जताई। आज अपना 87वां जन्मदिन मना रहे सेन ने कहा कि आजकल की फिल्में मुझे पसंद नहीं। मैंने कुछ चर्चित फिल्में देखी लेकिन पसंद नहीं आई। मैं उनके बारे में बात भी नहीं करना चाहता।
अपनी पुरानी क्लासिक फिल्मों के मास्टर प्रिंट नष्ट होने से व्यथित सेन ने बताया कि सत्तर के दशक में बनी प्रतिदिन, कलकत्ता 71 और खंडहर जैसी 1984 में बनी फिल्म के प्रिंट भी नष्ट होने की कगार पर हैं।
उन्होंने कहा कि फिल्मों के संरक्षण की बात मैं कई साल से कहता आया हूं। मेरे पास इतना पैसा नहीं है कि मैं उन्हें बचा सकूं। केंद्र सरकार से इस बारे में बात हुई है और चुनाव के बाद इस बारे में कोई फैसला लिया जाएगा। हम अपनी धरोहरों को यूं खो नहीं सकते। सत्यजीत रे की कालजई फिल्म पाथेर पांचाली के मास्टर प्रिंट भी लंदन फिल्म महोत्सव के दौरान खराब हो गए थे। फोर्ड फाउंडेशन ने लाखों रूपए खर्च करके उसे बचाया। सेन की भी पुनश्च : 1961 : और प्रतिनिधि : 1964 : के मास्टर प्रिंट नष्ट हो चुके हैं। सेन ने कहा कि यह दुखद है लेकिन मुझे सच्चाई को स्वीकार करना ही होगा।
आखिरी बार 2002 में आमार भुवन बनाने वाले सेन ने निर्देशन का दामन नहीं छोड़ा है लेकिन उन्हें सही पटकथा का इंतजार है।
उन्होंने कहा कि मैं रोज सुबह उठता हूं तो नई पटकथा लिखने की सोचता हूं। पिछले सात साल से ऐसा ही कर रहा हूं। पता नहीं मुझे सही कहानी कब मिलेगी। अपनी सृजनात्मक क्षुधा को कैसे शांत करते हैं, यह पूछने पर उन्होंने कहा कि मैं ऐसी बहुत सी चीजें करना चाहता हूं जो नहीं कर पाया। अपनी हर फिल्म को जब मैं देखता हूं तो मुझे वह ड्रेस रिहर्सल लगती है। मुझे लगता है कि इससे बेहतर कर सकता था। लगता है कि काश अपनी जिंदगी को दोबारा जी सकता और अधिक फिल्में बना सकता।


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